कुप्रथाओं को तोड़ विधवाओं के जीवन में रंग भर रही है ये होली, ये है इसके 5 उद्देश्य

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Widow Holi 2022 - Your Voice Story

Widow Holi in Vrindavan: हमारा समाज कितना रूढ़िवादी समाज है। क्योंकि यदि किसी स्त्री का सुहाग नहीं है तो उसके जीवन में अब कोई रंग ही नहीं है। अब उसका जीवन बेरंग बन गया है। वह ना तो किसी सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग नहीं ले सकती है। विधवा महिलाओं को सिर्फ एक सफेद लिबास में सिमटा दिया गया है। यह कैसा कल्चर है जो किसी महिला के जीवन को बेरंग बना दे रहा है। लेकिन हमारा पितृसत्तात्मक समाज उनको जीवन जीने की आजादी प्रदान ही नहीं कर रहा है कि जिससे वह अपना स्वतंत्र पूर्वक जीवन निर्वाह करें। कई भारतीय राज्य में ऐसा होता है कि विधवा होने के बाद महिलाओं को घर से निकाल दिया जाता है। उनके लिए तब अंतिम एक ही सहारा रहता है आश्रय सदन। उसी में रहकर अपना शेष जीवन व्यतीत करती है ना तो जीवन में कोई खुशी है ना गम है। वह जीवन ऐसे ही चल रहा है। लेकिन वृंदावन में इस रूढ़िवादिता को तोड़ते हुए अब वृंदावन धाम आश्रय सदन में रहने वाली विधवा महिलाओं को होली खेलने की स्वतंत्रता प्रदान की गई है। इस होली ने वृंदावन के फूलों की होली की तरह ही विधवा महिला के जीवन को खुशी और हर्षोल्लास से भर दिया हैं।

विडो होली क्या है? (Widow Holi Kya Hai | What is Widow Holi in Hindi)

सुलभ इंटरनेशनल के अध्यक्ष डॉ बिंदेश्वर पाठक ने भारतीय संस्कृत की प्रतिकूल व्यवहार करके वृद्ध विधवा महिलाओं को होली खेलने के लिए प्रोत्साहित किया है। जिससे उनका नीरस जीवन खुशियों में तब्दील हो जाए। जिसके परिणाम स्वरूप वह जीवन के महत्व को समझें और साथ ही साथ आत्मनिर्भर के कदम पर चल सके।

Widow Holi in Vrindavan - Your Voice Story

विडो होली के उद्देश्य क्या है? (Widow Holi Ke Uddeshya Kya Hai | Objective of Widow Holi in Hindi)

(1) विडो होली का उद्देश्य है कि जो आश्रय सदन में वृद्ध विधवा महिलाएं रहती हैं। उनके बेरंग जीवन में रंग लाया जा सके। जिसके परिणाम स्वरूप वह खुशहाली से जीवन व्यतीत कर सकें।

(2) विडो होली का एक उद्देश्य यह भी है कि इससे भारतीय समाज में अनवरत चली आ रही परंपरा की बेड़िया टूटेगी। और इसी विडो होली की देखी-देखा अन्य राज्य की विधवा महिलाएं होली और अन्य कार्यक्रमों में बिना किसी हिचक के भाग ले सकेंगीं।

(3) इस होली का एक उद्देश्य यह  भी है कि इससे पितृसत्तात्मक की जड़ों पर प्रहार होगा ।जिसके परिणाम स्वरूप महिलाएं स्वावलंबी की ओर कदम बढ़ा सकेंगीं।

(4) इस होली के माध्यम से यह जन जागरूकता फैलाना की विधवा महिलाएं अशुभ की सूचक नहीं होती हैं। बल्कि उनकी भाग लेने से बेरंग कार्यक्रम में या बेरंग पर्व में रंग आ जाता है।

(5) विडो होली शुरुआत करने का एक उद्देश्य यह भी है जिन महिलाओं के अंदर जीने की इच्छा खत्म हो जाती है। इस होली पर्व के माध्यम से उनके अंदर सकारात्मक रंगों का संचार करते हुए उनके जीने की इच्छा को प्रबल करना है। जिसके परिणाम स्वरूप वह बिना अवसाद ग्रस्त की एक स्वास्थ्य पूर्ण जीवन जी सके। और साथ ही साथ आश्रय सदन में रहने वाली महिला गुजिया और मावा पेड़े अवश्य ही बनाती हैं।

निष्कर्ष :

सुलभ इंटरनेशनल के अध्यक्ष डॉ बिंदेश्वरी पाठक ने विडो होली की पहल करके जो आश्रय सदन में रहने वाली महिलाएं हैं उनका जीवन खुशियों से भर दिया है। और इस होली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस होली में जो वृंदावन, मथुरा के आश्रय सदन में रहने वाली वृद्ध विधवा महिला हैं उनको समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। और साथ ही साथ इसका लाभ यह है कि आने वाले समय में हर राज्य से इस होली से प्रेरणा लेकर अपने राज्य में कानून भी बना सकेंगे कि जिससे विधवा महिलाओं को किसी भी समारोह और पर्व में से वंचित न किया जाए।

सामान्य प्रश्न

(1) विडो होली क्या है?

विडो होली वृन्दावन में (Widow Holi in Vrindavan) आश्रय सदन में रहने वाली वृद्ध विधवा महिलाओं के लिए यह होली है।

(2) विडो होली की शुरुआत किसने की?

सुलभ इंटरनेशनल के अध्यक्ष डॉक्टर विन्देश्वर पाठक ने।

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