संजीवनी बूटी जैसे आवश्यक गुणों से युक्त है शल्लकी

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Shallaki ke Fayde

Shallaki ke Fayde: प्राचीन काल से शल्लकी का उपयोग मंदिरों में पूजा पाठ के लिए उपयोग होता रहा है। इसके उपयोग के पीछे का कारण यह है कि इसका  सुगन्ध मंत्रमुग्ध करने वाला होता है। मंदिर में इसके जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आप सोच रहे होंगे कि शल्लकी है क्या? आपको बता दे शल्लकी का प्रचलित नाम लोबान है। लोबान से आप परिचित अवश्य होंगे ग्रामीण समाज में इसका उपयोग पूजा पाठ के लिए प्राचीन काल से होता चला आ रहा है। लोबान का उपयोग अगरबत्ती को बनाने में और अन्य आयुर्वेदिक औषधि जो रोगों को क्षण भर में ठीक कर देती है उसको बनाने में भी उसका उपयोग होता रहा है। आज हम कुछ ऐसे विषय जानेंगे जिसमें  शल्लकी का उपयोग करके अपने शरीर के रोगों से निदान पा सकते हैं वह भी घर बैठे।

अपने गुणों से हैरतंगेज करने वाला शल्लकी क्या है?

Shallaki ke Fayde: शल्लकी एक प्रकार का गोंद है जो बोसवेलिया पेड़ से प्राप्त किया जाता है। वैसे तो बोसवेलिया पेड़ की कई प्रजातियां है लेकिन भारत में बोसवेलिया सेराता प्रजाति हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के क्षेत्रों में पाया जाता है। शल्लकी के पत्ते को हाथी बड़े चाव से खाते हैं। इस पेड़ की लंबाई 18 मीटर तक होती है। बहुत छायादार होता है इसके अलावा इसकी पत्तियों की डेन्सिटी बहुत ज्यादा होती है। इसके तनो में लाल रंग का गोंद पाया जाता है जिसे शल्लकी कहते हैं।

शल्लकी में पाया जाने वाले पोषक तत्व कौन कौन से है?

(1)एस्कॉर्बिक एसिड( एस्कार्बिक एसिड विटामिन सी का रासायनिक नाम है)

(2)थियोबॉर्बिट्यूरिक एसिड

(3)ब्यूटिलेटेड हाइड्रोक्सीटोल्यूएन फेर्रिक क्लोराइड

(4)उर्सोलिक एसिड

(5)डाइमिथाइलथिजोल

(6)डाईक्लोरोफ्ल्यूरोसिन डायसेटेट

(7)डीफेनिलटेट्रीजोलियम ब्रोमाइड

(8)बोसवेलिक एसिड

(9)सोडियम एसीटेट ट्राइहाइड्रेट

(10)ट्रिफराइडल-एस-ट्रियाजाइन

शल्लकी को अन्य भाषाओं में किस- किस नाम से जाना जाता है

भाषानाम
हिंदीसालई
सलई गूगुल
लबान
तमिलकुंदुरुक्कम
कन्नड़धूप
पंजाबीसाल्ही
बंगालीकून्डूर
 सलै
मलयालमपालनकाम

शल्लकी के उपयोग से होने वाले फायदे (Shallaki ke Fayde) क्या- क्या होते है?

(1) अर्थराइटिस के रोगों से छुटकारा दिलाने में हेल्प करता है

Shallaki ke Fayde: अर्थराइटिस एक ऐसा रोग होता है, जिसमें रोगी के कलाइयों में सूजन और हाथों और पैरों की अंगुलियों में सूजन आ जाती है जिसके परिणामस्वरूप इस सूजन के साथ दर्द भी होता है। यह असहनीय पीड़ा होती है। अर्थराइटिस रोग पर नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन ने शल्लकी पर रिसर्च किया। रिसर्च का रिजल्ट यह आया कि यह अर्थराइटिस रोग को ठीक करने में अपनी अहम भूमिका निभाया अर्थात कहने का मतलब यह है कि इसमें एंटी अर्थराइटिस का गुण पाया गया। इस गुण का पाए जाने का कारण यह है कि इसमें संयुक्त रूप से anti-inflammatory और साथ ही साथ एंटीऑक्सीडेंट के पाए जाने के कारण संभव हो पाया।

