मक्का मदीना का इतिहास

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Makka Madina ka Itihaas

Makka Madina ka Itihaas: मक्का मदीना इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र स्थल है जैसे हिंदुओं के लिए पवित्र स्थल जगन्नाथ और गया स्थान है, वैसे ही इस्लाम धर्म को मानने वाले का प्रमुख स्थल मक्का मदीना है। लगभग हर वर्ष मक्का मदीना में जाने वाले हज यात्रियों की संख्या 40 लाख तक होती है। इन 40 लाख में से लगभग 80000 से लेकर के 90000 के बीच भारत मे रहने वाले इस्लाम धर्म के अनुयायी हज यात्रा के लिए मक्का जाते हैं। मक्का बहुत पवित्र स्थान है। इसकी पवित्रता इसलिए है क्योंकि यहां पर काबा स्थित है। जिसके परिणाम स्वरूप सभी मुस्लिम व्यक्ति काबा की ओर मुख करके नमाज पढ़ते हैं। अगर गौर करे कि मुस्लिम लोग जब अपना पांच वक्त का नमाज पढ़ते हैं तो उनका मुख काबा की तरफ रहता है। काबा एक ऐसा पवित्र स्थल है जो इब्राहिम से जुड़ा हुआ है। लगभग यह 1400 साल पुराना है। इसके अलावा मक्का में अल्लाह के संदेशवाहक मोहम्मद साहब का जन्म भी हुआ था। मदीना इसलिए महत्वपूर्ण स्थल है क्योंकि 622 ईसवी में मोहम्मद पैगंबर मक्का से मदीना की ओर पलायन किए थे इसको हिजरी संवत के नाम से भी जाना जाता है। यदि कोई व्यक्ति मक्का जाता है हज के लिए तो अवश्य ही मदीना भी जाता है। क्योंकि उसकी हज की यात्रा तभी सफल मानी जाती है जब वह मदीना का यात्रा करता है। मदीना एक पवित्र स्थल है जो इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे पवित्र स्थल है।

इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र स्थल मक्का का इतिहास क्या है?

Makka Madina ka Itihaas: मक्का शहर की स्थापना सन 1925 में हुआ था। मक्का का प्राचीन नाम बाका, बाकाह्, बेकाह, बक्काह था। मक्का शहर में इस्लाम धर्म के संस्थापक माने जाने वाले मोहम्मद पैगंबर का जन्म हुआ था। मुहम्मद पैगंबर का जन्म 570 ईसवी में हुआ था। आपको बता दें कि पैगंबर का अर्थ होता है अल्लाह का संदेशवाहक अर्थात अल्लाह ने जिब्राइल नामक देवदूत से हीरा नामा गुफा में जब अल्लाह के ध्यान में मोहम्मद पैगंबर लीन थे। तब उन्हें संदेश दिया गया की कि”ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुन रसूलुल्लाह अर्थात अल्लाह एक है और मोहम्मद पैगंबर की रसूल हैं अर्थात पैगंबर हैं जो अल्लाह के द्वारा दिए गए संदेश को जनमानस में खिलाएंगे और मानव कल्याण का कार्य करेंगे। मक्का में ही सबसे पवित्र स्थल काबा मस्जिद है। काबा मस्जिद का निर्माण काले पत्थर से हुआ है। इसका निर्माण सबसे पहले अदम ने करवाया फिर उसके बाद अब्राहम ने करवाया। फिर अब्राहम के बेटे इशेरल ने इस मस्जिद का निर्माण करवाया।

इस्लाम के अनुयायियों के लिए मक्का शहर की विशेषता क्या है?

(1) मक्का शहर की विशेषता इसलिए है कि क्योंकि यहां पर काबा मस्जिद स्थित है। काबा मस्जिद काला पत्थर से बना हुआ है। इस्लाम धर्म के अनुयायी काबा मस्जिद के काला पत्थर को चूमते भी हैं। काबा मस्जिद इब्राहिम के समय से ही मानी जाती है। हज जाने वाले व्यक्ति का उद्देश्य यह होता है कि वह काबा मस्जिद में नमाज़ पढ़े।

