त्वचा से संबंधित रोग के लिए टी ट्री आयल बहुत महत्वपूर्ण है

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1995
tea tree oil ke fayde

आजकल त्वचा से संबंधित रोग जैसे दाद, खाज- खुजली और फोड़े फुंसी आम बात हो गए हैं। हर व्यक्ति कभी न कभी जीवन में इससे अवश्य ही गुजरा है। जीवन के बदलते दौर में मुहासा भी अपना अहम रोल अदा करता है। जब हम किशोरावस्था से वयस्कावस्था में प्रवेश करने लगते हैं। उसी दौरान हमारे शरीर में हार्मोन परिवर्तन होता है। जिसके परिणामस्वरूप चेहरे में मुहासा हो जाता है। जिससे हम बहुत परेशान हो जाते हैं और इससे निजात पाने के लिए तरह-तरह के घर के वैद्य और हकीम के नुस्खे और नानी के बताए हुए नुस्खे का उपयोग करते हैं। लेकिन परिणाम शून्य निकलता है। लेकिन आप घबराइए मत आज मैं ऐसे ही एक तेल के विषय में बताने वाला हूं जो आपके चेहरे से संबंधित रोग जैसे फोड़े -फुंसी और मुहासा आदि को ठीक कर देता है। इसमें ऐसे -ऐसे कंपाउंड पाए जाते हैं जो त्वचा की समस्या के अलावा बालों की समस्या शरीर की दुर्गंध को दूर करने में अहम रोल अदा करता है तो अब बिना देरी किए हुए आइए जानते हैं कि आखिरकार क्या है टी ट्री आयल।

मन में यह प्रश्न उठा रहा होगा कि आखिरकार टी ट्री आयल क्या है? (Tea Tree Oil Kya Hota Hai)

टी ट्री आयल के नाम से प्रतीत हो रहा होगा कि यह तेल चाय के पौधे से निकाला जाता है या चाय की पौधे से बनता है या चाय के बीज से बनता है। लेकिन यह असत्य है। सत्य बात यह है कि टी ट्री आयल मेलेलुका अल्टीफोनिया नामक वृक्ष से प्राप्त किया जाता है। इस वृक्ष की लंबाई 7 मीटर होती है। इसके पत्तों से ही तेल निकाला जाता है।

टी ट्री आयल में पाए जाने वाले कंपाउंड कौन-कौन है जो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बहुत ही लाभदायक है: (Tea Tree Oil Me Paye Jane Vale Compound Kya Kya Hai)

(1) अल्फा पिनीन

(2) बीटा पिनीन

(3) सेबिनीन

(4) मायसीन

(5) अल्फा फेलाइन्ड्रीन

(6) अल्फा टेरपीनिन

(7) लिमोनेन

(8) सिनेओल

(9) गामा – टेरपीनिन

(10) पैरा सेमीन

(11)ट्र पिनोलिन

(12) अल्फा टेरपिनाल

टी ट्री आयल में कौन-कौन से गुण पाए जाते हैं? (Tea Tree Oil Me Kon Kon Se Gun Paye Jate Hai)

(1) एंटीवायरल

(2) एंटीफंगल

(3) एंटीबैक्टीरियल

(4) एंटीमाइक्रोबियल्स

(5) एंटी इंफ्लेमेटरी

(6) एंटीऑक्सीडेंट

टी ट्री आयल के उपयोग से होने वाले शरीर पर फायदे क्या है? (Tea Tree Oil Ke Fayde Kya Kya Hai)

(1) मुहांसों से संबंधित रोग को दूर करता है

गर्मियों के मौसम में गर्मी के कारण अधिक पसीने होने से चेहरे में मुंहासे हो जाते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप चेहरा भद्दा दिखने लगता है। लोग इस मुंहासे को चेहरे से हटाने के लिए एलोपैथिक मेडिसिन होम्योपैथिक मेडिसिन और होम रेमेडी भी करते हैं। लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकलता है। टी ट्री आयल चेहरे के मुहासे को ठीक करता है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरिया के गुण पाए जाते हैं।

(2) रूसी की समस्या से निजात दिलाता है

रूसी एक ऐसी समस्या है। जिसकी वजह से सर के बाल झड़ने लगते हैं। रूसी से छुटकारा पाने के लिए हम दही, नींबू और अंडा ना जाने क्या-क्या लगाने लगते हैं। लेकिन सर पर से रूसी ना खत्म होने का नाम ही नहीं लेती है। इसके लिए आप टी ट्री आयल को नारियल के तेल में या जैतून के तेल में मिलाकर सर में मालिश करने से रूसी की समस्या खत्म हो जाती है।