Shallaki ke Fayde

(2) कैंसर के जोखिम से बचाने में भी हेल्प करता है

ब्रेस्ट कैंसर और आंत कैंसर के रोगियों पर नेशनल सेंटर फॉर कैंसर इंस्टीट्यूट ने शल्लकी पर रिसर्च किया। इस रिसर्च के परिणाम स्वरूप यह पाया गया कि शल्लकी इन्फ्लेशन की दर को कम करके उसे ब्रेस्ट कैंसर और आंत के  कैंसर को ठीक करने में अपनी अहम भूमिका निभाता है।

(3)आंतो की सूजन से राहत प्रदान करता है

आंतों में सूजन होने को अल्सर कोलाइटिस बोलते हैं। अल्सर कोलाइटिस एक जानलेवा बीमारी है। यदि इसका समय से उपचार न किया जाए तो रोगी के प्राण को निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ता है। शल्लकी पर एनल्स ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी नी रिसर्च किया। रिसर्च में पाया गया कि यह अल्सर कोलाइटिस से निजात तो दिलाता ही है। इसके अलावा इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज और क्रोन्स डिजीज से भी निजात दिलाता है।

(4) अस्थमा के रोग से राहत प्रदान करता है

जर्मनी के तुबिंजन विश्वविद्यालय ने ब्रोन्कियल अस्थमा से पीड़ित रोगियों के ऊपर जब शल्लकी का रिसर्च किया तो उस रिसर्च में पाया गया कि ब्रोन्कियल अस्थमा से पीड़ित व्यक्तियों के फेफड़ों में लगभग 70% का सुधार हुआ है। वह आसानी से सांस ले पा रहे हैं और यह भी देखा गया कि अस्थमा  अटैक का खतरा भी कम हो गया है।

(5) डायरिया रोग में असरदायक

ब्रिटिश जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी के अनुसार आंतों में सूजन के कारण डायरिया की प्रॉब्लम को ठीक करने में मदद करता है इसके अलावा डीएक्टिवेट हाथों को भी एक्टिवेट करता है।

Shallaki ke Fayde
शल्लकी से होने वाले दुष्प्रभाव क्या- क्या होते हैं?

(1) अचानक वजन में बढ़ोतरी

(2) एलर्जी की प्रॉब्लम

शल्लकी का उपयोग किस रूप में किया जा सकता है

(1) अरोमाथेरेपी के रूप में

(2) यदि गठिया रोग है तब आप शल्लकी को नारियल के तेल में मिलाकर प्रभावित जगह पर मालिश करिए ठीक हो जाएगा।

(3) यदि आपको इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज या क्रोन्स डिजीज हुआ है तब आप इसका सेवन दिन में तीन बार सौ -सौ ग्राम पानी के साथ या किसी पोषक युक्त खाद्य पदार्थ के साथ कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

Shallaki ke Fayde: शल्लकी डायरिया रोग और अर्थराइटिस रोग इसके अलावा आंतों की सूजन और कैंसर की बीमारी से निजात दिलाता है। यह टूटी हुई हड्डियों को भी जोड़ देता है यदि एक शब्दों में कहा जाए तो यह शरीर के लिए किसी कोहिनूर के हीरे से कम नहीं है।

FAQ:

(1) शल्लकी क्या है?

शल्लकी बोसवेलिया वृक्ष के तनो में पाया जाने वाला लाल रंग का एक गोंद होता है।

(2) बोसवेलिया किसके लिए अच्छा है?

बोसवेलिया अस्थमा रोग, कैंसर रोग, इन्फ्लेमेटरी बाबेल डिजीज, क्रोन्स डिजीज और अल्सर कोलाइटिस में सबसे अच्छा होता है।

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