(2) काबा मस्जिद में जो भी व्यक्ति नमाज पढ़ता है। वह नमाज अल्लाह के कानो में तुरंत ही पड़ती है अर्थात ऐसा भी कहा जाता है कि यदि आप काबा मस्जिद में नमाज पढ़ेंगे। तब आपका नमाज 1 लाख नमाज के बराबर माना जाएगा अर्थात कहने का मतलब यह है कि यदि आप ता उम्र भर नमाज पढ़ते रहेंगे तब भी आप अल्लाह का आशीर्वाद पाने में असक्षम हो जाएंगे। लेकिन यदि आप काबा मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं तब आपका फरियाद अल्लाह के द्वारा तुरंत सुनी जाएगी और आप की फरियाद को पूरा भी किया जाएगा।

(3) मक्का शहर से 3 किलोमीटर की दूरी पर एक विशेष प्रकार का गुफा है जिसे काबा मस्जिद का घर भी कहा जाता है।

इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे पवित्र स्थल मदीना का इतिहास क्या है?

मक्का के निवासियों और मुहम्मद पैगंबर के विचारों में मतभेद होने के कारण 622 ईस्वी में मुहम्मद पैगंबर साहब का मक्का से मदीना की ओर पलायन करना हिजरी कहलाता है। इस्लाम कैलेंडर में मुहम्मद पैगंबर के इस पलायन के दिन को हिजरी संवत के नाम से भी जाना जाता है। 632 ईसवी में मोहम्मद पैगंबर अराफात के मैदान में लगभग 30,000 अनुयायियों को यह संदेश देते हुए कहा कि पृथ्वी पर उनके आने का उद्देश्य की पूर्ति हो गई है। संदेश देने की 2 महीने के बाद मदीने में उनकी मृत्यु हो गई। मदीना में मृत्यु के उपरांत उनके शव को मदीना में ही दफन कर दिया गया। मदीना का अर्थ होता है पवित्रा स्थल। पवित्र स्थल से आशय यब है कि इस्लाम के संस्थापक मोहम्मद पैगंबर की मृत्यु इस शहर में दफनाया गया है। जिसके परिणाम स्वरूप अध्यात्मिक के दृष्टिकोण से या शहर अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

इस्लाम के अनुयायियों के लिए मदीना की क्या विशेषता है?

(1) मुहम्मद पैगंबर के समय सबसे पहली मस्जिद क़ुबा मस्जिद मदीना शहर में बनी थी जो वज्रपात के कारण नष्ट हो गई लेकिन उसी स्थान पर लगभग 850 ईसवी में दूसरी मस्जिद का निर्माण किया गया।

(2) मस्जिद अल नबवी जिसे पैगंबर की मस्जिद के नाम से जाना जाता है। यह मस्जिद मदीना शहर में ही स्थित है।

(3) बुखारी की हदीस में मदीना शहर के विषय में यह लिखा गया है कि इसके पेड़ों को काटा नहीं जाना है और साथ ही साथ यहां पर कोई पाप का कार्य नहीं करना है और चोरी नहीं करना है यदि ऐसा कोई व्यक्ति करता है तब वह अल्लाह और स्वर्ग दूत के अभिशाप को उठाएगा।

मक्का में स्थित मस्जिद अल हरम के विषय मे जानकारी:

Makka Madina Masjid: यह मस्जिद बहुत ही खूबसूरत है इसकी सुंदरता की विषय में या कहा जाता है कि देखने पर ऐसा ऐसा होता है जैसे व्यक्ति ने स्वर्ग का दर्शन कर लिया हो मस्जिद अल हरम की स्थापना हजरत इब्राहिम द्वारा किया गया था। एक मान्यता ऐसी भी प्रचलित है कि मस्जिद अल हरम के समीप से मोहम्मद पैगंबर बुरर्क नामक सफेद रंग के घोड़े पर बैठकर के अल्लाह से मिलने जन्नत गए थे।

मक्का में स्थित आब ए ज़म ज़म का पानी का महत्व:

Makka Madina ka Itihaas

ऐसा ही कोई दुर्लभ व्यक्ति होगा जो मक्का स्थित हज यात्रा के दौरान आब ए जम जम कुए का पानी ना पीता हो यह पानी बहुत ही चमत्कारी माना जाता है। इस पानी पीने के परिणाम स्वरूप दुर्लभ से दुर्लभ बीमारी ठीक हो जाती हैं। मुसलमान लोग बड़े श्रद्धा भाव से इस पानी को अपने घर में भी रखते हैं जैसे हिंदुओं में गंगाजल को बड़ा पवित्र माना जाता है। उसी प्रकार आब ए जम जम कुए का पानी भी बहुत पवित्र माना जाता है। यह हर रोगों के उपचार के लिए काफी कारगर और चमत्कारी भी माना जाता है। इसके चमत्कार के विषय में यह भी कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति अधमरा हो और उसके मुख में एक बूंद आब ए जम जम कुए का पानी डाल दिया जाए वह व्यक्ति झटपट से दौड़ने लगेगा।

