दोस्तों आप सबने रहीम दास का नाम अवश्य सुना होगा। (Rahim Das ke Jivan Parichay) जो एक कुशल सैनिक और साथ ही साथ यह एक आश्रयदाता थे। अर्थात वह लोगों को अपने यहां आश्रय प्रदान करते थे।

क्या आप यह जानते हैं रहीम दास जी कौन थे? उनका जन्म कहां हुआ था? और साथ ही साथ उनकी माता का क्या नाम है? रहीम दास किसके नेतृत्व में पले – बढ़े है आदि जानकारी आपको इस आर्टीकल में दी जाएगी । बस आपसे विनम्र पूर्वक आग्रह करता हूं कि इस आर्टीकल को आप ध्यानपूर्वक पढ़िए जिससे आपको कोई समस्या ना उत्पन्न हो। यदि आप आर्टीकल के किसी भी पार्ट को छोड़ देते हैं तब आपको समस्या होने लगेगी की रहीम दास जी का जन्म कहां हुआ था? और उनकी माता का क्या नाम है ? इसलिए आपसे निवेदन है की आर्टीकल को लाइन टू लाइन पढ़िए जिससे आपको कोई समस्या ना हो।

रहीम दास कौन थे? (Rahim Das Kon The | Who Was Rahim Das)

रहीम दास जिनका पूरा नाम था अब्दुल रहीम खान – ए खाना। इनका जन्म 17 दिसंबर 1556 में पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। इनके  पिता का नाम बैरम खान और माता का नाम सुल्ताना बेगम था।

सुल्ताना बेगम जमाल खान की छोटी बेटी थी। और रहीम दास की पत्नी का नाम महा बानो था ।वह एक सगुण भक्ति धारा के कवि थे। उनका धर्म इस्लाम था। उनकी मृत्यु 1 अक्टूबर 1627 में हुआ था। रहीम दास बचपन से ही तीक्ष्ण बुद्धि वाले थे। और अपने आप को पूरी तरह से ईश्वर के चरणों में समर्पित कर चुके थे।

और साथ ही साथ मुगल सम्राट अकबर के कई अभियानों का सैनिक नेतृत्व भी कर चुके हैं ।और इनकी विशेषता यह है कि बेघर को आश्रय प्रदान करते थे। और जो दीन-  दुखी व्यक्ति होते थे उनकी पूरी तरह मदद करते थे।

रहीम दास के दोहे (Rahim Das Ke Dohe)

Rahim Das Ke Jivan Parichay

वृक्ष कबहु नही फल भखै,नदी न संचै नीर।

परमारथ के कारने ,साधुन धरा शरीर।।

अर्थात जिस प्रकार वृक्ष अपना फल स्वयं नहीं खाता और नदी अपना जल स्वयं नहीं संचित करता ।और  मनुष्य परोपकार के लिए मनुष्य योनि में जन्मता है। इस दोहे का आशय यह है कि यदि हम ऊपर जाएंगे तो अपने साथ कुछ नहीं ले जाएंगे ।इसलिए हर समय  धर्म का वाहन करना चाहिए। जिससे जीवन कल्याणमय बने।

रुठै सुजन मनाइए ,जो रूठे सौ बार।

रहिमन फिरि पोइए ,टूटे मुक्ता हार।।

इस दोहे में रहीम दास जी ने कहा है कि आपका प्रिय व्यक्ति यदि आप से रूठ जाता है। उसको सौ बार मनाइए। यदि वह नहीं मान रहा है तो उसे बार-बार मनाइए। यदि वह व्यक्ति एक बार आपसे नाराज हो गया बिछड़ गया ।तब आप उसे खो देंगे। जिस प्रकार एक मोती का माला टूटने के बाद मोती माला से बिखर जाता है उसको जोड़ने में समय लगता है।

खीरा सिर ते काटि के ,मलियत लॉन लगाय।

रहिमन करुए मुखन को चाहिए यही सजाय।।

इस दोहे के माध्यम से हम सबको रहीम दास जी यह सब ब देना चाहते हैं कि जिस प्रकार खीरा को काटने के बाद उसके ऊपर वाले भाग में नमक रगरा जाता है ।जिससे इसका कड़वापन दूर हो जाए ।उसी प्रकार जो कड़वे मुख वाले होते हैं अर्थात जो कड़वा वचन बोलते हैं उनको भी यही सजा मिलनी चाहिए। जिससे वो भी प्रिय वचन बोले।

रहिमन निज मन की व्यथा ,मन मे राखो गोय।

सुनी इठलैहैं लोग सब ,बाँटि न लैहे कोय।।

रहीम दास दोहे के माध्यम से यह कहना चाहते हैं कि अपने मन की व्यथा को किसी से नहीं कहना चाहिए क्योंकि आपकी मन की व्यथा को सुनने के बाद लोग आपका उपहास उड़ाएंगे। क्योंकि इसका कारण है आपकी निंदा करना से उनको आनंद मिले। और आप इस उद्देश्य के साथ अपना दुख बांटना चाहते हैं जिससे वह आपकी दुख को बांट लें। लेकिन वह आपके दुख बांटने की बजाय आपकी दुख के घाव   को नासूर बना देंगे।

रहिमन धागा प्रेम का ,मत तोरो चटकाय।

टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गांठ परी जाय।।

रहीम दास के दोहे के माध्यम से  कहना चाहते हैं कि हमें हर व्यक्ति से प्रेम करना चाहिए। यदि प्रेम का धागा एक बार टूट जाए टूटने के बाद वह फिर से नहीं जुड़ता है। यदि टूटने के बाद  जुड़ता भी है तो उसमें गांठ पड़ जाती है। अर्थात आपके रिश्ते में दरार आ जाता है इसलिए आप राग – द्वेष  को त्याग करके प्रेम को बनाए रखिए ।जिससे उस धागे में कोई गांठ ना पड़े।

रहिमन पानी राखिये ,बिन पानी सब सून।

पानी गए न उबरे ,मोती मानस चून।।

रहीम दास इस दोहे के माध्यम से यह कहना चाहते हैं कि हमें पानी को बचा के रखना चाहिए। क्योंकि पानी ही हमारे जीवन का आधार है ।यदि एक बार धरती पर से पानी खत्म हो गया। उसके बाद  हमारे पास करोड़ों की मोती पानी के बिना सब सून है। इसीलिए आप पानी का संरक्षण करिए। जिससे आपकी आने वाली पीढ़ी उस  पानी का उपभोग  कर सके।

निष्कर्ष :

आपसे आशा करता हूं कि रहीम के जीवन परिचय (Rahim Das ke Jivan Parichay) से संबंधित आर्टिकल आपको अवश्य पसंद आएगा ।यदि यह आर्टिकल आपको पसंद आता है, तब आपसे विनम्र निवेदन करता हूं। इस आर्टिकल को अपने दोस्तों को शेयर करिए। जिससे वह भी इस आर्टिकल का लाभ उठा सके ।और मुझे भविष्य में ऐसे  आर्टीकल लाने के लिए प्रोत्साहन मिले।

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