पितृ दोष से हो परेशान, सावधान हो जाइए कहीं आप उनके सामानों को तो हाथ नहीं लगा रहे हैं

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Pitru Dosh Cause Symptoms

Pitru Dosh Cause Symptoms:- भारत का सबसे बड़ा महाकाव्य वेदव्यास द्वारा लिखित महाभारत के भीष्म पर्व में वर्णन भागवत गीता अध्याय 2 शोक 27 में लिखा है कि “जातस्य हि ध्रुवो मृत्युध्रुवं जन्म मृतस्य” अर्थात हे अर्जुन इस संसार में जो नश्वर शरीर के साथ जन्म लेता है उसकी मृत्यु अवश्य होती है यही एक परम सत्य है इसलिए विद्वान व्यक्ति को मृत्यु पर कभी शोक नहीं करना चाहिए। जिस भी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है वह किस योनि में जन्म लेगा और कब जन्म लेगा यदि इसकी जानकारी चाहिए तो आपको गरुड़ पुराण पढ़ना पड़ेगा। गरुड़ पुराण में मृत्यु से लेकर के श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और व्यक्ति 84 लाख योनियों में कब मनुष्य का योनि प्राप्त करेगा उसका विस्तार से जानकारी है। भागपद्र के महीने और शुक्ल पक्ष के पूर्णिमा की तिथि से प्रारंभ होने वाले पितृपक्ष और समापन अश्विनी महीने के अमावस्या को होता है। इसी पितृपक्ष में पितरों को तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म जैसे कार्य किए जाते हैं जैसे पितरों की आत्मा को शांति मिले। लेकिन वही गरुड़ पुराण में एक जगह लिखा हुआ है कि जिस भी व्यक्ति की मृत्यु हो गई है उसके द्वारा धारण किए गए सामान को आपको पहनना नहीं है यदि आप पहनते हैं तो आपके ऊपर पितृ दोष लगेगा जिससे आपका जीवन संकट में बन जाएगा।

पितृदोष में पितरों की आत्मा आपको ना सताए इसके लिए पितरों के इन सामान को आपको पहनना नहीं है:

(1) गहने को हाथ नहीं लगाना है

यदि आपके घर में किसी आदमी या औरत की मृत्यु हो गई है। उसके द्वारा धारण किए गए अंगूठी, पायल, मांग टीका, बाजूबंद, कमरबंद, झुमका, नथुनी चूड़ी आदि को आपको पहनना नहीं है यदि आप पहनते हैं पितरों की आत्मा आपको सताएगी क्योंकि गरुड़ पुराण में लिखा गया है कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसकी आत्मा, काम, क्रोध, लोभ, मोह, माया से ग्रसित रहती है और उसी में उलझा रहता है यदि आप उनके द्वारा धारण किए गए चीजों को पहनेंगी तो आपको छोड़ेंगे नहीं।

(2) घड़ी को भी नहीं पहनना है

मरे हुए व्यक्ति चाहे स्त्री हो या पुरुष उनके द्वारा धारण किए गए घड़ी को पहनना नहीं है। इसका कारण यह है कि मरा हुआ व्यक्ति जब जीवित था। वह इसी घड़ी के सहारे अपना जीवन जीता था। जिससे वह अपने आप को अनुशासन में ला सके। यदि आप मरे हुए व्यक्ति की ऐसी चीजों को हाथ लगते हैं जो उन्हें अनुशासन में लाने का काम करता है तो आपको पितृ दोष लग जाएगा जिससे आपके घर में गृह क्लेश और नौकरी में बांधा जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगेंगे। गरुड़ पुराण में लिखा है कि “व्यक्ति यदि अपने हाथ की कलाई में कोई ऐसी चीज बांधता है जिससे उसका जीवन अनुशासित होता है तो ऐसी चीजों को घर के किसी भी सदस्य को हाथ तक नहीं लगाना चाहिए”।

