जानिए कब और कैसे खेली जाती है बरसाने और नंदगाव में लठमार होली

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barsane ki lathmar holi

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को लट्ठमार होली (Barsane Ki Lathmar Holi) मनाई जाती है। इस दिन बरसाने और नंदगांव में सांस्कृतिक पहलू और साथ ही साथ सामासिक संस्कृत को बढ़ावा मिलता है। यह होली अपने आप में ही विशेष है। क्योंकि इस दिन बरसाने और नंद गांव में सबके चेहरे पर खुशी की झलक देखने लायक ही बनती है ।क्योंकि इस होली की शुरुआत बसंत पंचमी से प्रारंभ हो जाता है इसके लिए बसंत पंचमी के दिन होली का डंडा गाड़ कर बरसाने की होली और नंदगांव की होली की शुरुआत की जाती है जैसे – जैसे दिन प्रति दिन होली नजदीक आने लगता है वैसे-वैसे लोग लट्ठमार होली खेलने के लिए उतावले होने लगते हैं। क्योंकि यह होली अपने आप में बहुत विशेष है।

बरसाने की लट्ठमार होली क्या है? (Barsane Ki Lathmar Holi Kya Hai | What is Barsana Lathmar Holi in Hindi)

barsane ki lathmar holi kya hai

बरसाने की लट्ठमार होली यह होती है कि इस दिन नंद गांव के लोग बरसाने जाकर झंडा फहराने के लिए एकजुट होते हैं ।लेकिन बरसाने की महिलाएं उन्हें ऐसा करने से रोकती है ।उसके लिए उन्हें डंडे से मारती हैं। लेकिन बरसाने की महिलाओं को नंद गांव के  पुरुष चकमा देने के लिए गुलाल का उपयोग करते हैं ।जब वह पकड़े जाते हैं तब उनको लाठियों से मारा जाता है। और साथ ही साथ स्त्रियों के आभूषण और कपड़े पहना कर सामूहिक नृत्य भी करवाया जाता है। इस होली की शुरुआत 16 वी शताब्दी से मानी जाती हैं

बरसाने की लट्ठमार होली की विशेषता क्या है? (Barsane Ki Holi Ki Visheshta Kya Hai | Speciality of Lathmar Holi Barsana in Hindi)

(1) इस होली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जब महिलाएं पुरुष को डंडा से मारती हैं। पुरुष कोई  प्रतिरोध नहीं करता है ।जिसके परिणाम स्वरूप यह पता चलता है कि हमारी संस्कृति इतनी महत्वपूर्ण है जिसमें स्त्री पुरुष- समान है।

(2) इस होली की एक और सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नंदगांव के पुरुष 5 किलोमीटर की यात्रा करके नाचते- गाते  हुए बरसाने जाते हैं लट्ठमार होली खेलने के लिए ।इससे इसकी विशेषता का पता चल जाता है। उनका पहला पड़ाव पीली पोखर होता है। इसके बाद राधा रानी का दर्शन करके रंगीली गली चौक पर जमा होते हैं।

(3) इस होली की एक और विशेषता यह होती है कि नंदगांव और बरसाने के लोग अष्टमी के दिन गांव- गांव जाकर लोगों को निमंत्रण देते हैं लट्ठमार  होली खेलने के लिए।

(4) इस दिन प्रसिद्ध लोकगीत होरी गीत गाया जाता है जो राधा कृष्ण के वार्तालाप पर आधारित है।

नन्दगाँव की लट्ठमार होली क्या है? (Nandgaon Ki Lathmar Holi Kya Hai | What is Nandgaon Lathmar Holi in Hindi)

nandgaon ki holi kya hai

आदि ग्रंथों के अनुसार नंदगांव की लट्ठमार होली की शुरुआत श्री कृष्ण भगवान के समय ही हो गई थी। इस होली में बरसाने की गोपियां नंद गांव में अर्थात श्री कृष्ण भगवान के घर से फगुआ का नेग मांगने आती है। जिसके परिणाम स्वरूप गांव के लोग फगुआ का नेग देने से मना करते हैं। और जिसके परिणाम स्वरूप नंद गांव की महिलाएं गोपियों को लट्ठ से मारती हैं।

निष्कर्ष :

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को लट्ठमार होली (Barsane Ki Lathmar Holi) मनाई जाती है। इस होली की शुरुआत 16 वी शताब्दी से मानी जाती हैं। इस होली की शुरुआत बसंत पंचमी के दिन होली का डंडा गाड़ कर की जाती है। होली के दिन नंदगांव के पुरुष 5 किलोमीटर की यात्रा करके नाचते- गाते झंडा फहराने के लिए बरसाने जाते हैं । लेकिन बरसाने की महिलाएं उन्हें ऐसा करने से रोकती है । उसके लिए उन्हें डंडे से मारती हैं। इसी कारण बरसाने की होली को लट्ठमार होली बोला जाता है।
इस बार 11 मार्च, 2022 को बरसाने में अपने मन को भगवान श्री कृष्ण के प्रेम रंग में समरपीत कर इस्स नश्वर दुनिया को भूल जाइए। बोल राधे राधे ।

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