आप भी जान लीजिये एक चम्मच त्रिफला खाने के ये हैं गुणकारी फायदे

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triphala ke fayde

आयुर्वेद ने समाज के कल्याण में अपना अहम योगदान दिया है जैसे-जैसे विकसित होते गए वैसे- वैसे हमें नई बीमारिया जकड़ती गई। लेकिन आयुर्वेद हमेशा से लोगों को कुछ ना कुछ दिया ही है। यूनानी चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति ने  दोनों अपने समय कॉल में रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हुए है। भारत में आयुर्वेद ने जो चमत्कार करके दिखाया है। वह किसी अन्य मेडिसिन की विधि ने नहीं करके दिखाया है। आप रामायण में देखेंगे की संजीवनी बूटी कैसे लक्ष्मण के प्राण को वापस ला देती है। यह चमत्कार सिर्फ आयुर्वेद ही कर सकता है। अभी हम आयुर्वेद के विषय में नगण्य जानते हैं क्योंकि आयुर्वेद अनन्त है। उसका ज्ञान भी अनन्त है। आज एक ऐसी दवा के विषय बताने वाला हूँ। आयुर्वेद के भाषा मे जिसका नाम त्रिफला है। त्रिफला के नाम से ही मालूम पड़ रहा है कि यह 3 फलों से बना हुआ है। त्रिफला का भी उपयोग वैदिक सभ्यता से उपयोग होता रहा है।

रोगों का निर्मूलन करने वाली त्रिफला क्या है? (Triphala Kya Hota Hai)

त्रिफला कोई वृक्ष नहीं है अपितु त्रिफला 3 फलों से बना हुआ एक औषधि है। जिसमें आंवला और हरड़, बहेड़ा शामिल है।चरक संहिता में त्रिफला को “स्वास्थ्य वर्धनी” के नाम से जाना जाता है। इतना ही नहीं त्रिफला का उपयोग हड़प्पा सभ्यता और मेसोपोटामिया की सभ्यता में उपयोग होता रहा है।

आइए जानते हैं कि त्रिफला में शामिल 3 फलों के विषय में: (Triphala Me Kon Kon Se Phal Hote Hain)

(1) आंवला

आयुर्वेद में आंवला को विशेष दर्जा दिया गया है। आंवला में विटामिन सी और फाइबर जैसे तत्व पाए जाते हैं। आंवला न केवल शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता हैं। बल्कि कब्ज और गैस की समस्या से भी राहत दिलाता हैं। आंवला की खेती उत्तर भारत में एक बड़े पैमाने पर होती है। यह स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है।

(2) हरड़

जितना लाभकारी आंवला है। उतना ही लाभकारी हरड़ भी है। इसमें गैलिक एसिड और टेनिन जैसे तत्व पाए जाते हैं। जो कैंसर कोशिकाओं से लड़ने का कार्य करते हैं। साथ ही साथ शरीर में होने वाले विकारों जैसे गठिया रोग और अर्थराइटिस और नेत्र रोग की समस्या से निजात दिलाते हैं।

(3) बहेड़ा

बहेड़ा भी भारतीय उपमहाद्वीप में आयुर्वेदिक औषधि के रूप में उपयोग होता है। यह हमारे शरीर के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है क्योंकि कब्ज,गैस में बहेड़ा अत्यंत लाभकारी है।

ऐसे कौन-कौन से विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्व है जो त्रिफला को अनूठा बनाता है: (Triphala Me Kon Kon Se Vitamin Hote Hai)

(1) विटामिन सी

(2) बी सिटोस्टेरॉल

(3) गैलिक एसिड

(4) एथिल गैलेट

(5) ग्लोकोज

(6) गैलेक्टोज

(7) रैमनोज

(8) आयरन

(9) कैल्शियम

(10) प्रोटीन

(11) कार्बोहाइड्रेट

त्रिफला के सेवन के पश्चात उस से होने वाले फायदे क्या है? (Triphala Ke Kya Kya Fayde Hain)

(1) आंखों के रोग को ठीक करने में सहायक

त्रिफला आंखों के रोग जैसे ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसे रोग को ठीक करता है। इसका कारण है त्रिफला में anti-inflammatory के गुण पाए जाते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप हमारे आंखों में होने वाले जलन और दूर दृष्टि दोष और निकट दृष्टि दोष जैसे रोगों से छुटकारा मिलता है। इसमें विटामिन सी भी पाया जाता है। विटामिन सी आंखों और बालों के लिए अत्यंत लाभप्रद है।

(2) चर्म रोग से भी निजात दिलाता है

किसी भी व्यक्ति को खाज ,खुजली और दाद और फोड़े फुंसी हो जाएं तो उसे त्रिफला चूर्ण पाउडर के लेप को प्रभावित स्थान पर लगाना चाहिए। इससे खाज खुजली और दाद और फोड़े फुंसी ठीक हो जाएंगे क्योंकि त्रिफला एंटी बैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबॉयल जैसे गुणों से परिपूर्ण है।

