हमारे समाज में मांगलिक (Manglik) होना जैसे अपराध हो गया है। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति उससे झगड़ा करने लगता है। और साथ ही साथ उससे दूरियां बना लेता है। क्योंकि ऐसा मिथक फैला है कि मांगलिक व्यक्ति के साथ रहने वाला व्यक्ति भी प्रभावित होता है। इस बात में कितनी सच्चाई है।

इसकी अभी कोई प्रमाणिकता नहीं है। लेकिन आपको शायद पता होना चाहिए के भगवान राम भी मांगलिक थे। जो सप्तम भाव की मांगलिक थे। ऐसे मांगलिक व्यक्ति पत्नी वियोग और साथ ही साथ युद्ध के लिए तत्पर रहते हैं। आज हम इसी विषय पर चर्चा करने वाले हैं कि मांगलिक होने के क्या फायदे हैं?(Manglik Dosh ke fayde) और साथ ही साथ मांगलिक होने के नुकसान क्या है? और मांगलिक दशा को शांत कैसे करें? आदि जानकारी आपको आज हम  बताएंग। बस आपको पूरी आर्टिकल को पढ़ना है। एक भी लाइन को स्किप नहीं करना है।

मांगलिक दोष होता क्या है ? (Manglik Dosha kya hota hai| What is Manglik Dosha in Hindi)

नक्षत्र और राशि  के अनुसार मांगलिक वही व्यक्ति होता है, जिसका जन्म प्रथम, चतुर्थी, सप्तम, अष्टम, द्वादश भाव में मंगल की उपस्थिति में हुआ हो। ऐसे व्यक्ति की जन्म कुंडली को मांगलिक कहते हैं। इस भाव में जन्मा व्यक्ति पर मंगल का प्रभाव रहता है जिसके परिणाम स्वरूप और कोई भी उचित कार्य नहीं कर पाता है।

मांगलिक होने के फायदे क्या है ? (Manglik Dosha ke fayde| Benefits of Manglik Dosha in Hindi)

(1) यदि मंगल की दशा प्रथम भाव में हो तब व्यक्ति की चेहरे पर लालिमा रहती है। और साथ ही साथ व्यक्ति साहसी व पराक्रमी बनता है। अर्थात वह कभी भी घबराता नहीं है साथ ही साथ जो भी लक्ष्य निर्धारण करता है, उसे पूरा किए बिना नहीं मानता है।

और मुश्किल समय पर घबराता नहीं है अर्थात उसके पास कोई भी विपदा आ जाए उससे वह सामना करता है, न किघबराता है। क्योंकि उसके अंदर भय नाम का कोई चीज ही नहीं है। वह सीधे अपनी निगाहे गोल पर रखता हैं।

(2) यदि मंगल की दशा चतुर्थ भाव में हो। तब इस जातक के लोग बहुत शक्तिशाली और साथ ही साथ आकर्षण होते हैं। जो किसी भी व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं। क्योंकि इनके अंदर एक विचित्र से शक्ति रहती है।जो उनके आभामंडल को प्रकाशित करती रहती है। जिसके परिणाम स्वरूप कोई भी व्यक्ति उनकी ओर खिंचा चला आता है।

(3) यदि मंगल की दशा सप्तम भाव में हो तब इस जातक के लोग बहुत ही अमीर होते हैं। और इनके पास अथाह  सम्पत्ति होती है। वह जो भी इन्वेस्टमेंट या स्टार्टअप को प्रारंभ करते हैं। वह जरूर से जरूर सफल होता है। और साथ ही साथ उनको व्यापार का घाटा कभी नहीं सहन करना पड़ता है।

बस वह तरक्की की ऊंचाइयों पर ही चढ़ते रहते हैं। उनके मार्ग में कोई भी बाधा नहीं आता है। जो भी बाँधा आता है वह अपने आप ही दूर हो जाता है। ऐसे व्यक्ति सम्पति के स्वामी अर्थात ऐसे जातक के लोग को धन कुबेर की संज्ञा दी जाती है।

(4) यदि मंगल की दशा अष्टम भाव में हो। तब इस जातक के  लोग किसी भी रूप में आकस्मिक धन प्राप्त कर सकते हैं अर्थात उनको किसी न किसी रूप में चाहे गड़ा धन हो या किसी व्यक्ति का गिरा हुआ धन हो उसकी प्राप्त होती है ।

