त्रिकालदर्शी, अविनाशी, अजन्मा शिव के विषय में चर्चा करना मंगलकारी है

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हर व्यक्ति अपने दुखों से परेशान हैं। जिसके लिए वह दुखों से निजात के लिए तरह-तरह की योजनाएं बनाता है। लेकिन मनोनुकूल परिणाम नहीं होने पर सारी योजनाएं विफल हो जाती हैं। अंततः वह हार कर के प्रभु के चरणों में अपने आप को समर्पित कर देता है कि हे प्रभु आप मेरे सारे दुखों को हर लीजिए। जिससे मैं अपने कर्तव्य का निर्वाह करने में सक्षम हो सकूं। जीवन में दुःख को दूर करने वाले त्रिकालदर्शी शिव की यदि विशेषताओं के विषय में चर्चा किया जाए तो हमें दुखों से मुक्ति मिल सकती है क्योंकि शिव संहार के देवता हैं। जीवन में आने वाले हर विपदा को हर लेते हैं।

शिव चर्चा क्या होता है? (Shiv Charcha Kya Hota Hai)

जब दो मनुष्य या उससे अधिक मनुष्य शिव के रूद्र अवतार और शिव के त्रिगुणातीत के अलावा शिव के स्वयंभू अजन्मा स्वरूप के विषय में चर्चा करते हैं। तब हम उसे शिव चर्चा कहते हैं। शिव चर्चा में शिव के विशेष कृत्यों की चर्चा होती है। चर्चा करने के परिणाम स्वरूप शिव के भक्त आनंद महसूस करते हैं। जिससे जीवन में रोग विकार दूर हो सके और जीवन सुखमय व्यतीत हो सके।

शिव चर्चा में शिवजी से क्या माँगा जाता है? (Shiv Charcha Me Shivji Se Kya Manga Jata Hai)

(1) दया मांगना 

शिव चर्चा में शिवजी से भक्त लोग दया मांगते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप उनके जीवन में आने वाली समस्याएं शिवजी हर सके। भक्त लोग सच्चे मन से या निर्मल मन से कहते हैं कि हे शिव मेरे जीवन में आने वाला जो दु:ख है उन दुखों को आप दूर कीजिए। मैं आपका शिष्य हूँ आप मेरे गुरु हैं। आप अपने शिष्य के ऊपर दया करिए। जिससे हम किसी भूत पिशाच और अहंकार और राग-द्वेष के भय में ना आए।

(2) चर्चा करना

दया माँगने के परिणाम स्वरूप भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ शिव के 18 रूद्र अवतार के विषय में चर्चा करते हैं। चर्चा करते हैं कि किस प्रकार शिव किस-किस अवतार में या किस किस रूप में दुष्टों से मनुष्य की रक्षा की थी। और उन्होंने कैसे प्रजापति दक्ष के अहंकार को नष्ट किया था। और प्रेम की ऐसी प्रति मूर्ति स्थापित की जो भविष्य में कोई ना कर सका क्योंकि उनके प्रेम में मोह की दुर्गंध नहीं था। उनका प्रेम निराकार और निष्पक्ष शुद्ध जल की भांति था। जिसका जल सभी पशु- पक्षी मानव दानव सब उपयोग कर सकते हैं बिना किसी रोक-टोक के।

(3) नमन करना

शिव के गुरु की चर्चा करने के बाद अंत में शिव भक्त शिव को नमन करते हैं। जिसमें कहते हैं की हे शिव यदि मुझसे शिव चर्चा के दौरान कोई त्रुटि हुई है। इस त्रुटि को आप माफ करिएगा। मैं आपका अज्ञानी भक्तों हूँ।भक्तों से कोई ना कोई त्रुटि जाने अनजाने में अवश्य हो जाती है। इसलिए आप अपने शिष्य पर दया की दृष्टि अवश्य बनाएं। मैं नतमस्तक होकर के आपके चरणों में अहंकार भोग विलास की वस्तुओं को त्याग करने के लिए आप से आशीर्वाद मांगता हूं। जिससे मैं आध्यात्मिक की ओर अग्रसर हो सकूं। शिव चर्चा में शिव को नमन करने की दो विधियां पहली विधि है माला के माध्यम से और दूसरी विधि है जापके माध्यम से।

ये हैं शिव चर्चा के ३ सूत्र जिसके लिए शिव जी पूरे संसार में खुद के ३ सूत्रों के लिए जाने जाते हैं।

शिव चर्चा के लाभ क्या है? (Shiv Charcha Ke Labh Kya Hai)

शिव चर्चा से होने वाला लाभ सर्वप्रथम यह है कि इससे आपके मन में होने वाले विकार का छय होगा। साथ ही साथ मन में होने वाले विकार का ह्रास होगा। परिवार में जो आपसी रंजिश की समस्या होती है। वह भी दूर होगी परिवार में एकता की भावना उत्पन्न होगी। इसके अलावा जिस निसंतान दंपति को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है शिव चर्चा के बाद उसकी सुनी गोद खिलखिलाते बच्चों के साथ भर जाएंगे।

निष्कर्ष

शिव चर्चा शिव भक्तों के लिए सबसे अच्छा माध्यम माना जाता है। जिसमें शिव के विशेष स्वरूपों की चर्चा की जाती है। इसके अलावा शिव की महत्ता के विषय में भी चर्चा होती है। शिव निराकार देवों के देव महादेव और महाकाल है। हर भक्त शिव की भक्ति में डूब कर के जो आनंद प्राप्त करता है। उसका शब्दों में वर्णन करना श्रेयस्कर नहीं होगा।

सामान्य प्रश्न

 (1) शिव का ध्यान कैसे करे?

शिव का ध्यान करने के लिए सर्वप्रथम सिध्दासन या सुखासन की मुद्रा में बैठ जाइए। उसके बाद मूलाधार चक्र या कुंडली चक्र से सहस्रार चक्र की यात्रा करिये और  ओम नमः शिवाय का जाप करिए।

(2) शिव चर्चा का प्रादुर्भाव किस सन में हुआ?

शिव चर्चा का प्रादुर्भाव सन 1965 से माना जाता है। लेकिन जनमानस में सन 1977 में आया। शिव चर्चा का जनमानस में प्रचार- प्रसार श्री गुरु भैया हरिंद्रानंद को दिया जाता है।

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