केदारनाथ धाम में भगवान केदारेश्वर की असीम अनुकंपा रहती है अपने भक्तों पर

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Kedarnath History in Hindi

Kedarnath History in Hindi: हर मनुष्य भौतिकता में संलिप्त हो गया है। वह अपना विवेक पूर्णता खो चुका है। कलयुग में हर व्यक्ति सगे संबंधी और नाते रिश्तेदारी को भुला दिया है। सब व्यक्तिवादी समाज में रहने लगे हैं। परिवार नामक संस्था टूट गई है। अब परिवार मात्र गांव की नुमाइश बन के रह गई है। जीवन के इस पड़ाव में यदि उत्तराखंड के केदारनाथ धाम जाया जाए तो जीवन कितना कल्याण में हो जाएगा। केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। भगवान शिव की स्तुति करने से भक्तों के करुणा की पुकार भगवान शिव के कानों में सीधे जाती है। यहां भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ राग-द्वेष का त्याग करके भगवान शिव के चरणों में अपने आप को समर्पित कर देते हैं जिससे मन अत्यंत खुश होता है। जिसके परिणाम स्वरूप हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का प्रादुर्भाव होता है और नकारात्मक ऊर्जा का ह्रास होता है। आज हम इस लेख में इसी बात पर चर्चा करने वाले हैं कि बाबा भोलेनाथ जो संहार के देवता हैं। वह कैसे केदारनाथ धाम में आने वाले भक्तों के कष्ट को दूर करते हैं? इतिहास क्या है केदारनाथ धाम की। आज हम इसी सब पर चर्चा करने वाले हैं। बस आप भगवान शिव का नाम लेते हुए इस लेख को पढ़ियेगा। भगवान शिव निराकार हैं निर्विकार हैं निष्प्रपंच हैं। इनके अंदर कोई राग- द्वेष की भावना नहीं है या कहे तो भगवान शिव त्रिगुणातीत हैं।

आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित केदारनाथ धाम के भौगोलिक अवस्थिति क्या है?

केदारनाथ धाम भगवान शिव को समर्पित है। यह धाम उत्तराखंड के हिमालय के समीप मंदाकिनी नदी के समीप गढ़वाल में स्थित है। यहां भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। आपको बताना चाहता हूं कि यहां पर भौगोलिक दशाएं प्रतिकूल है क्योंकि शीत ऋतु के समय अधिक ठंडी के कारण बर्फबारी होने लगती है। जिसके परिणाम स्वरूप दर्शन करना भगवान शिव का कठिन हो जाता है। इसलिए यह मंदिर अप्रैल महीने में खुलता है और नवंबर महीने तक खुला रहता है। अप्रैल महीने से लेकर के नवंबर महीने तक आप केदारनाथ में जाकर भगवान शिव की दर्शन कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

केदारनाथ धाम में स्थित भगवान शिव का मंदिर की वास्तुकला शैली क्या है?

केदारनाथ मंदिर कत्यूरी शैली में बना हुआ है। मंदिर तीन भागों में बटा हुआ है मध्य भाग, सभा मंडप और गर्भगृह।
गर्भ गृह में भगवान केदारनाथ की मूर्ति स्थित है। जिसके आगे के भाग पर भगवान गणेश की प्रतिमा की आकृति है और माता पार्वती का श्री यंत्र भी विद्यमान है। इस मंदिर का निर्माण किसने करवाया है। इसके विषय में कोई अस्पष्ट साक्ष्य नहीं प्राप्त होता है हालांकि राहुल सांकृत्यायन के अनुसार यह मंदिर 12 वर्ष से लेकर के 14 वर्ष पुराना है इस मंदिर के जीर्णोद्धार का श्रेय आदि गुरु शंकराचार्य को दिया जाता है।

केदारनाथ धाम की महिमा क्या है?

ऐसी धारणा प्रचलित है कि जो भी व्यक्ति केदारनाथ धाम में जाए बिना पहले बद्रीनाथ धाम चला जाता है तब उसके जाने का उद्देश्य पूरा नहीं होता है। केदारनाथ में नर और नारायण के दर्शन करके अपने समस्त पापों को नष्ट करके अपने वर्तमान और भविष्य जीवन को मंगलकारी बनाया जा सकता है ऐसा भी कहा जाता है कि केदारनाथ धाम की यात्रा करने वाला हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी मोह के क्लेश से नहीं घिरता है।

केदारनाथ धाम का इतिहास

केदारनाथ मंदिर का इतिहास क्या है?

