नहीं रहें फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह, बायोपिक देख हो गए थे भावुक,बंटवारे से कामयाबी तक का सफर नहीं था आसान

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milkha singh biography in hindi

milkha singh biography: भारत की शान और फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर स्प्रिंटर मिल्खा सिंह ने 91 की उम्र में कल देर रात आखिरी सांस ली। कोरोना से ग्रसित थे मिल्खा सिंह और 13 को ही हुई थी पत्नी निर्मल कौर की मौत।

पूरे भारत में मौजूद हर एक क्षेत्र के व्यक्ति ने जताया शोक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ले कर बायोपिक में अभिनय करने वाले फरहान अख्तर ने जताया दुःख। मिल्खा सिंह का सफर नहीं था आसान 1929 आज़ादी के पहले की ज़िन्दगी नहीं थी इतनी आसान और फिर झेला बंटवारे का दुःख, ज़िन्दगी में आए संघर्षों को जीत में बदल कर बनें थे फ्लाइंग सिख।

मिल्खा सिंह का जन्म पाकिस्तान के गोविंदपुरा में हुआ था। बेहद कम उम्र में उन्होंने भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द सहा था जिसमे उन्होंने अपनों को भी खोया था। अपनों को खोने का वह गम उन्हें सारी उम्र सताता रहा।

बंटवारे के समय में उन्होंने काफी संघर्ष किया यहाँ तक की खाने के लिए भी उन्हें बहुत मुश्किल से मिल पाता था। ट्रेन की बोगी में छिपकर गए थे दिल्ली, उसके बाद उन्होंने 1951 में सेना में भर्ती होकर अपनी नई पहचान बनाई। उनके 80 अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में 77 दौड़ें में उन्होंने जीत हासिल की थी।

हालांकि रोम ओलंपिक का मेडल ना जीत पाने का गम उन्हें उम्र भर सताता रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि अपनी ज़िन्दगी में वह किसी भारतीय खिलाड़ी को ओलंपिक मेडल जीतते हुए देखें लेकिन अफसोस की बात है कि उनकी अंतिम इच्छा पूरी न हो सकी। मिल्खा सिंह की जीवनी कोई ज़िन्दगी की कहानी नहीं बल्कि एक इतिहास है जो उन्होंने अपनी मेहनत से रचा।

20 नवंबर, 1929 यह वह तारीख है जब एक लेजेंड का जन्म गोविंदपुरा (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) में बेस एक सिख राठौर के परिवार में हुआ था। उनके मां-बाप की कुल 15 संतानें थी। बेहद छोटी उम्र में हीं उनके कई भाई-बहनों की मौत हो गई थी। बता दें कि बंटवारे की आग में मिल्खा सिंह ने अपने माता-पिता, दो बहनों और एक भाई को अपने आँखों के सामने जलते देखा।

यह दर्दनाक और असहनीय मंज़र झेलने के बाद वह महिला बोगी के डब्बे में छुपकर दिल्ली पहुंचे थें। सेना में नाम करने के बाद उन्होंने क्रास कंट्री रेस में छठा स्थान प्राप्त किया था। यही वह पहली सीढ़ी थी और इसी सफलता के बाद उन्हें सेना ने खेलकूद के लिए स्पेशल ट्रेनिंग के लिए चुना।

milkha singh biography, मिल्खा सिंह की उपलब्धियों की सूची बेहद लम्बी है, भारत सरकार ने उन्हें 1958 में पद्मश्री से नवाजा था। भारत सरकार द्वारा 2001 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार देने की पेशकश की गई थी जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था।

धावक के तौर पर उन्होंने 1956 में मेलबोर्न ओलंपिक में 200 और 400 मीटर की रेस में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उसके बाद उन्होंने 1958 में कटक में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में 200 और 400 मीटर की दौड़ में राष्ट्रीय कीर्तिमान भी स्थापित किया।

उन्होंने एशियन खेलों में भी स्वर्ण पदक हासिल किया और साल 1958 में उन्होंने ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के खेलों में 400 मीटर की प्रतियोगिता में एक बहुत बड़ी उपलब्धि यानी स्वर्ण पदक हासिल किया था। जिससे वह राष्ट्रमंडल खेलों में होने वालेस्वतंत्र भारत के व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले धावक बने थे।

ऐसे ही कई जीत और कामयाबी ने उनके क़दमों को चूमा था, और उनपर बनी बायोपिक ने हमे उनके ज़िन्दगी के कुछ हिस्सों से रूबरू कराया था। हालांकि जब उन्होंने यह फिल्म देखी तो वह बेहद भावुक हो गए थे और रो पड़े थे। भाग मिल्खा भाग प्रसून जोशी द्वारा लिखी गई थी, और राकेश ओमप्रकाश ने इसका निर्देशन किया था।

अहम् भूमिका में फ्लाइंग सिख के तौर पर फरहान अख्तर ने अपना जादू बिखेरा था। milkha singh biography इस फिल्म ने कई सम्मान हासिल किये। यह फिल्म मिल्खा सिंह के संघर्षो का बेहद छोटा सा हिस्सा था, क्योंकि असल ज़िन्दगी में उन्होंने इससे भी ज़्यादा तकलीफों और मुश्किलों का सामना किया था।

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