महामृत्युंजय मंत्र जाप करने के फायदे

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mahamrityunjay mantra jap karne ke fayde

mahamrityunjay mantra jap karne ke fayde: भगवान शिव को देवों के देव महादेव ऐसे थोड़े ही कहा जाता है? उनके पास अद्भुत शक्ति है। वह इस शक्ति के माध्यम से अपने भक्तों के मार्ग में आने वाली समस्याएं जैसे रोग,भय और शंका आदि समस्याओं का निराकरण कर देते हैं। भगवान शिव अनादि है। वह ब्रह्मांड के हर कण-कण में व्याप्त है। यदि कोई व्यक्ति भगवान शिव की विशेष अनुकंपा पाना चाहता है उसे महामृत्युंजय मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र में जो अनंत शक्तियां है उन शक्तियों के आगे बड़ा से बड़ा कष्ट क्षण भर में ही दूर हो जाता है। महामृत्युंजय का अर्थ ही है मृत्यु के भय से मुक्ति। आप जीवन में यदि पथ विचलित हो जाते हैं और जिसके लिए आपको दैवीय दंड मिलने वाला हो लेकिन यदि इस दंड से बचना है तो महामृत्युंजय का जाप करिए।

मृत्यु के भय से मुफ्त दिलाने वाला आखिरकार महामृत्युंजय मंत्र है क्या?

महामृत्युंजय मंत्र एक ऐसा मंत्र है जो आपको अभय प्रदान करता है अर्थात यदि आपके सर पर मृत्यु का साया मंडरा रहा है या आपके सर पर शनि ग्रह या राहु केतु का साया हो। जिससे आप अपने व्यस्त जीवन से लेकर के सार्वजनिक जीवन में कई परेशानियों जैसे बॉस की डांट और ऑफिस में आपका मजाक बनना आदि समस्याओं से परेशान हैं तब आपको महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए महामृत्युंजय का मंत्र-

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

इस मंत्र का अर्थ यह है कि हम त्रिनेत्र धारी शिव की पूजा करते हैं जो सुगंधित हैं और जो हमारा पोषण करते हैं अर्थात भगवान शिव हमारे ज्ञान इंद्रियों से परे हैं यदि भगवान शिव को समझना है तो उन्हें निष्काम और अनासक्त कर्म करते हुए समझना पड़ेगा। भगवान शिव की अनुकंपा पूरे ब्रह्मांड में हर चराचर जीव में व्याप्त है। वह अपने भक्तों की रक्षा करते हैं भक्तों पर आने वाली जो भी समस्याएं हैं उन समस्याओं को वक्त से पहले उसका हल कर देते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र से जुड़ी कथाएं क्या है जो भक्तों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करती है-

क्या आप जानते हैं कि महामृत्युंजय मंत्र की रचना किस ऋषि ने की थी? तो आपको बता दें कि महामृत्युंजय मंत्र की रचना ऋषि मार्कंडेय ने की थी जो मृकण्ड ऋषि के पुत्र थे  पुराणों के अनुसार ऋषि मारकंडेय का जन्म जब हुआ तब ऋषियो ने यह भविष्यवाणी कर दी की आपका पुत्र 12 वर्ष की अल्पायु में मर जाएगा। जिसके बाद मार्कंडेय ऋषि के माता-पिता दुखी रहने लगे। लेकिन उस अल्पायु बालक के चेहरे पर मंद मंद मुस्कुराहट रहती थी उसे मृत्यु का भय ही नहीं था, क्योंकि वह बालक भगवान शिव का अनन्य भक्त था। वह भगवान शिव के मंदिर में बैठकर के भगवान शिव की पूजा अर्चना और महामृत्युंजय का जाप करता था। जब ऋषि मार्कंडेय की आयु पूर्ण हो चुकी थी और मार्कंडेय ऋषि के प्राण को हरने के लिए यमदेव आए लेकिन भगवान शिव का यह अनन्य भक्त को अपनी भक्ति पर उसे भरोसा था कि भगवान शिव उसकी रक्षा करेंगे ऐसा हुआ भी। भगवान शिव ने मार्कंडेय ऋषि की रक्षा करते हुए यमदेव को यहां से जाने का आदेश दे दिया। अब यमदेव ने भगवान शिव की आज्ञा पाकर के मार्कंडेय ऋषि के प्राण को बिना हरे ही वंहा से चले गए और भगवान शिव ने मार्कंडेय ऋषि को यह आशीर्वाद दिया कि जो भी भक्त मारकंडेय ऋषि की तरह मेरी अनन्य भक्ति करेगा उसकी अकाल मृत्यु कभी नहीं होगी।