Kedarnath History in Hindi: यदि हम केदारनाथ मंदिर के इतिहास के विषय में चर्चा करेंगे। तब हमें इसके लिए महाभारत की ओर उन्मुख होना पड़ेगा। आपको बता दें कि जब महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया। जिसके परिणाम स्वरूप पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था। यह मंदिर प्राकृतिक आपदाओं के कारण विध्वंस हो गया था। इसका जीर्णोद्धार आठवीं शताब्दी में फिर से आदि गुरु शंकराचार्य किया था। यह साक्ष्य सबसे प्रमाणित माना जाता है केदारनाथ मंदिर के इतिहास के बारे में।

एक कहानी यह भी प्रचलित है कि जब पांडव महाभारत के युद्ध के पश्चात अपने पापों से मुक्ति पाना चाहते थे। कृष्ण भगवान ने पांडवों को पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव के चरणों में समर्पण के लिए कहा। जिसके परिणाम स्वरूप केदारनाथ कि और पांडव प्रस्थान किए। भगवान शिव पांडव को क्षमा नहीं करना चाहते थे। इसके लिए भगवान शिव ने अपना रूप एक मवेशी के रूप में परिवर्तित कर लिया और अन्य मवेशियों के साथ मिल गए। जिससे पांडव उनको पहचान नहीं पा रहे थे। लेकिन अंततः भीम ने उनके इस लीला को पहचान लिया। भीम की बुद्धिमत्ता पर खुश होकर के भगवान शिव ने पांडव को क्षमा कर दिया।

केदारनाथ मंदिर में भगवान केदारेश्वर की पूजा पाठ का समय क्या होता है?

केदारनाथ मंदिर की पूजा पाठ का समय 5:00 बजे का समय है 5:00 मंदिर खोला जाता है जनता के दर्शन के लिए पंचमुखी शिव भगवान की मूर्ति का विधिवत सिंगार करके 7:30 बजे से लेकर के 8:30 बजे तक आरती होती है उसके बाद 8:30 बजे मंदिर को फिर से बंद कर दिया जाता है। ध्यान देने योग्य वाली बात यह है कि मंदिर का कपाट सुबह 6:00 बजे ही खुल जाता है उसके बाद 3:00 से 5:00 बजे लेकर दोपहर में विशेष पूजा होती है भगवान शिव की। लेकिन जब बर्फबारी के कारण यह मंदिर पूर्णता बर्फ से ढक जाता है जिसके बाद पंचमुखी भगवान शिव की मूर्ति को उखीमठ ले जाया जाता है। जिससे भक्तगण दर्शन कर पाए। लेकिन जैसे ही 12 अप्रैल से लेकर 15 अप्रैल के बीच केदारनाथ मंदिर का कपाट खुलता है तब पंचमुखी शिव की मूर्ति को उखीमठ से ला करके केदारनाथ मंदिर में स्थापित कर दिया जाता है।

केदारेश्वर भगवान के पूजा का क्रम क्या है?

(1) प्रात:कालिक पूजा

(2) महाभिषेक पूजा,

(3) अभिषेक,

(4) लघु रुद्राभिषेक

(5) षोडशोपचार पूजन

(6) अष्टोपचार पूजन

(7) सम्पूर्ण आरती

(8) पाण्डव पूजा

(9) गणेश पूजा

(10) श्री भैरव पूजा

(11) पार्वती जी की पूजा

(12) शिव सहस्त्रनाम

निष्कर्ष:

केदारनाथ धाम में सच्चे भक्तों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है। भगवान शिव अपने भक्तों के करुण पुकार को सुनकर के उनके दुखों को दूर करते हैं और जीवन में सुख और इसके अलावा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

FAQ:

(1) केदारनाथ की उत्पत्ति कैसे हुई

Kedarnath History in Hindi: ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव की भुजा तुंगनाथ में और मुख रुद्रनाथ में और नाभि मद्मेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में इन चार स्थानों को संयुक्त रूप से पंच केदारनाथ या केदारनाथ की संज्ञा दी जाती है।

(2) केदारनाथ मंदिर छ महीने बंद क्यों रहता है

केदारनाथ मंदिर 6 महीने इसलिए बंद रहता है क्योंकि इस 6 महीने बर्फबारी पड़ता है। बर्फबारी पड़ने के कारण मंदिर का कपाट पूरी तरह बर्फ से ढक जाता है इसीलिए मंदिर 6 महीने तक बंद रहता है।

(3) केदारनाथ में पुजारियों को किस नाम से जाना जाता है

केदारनाथ में पुजारियों को रावल के नाम से जाना जाता है।

(4) केदारनाथ त्रासदी क्या है?

सन 2013 में केदारनाथ में बादल फट गया था जिसके परिणाम स्वरूप लगभग 5000 लोग मारे गए हैं इतना ही नहीं कितने लोग मंदाकिनी नदी में बह गए और अभी कितने मृत लोगों का वर्तमान में कंकाल मिल रहा है यह त्रासदी केदारनाथ के भक्त बड़ों के लिए बहुत कठिन परीक्षा की घड़ी थी।

(5) केदारनाथ की प्रसंगिकता को दर्शाने वाली मूवी का नाम क्या है?

केदारनाथ की प्रसंगिकता को दर्शाने वाली मूवी का नाम केदारनाथ है। इस मूवी में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और अभिनेत्री सारा अली खान थी।

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