(3) कपड़े को भी नहीं पहनना चाहिए

मरा हुआ व्यक्ति आदमी हो या औरत उनके द्वारा पहने गए धोती, कुर्ता, पजामा, शर्ट, जींस और औरतों द्वारा पहनी गई सूट सलवार, साड़ी आदि चीजों को आपको नहीं पहनना है। यदि आप मरे हुए व्यक्ति की चीजों को आप हाथ लगाएंगे तो उनकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलेगी क्योंकि आत्मा शरीर में रहते रहते मोह माया से बंध गई है उसका मोह कपड़ों में भी है। यदि आप उनके घर के सदस्य हैं और उनके कपड़े को पहनते हैं तो आपको सताएंगे, दरवाएँगे और आपको बहुत ज्यादा प्रताड़ित करेंगे इसीलिए भूल से भी भूल नहीं होनी चाहिए यदि ऐसा आप करते हैं तभी आप पितृदोष से मुक्ति पाएंगे

मरे हुए व्यक्ति के द्वारा धारण किए गए सामानों का अब क्या करना है?:

(1) गहनों का क्या करना है

औरत या आदमी जो अब इस दुनिया में नहीं है उनके द्वारा धारण किए गए सोने के गहनों को आपको गरीबों में दान दे देना है नहीं तो आप किसी जरूरतमंद की बेटी की शादी में दान दे दीजिए। यदि आपको उन गहनों को उपयोग करना भी है तो सबसे पहले सोनार के पास जाकर के उन गहनों को पिघलावा करके कोई दूसरा गहना बनवा लीजिए और फिर आप पहनिए। अब कोई समस्या नहीं होगी।

(2) घड़ी का क्या करना है

मरे हुए व्यक्ति की चाहे औरत हो या पुरुष उनके द्वारा कलाई में बांधी गई घड़ी को आपको गरीबों में दान कर देना है यदि आप ऐसा करते हैं तब आप पितृ दोष से मुक्ति भी पा जाएंगे और परोपकार का काम भी कर लेंगे।

(3) कपड़े का क्या करना है

मरे हुए व्यक्ति के कपड़े को फुटपाथ पर सोने वाले व्यक्तियों को दान देना चाहिए नहीं तो आप किसी जरूरतमंद को कपड़े दीजिए जिसको सबसे ज्यादा जरूरत हो उस समय क्योंकि यदि आप कपड़े जरूरतमंद को देंगे उन्हें अपने तन को ढकने के लिए कपड़ा मिल जाएगा और इसके बाद वह आपको आशीर्वाद देंगे। इससे आपका जीवन मंगलमय और कल्याणकारी हो जाएगा।

Pitru Dosh Cause Symptoms

Pitru Dosh Cause Symptoms मरे हुए व्यक्तियों के कपड़े, आभूषण और घड़ी को क्यों परिवार के सदस्य नहीं पहन सकते हैं:

मरे हुए व्यक्तियों के आभूषण कपड़े और घड़ी को परिवार की सदस्य इसलिए नहीं पहन सकते हैं क्योंकि इसके विषय में उपनिषदों में लिखा है

अयं निजः परो वेति गणना लघु चेतसाम् | उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् |

यह मेरा है यह तेरा है ऐसी सोच तुच्छ व्यक्ति रखते हैं जो उदार व्यक्ति होते हैं उनके लिए पूरी पृथ्वी पर रहने वाले जीव, जंतु और मनुष्य ही उनका परिवार है। इसका भाव यह है कि आप अपने परिवार तक सीमित मत रहिए पूरे विश्व को अपना परिवार मानिए इसीलिए गरुड़ पुराण में भी यह लिखा गया है कि मरे हुए व्यक्ति की जो भी समान है उन सामानों को गरीबों में वितरित कर देना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आपके पूर्व जन्मों के पाप धुल जाएंगे। भारत ही एक इकलौता देश है जहां पर मरे हुए व्यक्तियों की सामानों को जरूरतमंद में वितरित करने के लिए मोटिवेट किया जाता है अन्य किसी देश में नहीं और साथ ही साथ सनातन धर्म के अलावा और किसी धर्म में भी इससे संबंधित बात नहीं की गई है लेकिन सनातन धर्म एक ऐसा धर्म है जो व्यक्ति के अंदर परोपकार दानवीरता करुणा जैसी चीजों का संचार करता है। व्यक्ति को अपने अहंकार को त्याग करके सद्भावना की ओर बढ़ सके। पितृपक्ष में आपके पूर्वज स्वर्ग से जरूर आते हैं आपके कार्यों को देखने के लिए

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