जुखाम और कमर दर्द से परेशान हैं तो उपयोग करिए नीलगिरी का तेल

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Nilgiri Tel ke Fayde

Nilgiri Tel ke Fayde: सर्द के मौसम में बंद नाक, एलर्जी, वायरल इनफेक्शन और वायरल फीवर जैसे तरह-तरह की बीमारियां शरीर को जकड़ लेती हैं। यदि इन बीमारियों से बचना है तो आज मैं एक ऐसे तेल के विषय में बताने वाला हूं जो तस्मानिया और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में पाया जाता है। इस पेड़ का नाम है नीलगिरी। नीलगिरी के पत्तों से तेल बनाया जाता है। इसके तेल की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बहुत ज्यादा है इसका कारण है इसका औषधि गुण। जिसके परिणाम स्वरूप हर व्यक्ति इसका लाभ लेना चाह रहा है। यह एक आयुर्वेदिक नुस्खा है। हालांकि भले ही नीलगिरी मूलत: तस्मानिया और ऑस्ट्रेलिया की जंगलों में पाए जाते हो। लेकिन भारत के उष्णकटिबंधीय वनों में भी पाया जाता है जैसे दक्षिण भारत के राज्य और कुछ दक्षिण पूर्व के राज्य में भी पाया जाता है।

नीलगिरी वृक्ष की उत्पत्ति और विशेषता:

नीलगिरी का वैज्ञानिक नाम यूकेलिप्टस है। नीलगिरी वृक्ष की ऊंचाई लगभग 340 फीट होती है। नीलगिरी वृक्ष की विशेषता यह होती है कि यह पेड़ लम्बा और पतला होता है, इसकी पत्तियां लंबी और नुकीली होती है नुकीली सतह पर गांठ पाया जाता है। उस गांठ में ही तेल संचित रहता है। उसी तेल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। इसका आर्थिक महत्व भी है। आर्थिक महत्व इस परिदृश्य में है कि इसका उपयोग आप जलावन लकड़ियों के रूप में, टिंबर के रूप में और कुर्सी टेबल से संबंधित फर्नीचर बनाने में भी किया जाता है। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए अब यूरोप और अफ्रीका महाद्वीप और अमेरिका में भी इसकी खेती की जा रही है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पौधे की उत्पत्ति ऑस्ट्रेलिया में हुई थी। इसकी खेती करने के लिए आवश्यक तापमान न्यूनतम 30 डिग्री और अधिकतम 35 डिग्री होनी चाहिए। पौधे की विकास के लिए सूर्य का प्रकाश और हवा और पानी चाहिए भारत में भी इसकी खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

नीलगिरी तेल के फायदे

नीलगिरी के तेल में पाए जाने वाला पोषक तत्व कौन- कौन सा है?

 (1) सिनेओल नामक टेरपेनॉइड ऑक्साइड

(2) एंटी-इंफ्लेमेटरी

(3) एंटी-सेप्टिक 

(4) एंटीफंगल

Nilgiri Tel ke Fayde-नीलगिरी के तेल के उपयोग के परिणाम स्वरूप इससे होने वाले फायदे क्या -क्या होते हैं?

(1) नीलगिरी का तेल घाव पर एंटीसेप्टिक का काम करता है

जलने, कटने या खरोच, अल्सर या ततैया द्वारा डंक मारना यदि यह सब प्रॉब्लम आपको हो जाती है तब आप नीलगिरी के तेल का उपयोग करिए क्योंकि इसके तेल में एंटीसेप्टिक का गुण पाया जाता है। जिसके परिणामस्वरूप न केवल पीड़ा से निजात दिलाता है अपितु घाव को जीवाणु मुक्त भी बनाता है।

(2) नीलगिरी का तेल सर्दी जुकाम से भी हमारी रक्षा करता है

इंडियन काउंसिल मेडिकल आफ रिसर्च के अनुसार नीलगिरी के तेल में ऐसी- ऐसी कंपाउंड पाए जाते हैं जो ब्लड वेसल्स जो सर्दी जुकाम के कारण सिकुड़ गयी है उसे ब्रोड बना देता है अर्थात फैला देता है जिससे सांस लेने में कोई तकलीफ ना हो और आपको सुखद एहसास देता है। गुनगुने पानी में नीलगिरी तेल की 2-4 बूंद को मिलाकर के गरारा करने से गले का दर्द दूर हो जाता है गला खुल भी जाता है।

