भारत के अन्नदाता एमएस स्वामीनाथन की मृत्यु, पूरे देश में बना शोक का माहौल

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M.S.Swaminathan

MS Swaminathan:1999 में टाइम्स पत्रिका ने भारत के पालनहार और अन्नदाता एमएस स्वामीनाथन को 20वीं शताब्दी में एशिया के सबसे 20 फेमस व्यक्ति की कैटेगरी में रखा। एमएस स्वामीनाथन किसी परिचय के मोहताज नहीं है भारत में एमएस स्वामीनाथन को हरित क्रांति का पिता भी कहा जाता है। हरित क्रांति का पिता इसलिए कहा जाता है कि उन्होंने भारत को गेहूं, चावल जैसे खाद्यानों की अमेरिका और वेस्टर्न कंट्री के ऊपर जो निर्भारता थी उसे आत्मनिर्भर बना दिए कितनी बड़ी बात है। जब भी उनका नाम ले सर गर्व से ऊंचा होना चाहिए। उन्होंने समाज के परोपकार के लिए दिन-रात एक करके गेहूं की हाइब्रिड बीज बनाएं इस हायब्रिड बीज का ही परिणाम है आज भारत पूरे दुनिया में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और चावल का सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत आत्मनिर्भर बन पाया है उसका पूरा श्रेय एमएस स्वामीनाथन को ही जाता है। एमएस स्वामीनाथन की 28 सितंबर 2023 की मृत्यु हो गई उनकी मृत्यु की घटना को सुनकर के पूरा देश में मातम सा छा गया क्योंकि उनकी मृत्यु गणेश चतुर्थी के विसर्जन के दिन हुई।

भारत के हरित क्रांति के पिता कहे जाने वाले एमएस स्वामीनाथन के जीवन पर एक झलक डाले

मनकोम्बु संबासिवन स्वामिनाथन का जन्म भारत के तमिल नाडु राज्य के कुंभ कोडम नामक स्थान पर 7 अगस्त 1925 को हुआ। एमएस स्वामीनाथन ने जूलॉजी और एग्रीकल्चर से पीएचडी किया और 1952 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से जेनेटिक्स में पीएचडी की। भारत जब अन्न के संकट की स्थिति से जूझ रहा था तो उन्होंने ही विश्व के हरित क्रांति के जन्मदाता नॉर्मन बोरलॉग के साथ मिलकर के विदेशी सीड्स और देसी सीड्स का क्रॉस बिडिंग करके शंकर बीज बनाया। जिसके परिणाम स्वरुप भारत जो पहले गेहूं और चावल का आयातक देश था अब वह निर्यातक देश के रूप में जाना जाने लगा। भारत सरकार ने इनके अतुलनीय कार्य को देखते हुए इन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का महानिदेशक बना दिया और महानिदेशक के पद पर एमएस स्वामीनाथन ने 1972 से लेकर के 1979 तक काम किया लगभग इन 7 वर्षों में ही उन्होंने कृषि में महिलाओं की भूमिका के लिए भी जोरों शोरों से काम किया क्योंकि कृषि में महिलाओं के कार्यों को नजर अंदाज किया जाता था, इसके लिए एमएस स्वामीनाथन ने स्वामीनाथन फाऊंडेशन की स्थापना की जिससे वंचित महिलाओं को मुख्य धारा से जोड़ा जा सके। इतना ही नहीं उनकी पत्नी मीणा स्वामीनाथन भी उनके साथ कदम से कदम मिला करके भारतीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए साथ चलती थी और उनकी बेटी सौम्या भी बताती हैं कि मेरे पिता ने एग्रीकल्चर सेक्टर में जो कार्य किया है वह कार्य शब्दों में बयां करना असंभव है।

MS Swaminathan: एमएस स्वामीनाथन ने कलेक्टर की नौकरी छोड़ एग्रीकल्चर में ही अपना काम करना भविष्य समझा