(3) घर में मच्छर पनपने से रोकता है

बरसात के दिन में पानी जमा होने के कारण आसपास मच्छर उत्पन्न हो जाते हैं। जिससे वहां रहने वाले लोगों के लिए समस्या हो जाती है और डेंगू और मलेरिया जैसे रोग होने लगते हैं। टी ट्री आयल को पानी में मिला करके पोछा लगाने से मच्छर वहां नहीं आते हैं। यदि रात को सोते समय मच्छर परेशान करते हैं तब आप टी ट्री आयल के कुछ बूंदो को हाथ में लेकर के मल करके अपने शरीर में लगा लीजिए से मच्छर आपको नहीं काटेगा क्योंकि टी ट्री आयल में एंटीमाइक्रोबॉयल और एंटी इन्फ्लेमेटरी के गुण पाए जाते हैं।

(4) पसीने की दुर्गंध को दूर करता है

टी ट्री आयल पसीने की दुर्गंध को भी दूर करता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल के गुण पाए जाते हैं। टी ट्री आयल के कुछ बूंद को मिलाकर के नहाने से पसीने की दुर्गंध दूर हो जाती है।

(5) चोट और घाव को भी ठीक करने का काम करता है

टी ट्री आयल एंटीसेप्टिक होता है। यदि आपको कहीं पर घाव हो गया है। उस घाव पर टी ट्री आयल लगाने से घाव जल्दी भरने लगता है और टिटनेस की भी समस्या नहीं रहती हैं।

(6) स्किन से जुड़ी समस्याओं को भी ठीक करता है

यदि आपके चेहरे में असमय से पहले झुर्रियां पड़ गई हो तो उन झुर्रियों को ठीक करने के लिए प्रतिदिन सोने से पहले टी ट्री आयल को जैतून के तेल में मिलाकर मसाज करने से चेहरे की झुर्रियां खत्म हो जाती है। इसके अलावा स्किन से जुड़ी और समस्या जैसे फोड़े फुंसी और मुंह के छालों को भी ठीक करता है।

टी ट्री आयल के उपयोग के परिणाम स्वरूप शरीर पर होने वाले उसके दुष्प्रभाव क्या है? (Tea Tree Oil Se Hone Wale Nuksan Kya Hai)

टी ट्री आयल को मुंह में लगाते वक्त या मुंह के अंदर नहीं जाना चाहिए अन्यथा आपको निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न हो सकती है यह समस्या एलर्जी के कारण भी हो सकती है

(1) मतिभ्रम

(2) कोमा

(3) कमजोरी

(4) उल्टी दस्त

(5) पेट खराब

निष्कर्ष

टी ट्री आयल एक ऐसा वृक्ष है। जिसके पत्ते स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अत्यंत लाभदायक हैं जो हमें अनेक समस्या जैसे त्वचा की समस्या, बालों की समस्या और मच्छर की समस्या और पसीने की समस्या से निजात दिलाता है।

सामान्य प्रश्न

(1) सबसे अच्छा टी ट्री आयल कौन होता है?

सबसे अच्छा टी ट्री आयल मोडीकेयर टी ट्री आयल और खादी टी ट्री आयल और द बॉडी शॉप ब्यूटी ट्री आयल होता है।

(2) टी ट्री आयल का वैज्ञानिक नाम क्या है?

टी ट्री आयल का वैज्ञानिक नाम मेलेलुका अल्टीफोनिया हैं।

(3) टी ट्री ऑयल कैसे बनता है?

टी ट्री आयल ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले मेलेलुका अल्टीफोनिया नामक वृक्ष के पत्ते से निकाला जाता है वह भी भाप के माध्यम से।

(4) टी ट्री आयल का इस्तेमाल कैसे करें?

टी ट्री आयल का इस्तेमाल करने के लिए आपके पास रुई का फाहा या स्वच्छ कपड़े का टुकड़ा या पैड होना चाहिए। यदि इनमें से कोई आपके पास एक है। उसमें टी ट्री आयल की कुछ बूंदों को गिरा करके  प्रभावित जगह पर जैसे कील ,मुंहासे, फोड़े- फुंसी पर लगा सकते हैं।

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