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(3) नीलगिरी का तेल तनाव को कम करता है

किसी काम के प्रेशर को लेकर के या बॉस की डाँट को सुनकर या एग्जाम का प्रेशर इससे तनाव होने लगता है। जिसके परिणाम स्वरूप मन में नकारात्मक विचार पनपने लगते है और ऊपर से सर दर्द भी रहता है। यदि इन सब से आपको बचना है तब आप उपयोग करिए नीलगिरी का तेल। नीलगिरी का तेल मालिश करिए इससे ब्लड सरकुलेशन होगा ब्लड सरकुलेशन के परिणाम स्वरूप आपके मस्तिष्क में आक्सीजन बढ़ेगा जो आपके मस्तिष्क में ठंडक का एहसास देगा और आपके तनाव को कम भी करेगा जिससे आप मन लगाकर के अपने कार्य को कर सके और मनचाहा फल प्राप्त कर सके।

(4) नीलगिरी का तेल कमर दर्द को भी दूर करता है

नीलगिरी के तेल में एंटीमाइक्रोबॉयल का गुण पाया जाता है जो किसी भी प्रकार की सूजन को खत्म करता है इसके अलावा जोड़ों के दर्द और गठिया रोग से भी निजात दिलाता है और कमर दर्द को चुटकियों में ठीक कर देता है।

(5) नीलगिरी का तेल बालों के लिए भी लाभदायक है

नीलगिरी के तेल में एंटी फंगल का गुण पाया जाता है। यदि हम अपने सर पर प्रतिदिन नीलगिरी का तेल मालिश करें। इससे हमारे सर में ब्लड सरकुलेशन भी होगा और साथ ही साथ डैंड्रफ की समस्या दूर होगी और बालों का घनापन भी बढ़ेगा और बाल साइन भी करेंगे।

Nilgiri Tel ke Fayde

नीलगिरी के तेल के उपयोग की परिणाम स्वरूप से होने वाले दुष्प्रभाव क्या है?

(1) नीलगिरी के तेल का उपयोग सिर्फ बाहरी रूप से ही करना है। इसका सेवन नहीं करना है क्योंकि इसके सेवन करने से आपको बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है क्योंकि इसके तेल में  जहरीले टॉक्सिन पाए जाते हैं जो शरीर के लिए लाभदायक नहीं है।

(2) स्किन की प्रति संवेदनशील वाले व्यक्तियों को इस के तेल का उपयोग नहीं करना है यदि वह तेल का सेवन करना चाहते हैं तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य कर लें उसके बाद ही तेल का उपयोग करें।

नीलगिरी के तेल का उपयोग कैसे करना है

नीलगिरी के तेल का उपयोग आपको सिर्फ प्रभावित जगह पर तेल को लेकर मसाज करना है ना कि उसको आपको खाना है अर्थात यदि आपको सर दर्द और कमर दर्द और इसके अलावा गठिया रोग और हेयर फॉल की प्रॉब्लम है। तब आप इस तेल को हल्का गुनगुना करके मालिश करें इससे आपको मनचाहा लाभ मिलेगा।

निष्कर्ष:

नीलगिरी का तेल गठिया रोग कमर से संबंधित रोग और हेयर फॉल और सर्दी जुकाम के लिए एक अचूक औषधि है जिसके उपयोग से आप सौ टका लाभ पाएंगे।

FAQ:

(1) नीलगिरी का तेल किस काम में आता है?

नीलगिरी का तेल कमर दर्द को दूर करने हेयर फॉल को कम करने और घाव को भरने की लिए उपयोग किया जाता है।

(2) नीलगिरी के तेल का उपयोग कैसे करें?

यदि आप सर्दी जुकाम से पीड़ित हैं तब आप किसी सूती वस्त्र में नीलगिरी तेल की कुछ बूंदों को लगा कर के उसे सूंघीये इससे बन्द नाक खुल जाएगी यानी एक तरह से यह एक इनहेलर का काम करता है।

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