महामृत्युंजय मंत्र जाप

महामृत्युंजय मंत्र सुनने के कौन-कौन से फायदे होते हैं?

(1) जो भी व्यक्ति लंबी जीवन जीने की इच्छा रखता है उसे महामृत्युंजय मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए क्योंकि महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से आसमय होने वाली मृत्यु टल जाती है।

(2) जिस भी व्यक्ति के जीवन में मांगलिक दोष, भूत प्रेत दोष और कालसर्प दोष जैसी बाधाएं हैं उसे महामृत्युंजय मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए इससे उसके जीवन में यह सारी बाधाएं खत्म हो जाएगी।

(3) जिस भी व्यक्ति का शरीर रोगों से ग्रसित है, उस व्यक्ति को भी महामृत्युंजय का जाप करना चाहिए इससे उस व्यक्ति का शरीर निरोगी हो जाएगा।

(4) जो व्यक्ति अमीर बनना चाहता है उसे भी महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। यदि व्यक्ति श्रद्धा भाव से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करता है तो भगवान शिव उसकी पुकार को अवश्य सुनते हैं और उसकी इच्छा को पूर्ण भी करते हैं और उसके घर को पैसों से भर देते हैं।

(5) जिन दंपत्ति को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है और ज्योतिष लोग यह कह रहे हैं कि आपके भाग्य में संतान योग है ही नहीं तो उन दंपति को महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे उनको संतान की प्राप्ति जल्दी होगी। भगवान शिव ऐसे ईश्वर हैं जो अपने भक्तों के लिए विधि के विधान को भी बदल देते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने की विधि क्या है?

महामृत्युंजय मंत्र का जाप आप सुबह और शाम के समय कर सकते हैं। हालांकि यदि कोई विपदा पड़ जाए तो आप उस समय भी कर सकते हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह भी है कि आप जब भी महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें तो जाप करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके मन में कोई क्रोध अहंकार की भावना तो नहीं है। यदि यह भावना है इन भावनाओं को मन से निकाल कर के निष्काम भाव से शिवलिंग के पास जाकर के महामृत्युंजय मंत्र का जाप करे। हालांकि जाप करने से पहले शिवलिंग पर बेलपत्र और जल अर्पित करे। फिर उसके बाद महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना प्रारंभ कर दें। जाप करते समय आपके हाथ में रुद्राक्ष की माला अवश्य ही होनी चाहिए। यदि आप बताए गए नियमों का पालन करके महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं तो भगवान शिव की अनुकंपा आप पर अवश्य ही बनी रहेगी।

निष्कर्ष:

mahamrityunjay mantra jap karne ke fayde: महामृत्युंजय मंत्र एक ऐसा मंत्र है जो अभय प्रदान करता है जो आपके मन से मृत्यु के भय को निकाल देता है। यह एक प्रकार से संजीवनी मंत्र भी है क्योंकि यह मरे हुए व्यक्ति के शरीर में भी प्राणों का संचार भर देता है।

Faq:

(1) महामृत्युंजय मंत्र की रचना किसने की थी

महामृत्युंजय मंत्र की रचना मार्कंडेय ऋषि ने की थी।

(2) महामृत्युंजय मंत्र के जाप करने के फायदे कौन-कौन से होते हैं?

महामृत्युंजय मंत्र के जाप करने के सबसे बड़े फायदे यह होते है कि आपके जीवन में जो कालसर्प दोष और अकाल मृत्यु का दोष है महामृत्युंजय मंत्र के जाप के बाद आप उन दोषों से मुक्ति पा जाएंगे

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