(3) त्रिफला मुख से जुड़ी जितनी भी समस्याएं हैं उनको ठीक करता है

त्रिफला मुख से जुड़ी समस्याएं जैसे कि सांस की बदबू और दांतो से जुड़ी समस्याएं इसके अलावा छाले जैसे समस्याओं से निजात दिलाता है। त्रिफला के चूर्ण को एक गिलास पानी में डालकर गर्म करने के पश्चात जब पानी ठंडा हो जाए उसका गरारा करने से मुंह से जुड़ी जितनी भी समस्याएं हैं उन से निजात मिल जाती है। क्योंकि त्रिफला में एंटीबैक्टीरियल के गुण पाए जाते हैं जो सांसो की बदबू और दांतो से जुड़ी समस्याएं को ठीक करता है।

(4) कब्ज गैस की समस्या को भी ठीक करता है

गुनगुने पानी से यदि त्रिफला के चूर्ण का सेवन किया जाए। इससे कब्ज गैस की समस्या से काफी हद तक निजात मिलती है क्योंकि त्रिफला में विटामिन सी और गैलिक एसिड जैसे तत्व पाए जाते हैं जो कब्ज गैस से राहत प्रदान करने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।

(5) रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है

त्रिफला शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। क्योंकि इसमें ऐसे अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए बहुत जरूरी है जैसे कि एथिल गैलेट और चेबुलेजिक एसिड इसके अलावा मैनिराल जैसे तत्व पाए जाते हैं जो रोग प्रतिरोधक को बढ़ाते हैं।

(6) कैंसर रोगों में भी सहायक है

भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के संयुक्त शोध से पता चला है कि त्रिफला में कैंसर विरोधी साइटोटाक्सीसिटी को प्रेरित करता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि साइटोटाक्सीसिटी ट्यूमर सेल में पाया जाता है जो कोशिका मृत्यु के वाहक का कार्य करता है। साइटोटाक्सीसिटी इसलिए प्रभावित होता है क्योंकि त्रिफला में पालीफिनाल गैलिक पाया जाता है।

त्रिफला के सेवन के पश्चात शरीर पर होने वाले उसके दुष्प्रभाव क्या है? (Triphala Ke Nuksan Kya Kya Hain)

त्रिफला की तासीर गर्म होती है इसके अधिक सेवन से पेट में सूजन और गैस की समस्या हो सकती है ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि गर्भवती महिलाओं को भूल कर के भी त्रिफला का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे गर्भपात की समस्या हो सकती है और जो महिला स्तनपान कराती है उन्हें भी त्रिफला का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी सेवन की पश्चात बच्चे को दस्त की समस्या हो सकती है। त्रिफला का सेवन यदि आपको करना है तो किसी आयुर्वेदाचार्य के परामर्श से ही करें क्योंकि इसके अधिक सेवन से हमारे शरीर को कई कष्टों का सामना भी करना पड़ सकता है।

त्रिफला का उपयोग कैसे करना है? (Triphala Ka Upyog Kaise Karen)

यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि त्रिफला का उपयोग कैसे करना है? आपको बता दें कि यह रोग के ऊपर निर्भर करता है। यदि आपको फोड़े फुंसी समस्या है तो तब आप इसका लेप लगा सकते हैं। यदि आपको कब्ज गैस और कैंसर साथ ही साथ मुख समस्या है तब आप इसके चूर्ण को गुनगुने पानी में डालकर पीजिए। पीने से पहले किसी नजदीकी आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लेले। परामर्श लेने से यह फायदा होगा कि दवा का कितने दिन तक सेवन करना है और यदि कोई दुष्प्रभाव दिख जाता है उससे निजात कैसे निजात मिल सकता हैं।

निष्कर्ष

त्रिफला एक ऐसी औषधि है जिसमें तीन फल मिला हुआ है। आंवला, हरड़ और बहेड़ा। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। चर्म रोग से छुटकारा मिलता है। सांसो में जो बदबू है उससे राहत मिलती है और साथ ही साथ कैंसर के रोग में भी सहायक है। ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि इसके सेवन करने से पहले आयुर्वेदाचार्य अवश्य ही परामर्श कर ले।

सामान्य प्रश्न

(1) त्रिफला सेवन का सही समय क्या है?

त्रिफला के सेवन का उचित समय सुबह और शाम है। सुबह भोजन से पहले और शाम को भोजन से पहले त्रिफला का सेवन करना चाहिए।

(2) त्रिफला का सेवन कब नहीं करना चाहिए

अवसाद और चिंता और साथ ही साथ नींद से जुड़ी समस्या हो। तब आपको भूल कर के भी त्रिफला का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे आपको लाभ से ज्यादा हानि हो सकती है क्योंकि यदि आपको नींद की समस्या है तब आप त्रिफला का सेवन कर रहे हैं तब आपको अनिद्रा की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

(3) पेट साफ करने के लिए त्रिफला का सेवन कैसे करें?

रात को भोजन करने के पश्चात गुनगुने पानी में त्रिफला चूर्ण को मिलाकर के पीने से पेट साफ हो जाता है।

(4) त्रिफला की तासीर कैसी है?

त्रिफला की तासीर गर्म होती है इसलिए गर्मियों में इसका अत्यधिक सेवन न करें।

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