और साथ ही साथ ऐसे जातक के लोग अच्छे सर्जन भी होते हैं। क्योंकि उनके अंदर सर्जन की विशेषता कूट-कूट की भरी होती है। (Manglik Dosh ke fayde) जिसके परिणाम स्वरूप वह मरीजों की अच्छे से सर्जरी कर सकते हैं। बिना किसी  भय के  और सर्जरी की सफलता की इकोरेसी हंड्रेड परसेंट रहती है।

(5) यदि मंगल की दशा द्वादश भाव में हो। तब इस जातक के लोग खूब विदेश यात्रा करते हैं ।और साथ ही साथ अनेक लोगों के प्रेम और आकर्षण के  पात्र बनते हैं।

मांगलिक होने के नुकसान क्या है ? (Manglik Dosha ke Nuksaan in Hindi)

(1) यदि मंगल की दशा प्रथम भाव में हो तब इस जातक को सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि वह सुंदर नहीं होता है। साथ ही साथ जीवनसाथी खराब मिलता है। जिसके परिणाम स्वरूप जीवनसाथी से अनबन ही रहता है। ऐसा विवाह किसी काम का नहीं है।

(2) यदि मंगल की दशा चतुर्थ भाव में हो। तब इस जातक के लोग सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि विवाह में तालमेल नहीं बैठता है अर्थात कुंडली नहीं मिलती है। जिसके परिणाम स्वरूप शादी होने में कठिनाई आती है।

(3) यदि मंगल की दशा सप्तम भाव में हो ।तब इस जातक के लोग बहुत ही उग्र स्वभाव और साथ ही साथ हिंसक प्रवृत्ति के होते हैं। वह बात बात पर गुस्सा हो जाते हैं ।और साथ ही साथ किसी के साथ झगड़ा करने में तत्पर रहते हैं।

(4) यदि मंगल की दशा अष्टम भाव में हो। तब इस जातक  के लोग की वाणी बहुत ही कड़वी होती है। साथ ही साथ स्वभाव बहुत खराब होता है। और जीवन में हमेशा अकेलापन महसूस करते हैं। और उन्हें पाइल्स की समस्या भी रहती है। और साथ ही साथ वैवाहिक जीवन में उनका मन नहीं लगता है अर्थात वैवाहिक बंधन में बंधने से बचते हैं।

(5) यदि मंगल की दशा द्वादश भाव में हो तब इस जातक के लोग विलासता में डूबे रहते हैं ।इन्हें देश दुनिया में क्या हो रहा है? इससे कोई मतलब नहीं है। ऐसे लोग का विवाह बहुत दुखमय  व्यतीत होता हैं।

मांगलिक भाव को शांत करने का उपाय क्या है ? (Manglik Dosh ke Nivaran ke Upay)

(1) यदि मंगल की दशा प्रथम भाव में हो तब इस जातक के लोगों को मांगलिक दोष को समाप्त करने के लिए गुड़ का सेवन करना चाहिए और साथ ही साथ लाल रंग का यूज़ अपने डेली रूटीन में कम करना चाहिए।

(2) यदि मंगल की दशा चतुर्थ भाव में हो तब इस जातक के लोग को मांगलिक दोष को समाप्त करने के लिए हनुमान जी की उपासना करनी चाहिए।

(3) जिस भी जातक का जन्म मंगल के सप्तम भाव में हुआ है तब इस जातक को मांगलिक दोष को समाप्त करने के लिए प्रत्येक मंगलवार को उपवास रखना चाहिए साथ ही साथ अपनी अनामिका उंगली में तांबे का छल्ला पहनना चाहिए।

(4) जिस भी  जातक का जन्म मंगल के अष्टम भाव में हुआ है ।तब इस  जातक को मांगलिक दोष को समाप्त करने के लिए मंगल मंत्र का जाप करना चाहिए। और साथ ही साथ बजरंगबली को चमेली का तेल व सिंदूर अर्पण करना चाहिए।

(5) जिस भी जातक का जन्म मंगल के द्वादश भाव में हुआ हो। तब इस जातक को मांगलिक दोष को समाप्त करने के लिए मंगलवार के दिन उपवास रखना चाहिए।

निष्कर्ष :

दोस्तों मैं आपसे आशा करता हूं कि मांगलिक होने के फायदे से संबंधित आर्टिकल आपको जरूर ही पसंद आएगा। क्योंकि मैंने इस आर्टीकल में मांगलिक होने के फायदे क्या है? (Manglik Dosh ke fayde) और साथ ही साथ मांगलिक होने के नुकसान क्या है? और मांगलिक दोष को समाप्त करने का उपाय क्या है? आदि जानकारी को सा विस्तार से वर्णन किया है।

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