इस दिन होता है रंग पंचमी का आगाज़, जानिए इसकी विशेषताएं और शुभ मुहूर्त

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Rang Panchami 2022- Your voice Story

फाल्गुन मंथ में कृष्ण पक्ष के पंचमी दिन पर रंग पंचमी (Rang Panchami) मनाई जाती है। यह पर्व होली का ही एक भाग है। लेकिन महाराष्ट्र में रंग पंचमी को ही होली कहा जाता है। इसका नाम ही है रंग का पंचमी अर्थात या होली के 5 दिनों बाद आता है । हमारा जीवन यदि सकारात्मक रंगों से भरा हो तब हम जो भी कार्य करेंगे वह समाज के लिए लाभदायक होगा। क्योंकि मन में राग-द्वेष की भावना नहीं  रहेगी। और निष्काम कर्म करने के लिए प्रेरणा भी मिलेगी। जीवन खुशहाली से भर जाएगा। ना कोई दुख रहेगा और ना ही कोई राग रहेगा। सिर्फ जीवन आनंदमय व्यतीत होगा। इस रंग पंचमी में लोग ऐसे घुल मिल जाते हैं रंगों की तरह उनमें जाति -धर्म की जो रेखा है वह रेखा कई रंगों में मिलकर एक ही रंग का निर्माण करती है। जिसके परिणाम स्वरूप जीवन की महत्ता हमें समझ में आने लगती है। क्योंकि यह पर्व हमें संदेश देता है कि जीवन रंगों की भांति है कोई हरा रंग है, कोई पीला रंग है, कोई नीला रंग है सब रंग की अपनी महत्ता है बस इसे साक्षी भाव से देखो। इसमें संलिप्त मत हो जाओ बस निर्लिप्त की अवस्था में रहो। फूलों की होली की तरह रंग पंचमी में भी रंगों के लिए टेसू के फूलों का यूज किया जाता हैं।

रंग पंचमी क्या है? (Rang Panchami Kya Hai | What is Rang Panchami in Hindi)

वृंदावन और मथुरा में होली समापन के 5 दिन बाद रंग पंचमी मनाई जाती है। इसमें श्री कृष्ण भगवान और राधा की पूजा की जाती है। जिससे हमारे जीवन में प्रेम और करुणा, दया ,परोपकार और साथ ही साथ सहनशीलता की भावना उत्पन्न हो सके। 

Rang Panchami Kya Hai- Your Voice Story

रंग पंचमी की विशेषता क्या है? (Rang Panchami Ki Visheshta Kya Hai | Significance of Rang Panchami in Hindi)

(1) मथुरा और वृंदावन में रंग पंचमी को होली के समापन के रूप में जाना जाता है।

(2) रंग पंचमी में सूखे रंगों का प्रयोग किया जाता है अर्थात सूखे रंगों को हवा में उड़ाया जाता है और लोग नाचते हैं और लोक गीत भी गाते हैं।

(3) ऐसी धारणा भी प्रचलित है कि इस रंग पंचमी को देवता लोग स्वर्ग से देखते हैं। और कई देवता लोग मनुष्य का वेश बनाकर इस रंग पंचमी में भाग भी लेते हैं।

(4) रंग पंचमी की एक विशेषता यह है कि उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बड़े उत्साह पूर्वक से रंग पंचमी को मनाया जाता है।

(5) रंगपंचमी की एक सबसे बड़ी विशेषता यह है कि महाराष्ट्र में होली को ही रंग पंचमी कहा जाता है।

(6) रंग पंचमी की एक विशेषता यह है कि यह विविधता में एकता को स्थापित करता है अर्थात यह रंग पंचमी देश के कोने- कोने में मनाया जाता है ।और यहां तक कि विदेश में भी विदेशी लोग जो कृष्ण की भक्त हैं। वह भी बड़े धूमधाम से रंग पंचमी मनाते हैं।

इस बार की रंग पंचमी का शुभ मुहूर्त का समय क्या है? (Rang Panchami ka Shubh Muhurt Kab Hai)

(1) 22 मार्च 2022 को सुबह 6 बजकर 25 मिनट से रंग पंचमी के शुभ मुहूर्त का प्रारम्भ होता हैं।

(2) 23 मार्च 2022 को सुबह 4 बजकर 20 मिनट पर रंग पंचमी के शुभमुहूर्त का समापन होगा। लठमार होली के शुभ मुहूर्त और रंग पंचमी का शुभ मुहूर्त का समय एक सा रहता है ध्यातव्य है कि ऐसा संयोग कई वर्षों के बाद बनता हैं।

निष्कर्ष 

रंग पंचमी होली समापन का सूचक है ।इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस रंग पंचमी होली में भगवान श्री कृष्ण समेत उनकी बड़े भ्राता बलराम और राधा भी भाग लेती हैं और इस होली का लाभ यह है कि यह हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है जैसे कि दया, प्रेम, करुणा, परोपकार आदि का। और महाराष्ट्र राज्य में रंग पंचमी को ही होली कहा जाता है।

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