बहुत सारे लोग नहीं जानते होंगे कि एमएस स्वामीनाथन ने सिविल सर्विस की परीक्षा भी पास की थी इसके पीछे की एक रोचक घटना है। रोचक घटना यह है कि जब पूसा इंस्टीट्यूट से प्लांट ब्रीडिंग की पढ़ाई दिल्ली से कर रहे थे। तब एक दिन उनकी मुलाकात एक कलेक्टर से हो गई। कलेक्टर ने उनसे बातचीत की और बहुत प्रभावित हुए और कहने लगा कि आप क्यों अपना समय बर्बाद कर रहे हैं, इस एग्रीकल्चर सेक्टर में इसमें कुछ है नहीं। इसके बाद एमएस स्वामीनाथन ने कलेक्टर की बात में आकर के प्लांट ब्रीडिंग की पढ़ाई रोक करके सिविल सर्विस की तैयारी करने लगे और 1 साल के अंदर ही सिविल सर्विस की परीक्षा पास भी कर ली और उसके बाद जॉइनिंग लेटर उनके घर पर आ गया। लेकिन वह जॉइनिंग करने नहीं गए इसके पीछे की वजह वह एक दिए हुए इंटरव्यू में बताते हैं कि मेरा हृदय तब पसीज जाता था जब अखबार में पढ़ता था कि आज भुखमरी के कारण हजार व्यक्तियों की मृत्यु हो गई इससे मुझे बहुत ही दुख होता था और मैं तब मन ही मन यह ठान लिया था कि मुझे जो भी कुछ करना है इन्हीं भुखमरी व्यक्तियों के लिए ही करना है जिससे हमारे भारत में भविष्य में किसी भी व्यक्ति की भुखमरी के कारण मृत्यु ना हो उन्होंने सिविल सर्विसेज के जॉइनिंग लेटर को बस्ते में डाल करके एग्रीकल्चर में दिन दूनी रात चौगुनी की रफ्तार से मेनहत करने लगे और परिणाम आपको जो मिला वह चौंकाने वाला तो है ही कि वह भारत के हरित क्रांति के जनक बन गए।

हरित क्रांति में एमएस स्वामीनाथन के योगदान को देखते हुए कई पुरस्कार से हुए सम्मानित

(1) पद्म श्री

(2) पदम् भूषण

(3) पदम् विभूषण

(4) मैग्सेसे पुरस्कार

(5) अल्बर्ट आइंस्टीन वर्ल्ड साइंस पुरस्कार

(6) विश्व खाद्य पुरस्कार

(7) यूनेस्को गांधी स्वर्ग पदक

(8) वॉल्वो इंटरनेशनल एंवायरमेंट पुरस्कार

(9) हेनरी शॉ पदक

(10) ऑर्डर दु मेरिट एग्रीकोल

(11) होंडा पुरस्कार’

(12) टाइलर पुरस्कार

MS Swaminathan

भारत के हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन के मृत्यु पर क्या बोले भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के हरित क्रांति के जनक 98 वर्षीय एमएस स्वामीनाथन की मृत्यु पर बोले कि” मुझे भारत के हरित क्रांति के जनक कहे जाने वाले एमएस स्वामीनाथन के निधन पर गहरा दुख हुआ हमारे देश के इतिहास में एक समय परिस्थिति में उनके नए इनोवेशन के कारण लाखों किसानों की स्थिति बदल गई और इसके अलावा भारत में खाद्य सुरक्षा की नींव भी डाली”

निष्कर्ष

28 सितंबर 2023 का दिन भारत के लिए शोक का दिन था क्योंकि भारत ने यह एक ऐसे अमूल्य रत्न को खो दिया जो गरीबों का अन्नदाता था उसने भारत को फूड क्राइसिस कि सिचुएशन से निकाला। ऐसे महान व्यक्ति डॉक्टर एमएस स्वामीनाथन की मृत्यु से हर भारतीय को गहरा दुख हुआ

Faq

(1) एमएस स्वामीनाथन क्यों प्रसिद्ध है?

एमएस स्वामीनाथन इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि उन्होंने भारत को फूड क्राइसिस के सिचुएशन से निकाल करके फूड एक्सपोर्टर और फूड सरप्लस की सिचुएशन में ला दिया।

(2) भारत में हरित क्रांति के जनक कौन है?

भारत में हरित क्रांति का जनक एमएस स्वामीनाथन को माना जाता है।

(3) स्वामीनाथन ने क्या आविष्कार किया था?

स्वामीनाथन ने भारत में कम भूमि पर ज्यादा उपज देने वाली फसलों का आविष्कार किया। जिसके तहत उन्होंने गेहूं और चावल के उच्च किस्म के फसलों का आविष्कार किया।

(4) हरित क्रांति दिवस कब मनाया जाता है?

हरित क्रांति दिवस 25 मार्च को मनाया जाता है

(5) विश्व खाद्य पुरस्कार पाने वाले प्रथम व्यक्ति कौन हैं

विश्व खाद्य पुरस्कार पाने वाले प्रथम व्यक्ति का नाम डॉक्टर एस स्वामीनाथन है जिन्हें 1987 में विश्व खाद्य पुरस्कार से नवाजा गया इस पुरस्कार को “खाद्य और कृषि के लिए नोबेल पुरस्कार” के नाम से भी जाना जाता है।

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