मक्का मदीना में शिवलिंग के स्थापित होने से संबंधित विवाद:

हम सब समाचार पत्र और यूट्यूब और कई न्यूज़ चैनलों के माध्यम से यह जरूर सुनते हैं कि मक्का मदीना में भगवान शिव का शिवलिंग भी है इसमें क्या सच्चाई है क्या नहीं इसके विषय में अभी तक कुछ पर्याप्त साक्ष्य नहीं प्राप्त हुए हैं। लेकिन जब इस्लाम के अनुयाई भारत से हज करने के लिए रवाना होते हैं। तब सुर्खियों में मक्का मदीना में स्थित शिवलिंग के विषय में जरूर चर्चा होने लगता है। ऐसा भी कहा जाता है की काबा मस्जिद के चारों ओर शिवलिंग खंडित रूप में है। हिंदू धर्म के अनुसार वहां पर पूजा पाठ होती है। लेकिन आपको बता दें कि यह सब भ्रम ।है काबा मस्जिद में इस्लाम की रीति रिवाज के अनुसार ही सब कार्य होते हैं। शरीयत के अनुसार गैर मुस्लिम को मक्का और मदीना में जाना वर्जित है। यदि कोई गैर मुस्लिम व्यक्ति वहां जाने का प्रयास करता है तो उसका सर धड़ से अलग कर दिया जाएगा।

निष्कर्ष:

मक्का मदीना इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र स्थल है। इस्लाम धर्म को मानने वाले को मुसलमान कहा जाता है। अपने जीवन काल में हर मुसलमान पुरुष या महिला मक्का मदीना अवश्य जाता है जीवन में एक ना एक बार। यहां जाने के परिणाम स्वरूप वह अपने द्वारा जीवन में किए गए पापों से मुक्ति पाता है और भविष्य में यह प्रतिज्ञा भी करता है कि वह कोई ऐसा पाप नहीं करेगा जिससे अल्लाह को दुख पहुँचेगा।

FAQ:

(1) मक्का में किसका जन्म हुआ था?

मक्का में 570 ईसवी में मुहम्मद पैगंबर का जन्म हुआ था जो इस्लाम धर्म के संस्थापक माने जाते हैं।

(2) मक्का में स्थित काबा मस्जिद के अंदर क्या है?

मक्का में स्थित काबा मस्जिद के अंदर लालटेन जैसे प्रतीत होने वाले दो प्रकाश स्रोत छत से लटके हुए हैं।

(3) मदीना शहर का पुराना नाम क्या है?

मदीना शहर का पुराना नाम यशरीब है।

(4) मुसलमान मक्का क्यों जाते हैं?

मुसलमान मक्का इसलिए जाते हैं क्योंकि इस्लाम का धार्मिक केंद्र काबा मस्जिद मक्का में स्थित है। उसी काबा मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए मुसलमान व्यक्ति मक्का जाते हैं। काबा मस्जिद में यदि कोई व्यक्ति एक बार नमाज पढ़ता है तो वह नमाज एक लाख के बराबर माना जाता है।

(5) ईदु-उल- जुहा के पर्व पर क्या होता है?

ईदु-उल- जुहा के पर्व पर शैतान को पत्थर मारा जाता है।

(6) मक्का की देवी कौन थी?

मक्का की देवी का नाम अल-लात है।

(7) मदीना में मुसलमान क्यों जाते हैं?

मोहम्मद पैगंबर की मस्जिद में 40 रकात की नमाज पढ़ने के लिए जाते हैं।

(8) मक्का में इस्लाम से पहले क्या था?

मक्का में पहले अरब की निवास की अल्लाह की पूजा करते थे उसके साथ साथ ही अल्लाह की तीन पुत्रियों अल-लात, मनात और अल-उज्ज़ा की भी पूजा करते थे काबा मस्जिद में भी इन तीन देवियों की पूजा की जाती है। मक्का में इन तीन देवियों की मंदिर भी है।

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