आइए जानते हैं कि कटहल के दुर्लभ फायदे कौन-कौन से हैं

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Kathal ke Fayde

Kathal ke Fayde: कटहल की खेती दक्षिण पश्चिम भारत जैसे केरल, कर्नाटक में आजादी से पूर्व से ही हो रहा है। कटहल का मातृभूमि वाला देश भारत है। भारत में अभी वर्तमान समय में खजवा, सिंगापुरी, गुलाबी, रुद्राक्षी नामक कटहल की प्रजाति का उत्पादन किया जा रहा है। जिससे किसानों की आमदनी को दोगुना किया जा सके। इसका कारण यह है कि दिन प्रतिदिन लोग स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो रहे हैं। इसी कारण कटहल की मांग भी बाजार में बढ़ती जा रही है। उनकी बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए बहुत सारे किसान कटहल की फॉर्मिंग करने के लिए अग्रसर हो रहे हैं। इससे लाभ यह है लगभग 3 से 5 हेक्टेयर की भूमि में कटहल की खेती करने से हर वर्ष 200000 से 500000 की इनकम होने लगती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी मांग है। कटहल का उपयोग सब्जियों के रूप में हलवा के रूप में चिप्स के रूप में इसकी पके फलों के रूप में किया जा रहा है। इसमें पाया जाने वाला विटामिन प्रोटीन लोगों को इसके प्रति आकर्षित कर रहे हैं। कुछ लोग इसे गामापाछा भी कहते हैं। गामापाछा का अर्थ होता है बकरी का बच्चा क्योंकि इसकी सब्जी का  स्वाद मटन की तरह लगता है इसीलिए इसे गामापाछा की संज्ञा दी गई है।

कटहल और उसकी विशेषता के बारे में:

कटहल का वैज्ञानिक नाम आर्टोकार्पस हेटेरो फिल्लस है। कटहल उष्णकटिबंधीय वृक्ष है। कटहल का फल ऊपर से सख्त होता है। उसमें से नुकीली कांटे छोटे-छोटे नुकीले कांटे रहते हैं। यह वृक्ष न्यूनतम 20 फीट से लेकर के अधिकतम 40 फीट तक की ऊंचाई होती है। इसमें लगने वाला फल का आकार बहुत बड़ा होता है अर्थात लगभग 20kg, 30kg,40 kg के आसपास।इसके कच्चे फल से शादी ,विवाह के सामरोह में सब्जी बनाई जाती है और यहीं फल जब पक जाता है तो इसका सेवन भी बड़े लजीज तरीके से किया जाता है। खाने में बहुत ही स्वदिष्ट होता है भारत के पश्चिमी राज्यों में इसके पके फलों का सेवन बड़े चाव के साथ किया जाता है।

Kathal ke Fayde

कटहल में पाया जाने वाले पोषक तत्व कौन कौन सा है?

(1) प्रोटीन

(2) फैट

(3) फाइबर

(4) कार्बोहाइड्रेट

(5) फास्पोरस

(6) मैग्नीशियम

(7) कैल्शियम आयरन

(8) विटामिन बी-6

(9) विटामिन ए

(10) विटामिन ई

कटहल के सेवन के पश्चात इससे होने वाले फायदे (Kathal ke Fayde) कौन-कौन से हैं?

(1) कैंसर से बचाता है

कटहल में एंटी कैंसर का गुण भी पाया जाता है। इंडियन काउंसिल मेडिकल ऑफ रिसर्च ने कटहल से संबंधित एक शोध प्रकाशित किया। इसमें कहा गया कि कटहल मेंलिग्नांस, आइसोफ्लेवोंस और सैपोनिन नामक सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं जो एंटी कैंसर का कार्य करते हैं जो कोशिकाएं शरीर में अनियमित रूप से बढ़ रही है उनको अनकंट्रोल भी करता है।

(2) हार्ट को हेल्थी रखता है

यदि कटहल का सेवन सब्जी के रूप में या हलवा के रूप में या चिप्स के रूप में या किसी अन्य रूप में इसका सेवन प्रतिदिन अपने आहार में किया जाता है तो तब आपको जीवन में कभी भी हार्ट की प्रॉब्लम नहीं होगी इसका कारण यह है कि कटहल में विटामिन B6 पाया जाता है। विटामिन बी-6 का कार्य यह होता है कि होमोसिस्टीन को कम करता है। होमोसिस्टाइन हृदय के रोग से संबंधित जैसे हार्ट अटैक और कोलेस्ट्रोल जैसी बीमारी को बढ़ा सकता है।

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(3) रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है

कटहल में पाया जाने वाला विटामिन ए, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट और लैक्टिक एसिड जैसे गुण रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। एक शोध में खुलासा भी हुआ कि यह मौसमी बीमारी जैसे चिकनगुनिया डेंगू से भी रक्षा प्रदान करते हैं।

(4) पाचन को सुदृढ़ रखता है

कटहल में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो कब्ज के रोग से पेट की रक्षा करता है। इसके अलावा मल त्यागने में जो जलन की समस्या और किसी अन्य प्रकार की पीड़ा होती है। उससे भी निजात दिलाता है इतना ही नहीं यह  आंत की प्रॉब्लम  को  दूर करता है क्योंकि इसमें ऐसे फाइटोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं जो शरीर के अलावा पाचन क्रिया को बेहतर तरीके से काम करने के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं।

(5) एनीमिया रोग से बचाता है

कटहल में भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है। यदि शरीर में आयरन की पूर्ति होती रहे। तब एनीमिया रोग कभी भी नहीं होगा जैसे ही आयरन की कमी होती है। तब शरीर में एनीमिया रोग हो जाता है। एनीमिया रोग ऐसा रोग होता है। जिसमें रोगी के शरीर में खून की कमी हो जाती है। अधिकतर यह समस्या जन्म देने वाली माताओं के अंदर देखा जाता है क्योंकि उनके अंदर आयरन की डिफिशिएंसी हो जाती है। जिसके परिणाम स्वरूप हुआ वह एनीमिया की चपेट में आ जाती हैं ऐसी माताओं को अपने आहार में कटहल को अवश्य शामिल करना चाहिए। जिससे उनके शरीर में आयरन की कमी ना होने पाए।

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(6) ओस्टियोपोरोसिस रोग से रक्षा करता है

ऑस्टियोपोरोसिस रोग हड्डी से संबंधित रोग है। जिसमें पुरानी हड्डी के नष्ट होने और नई हड्डी के बनने की प्रक्रिया में कमी पाई जाती है अर्थात हमारे शरीर में रसायनिक परिवर्तन होते रहते हैं जैसे कि जो पुरानी हड्डियों के टिशू होते हैं उसमें बदलाव होता रहता है। यही बदलाव की प्रक्रिया यदि बंद पड़ जाती है। तब आस्टियोपोरोसिस की प्रॉब्लम हो जाती है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यदि कटहल सेवन किया जाए तो ऑस्टियोपोरोसिस के रोग से बचा जा सकता है क्योंकि कटहल में पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं जो ऑस्टियोपोरोसिस रोग से रक्षा करते हैं साथ ही साथ इसमें कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डी को मजबूत बनाते हैं।

(7) मधुमेह रोग से रक्षा करता है

कटहल एक ऐसा फल है जो विटामिन बी से समृद्ध है। विटामिन बी मधुमेह रोगियों के अंदर इंसुलिन में सुधार करके काफी हद तक मधुमेह रोग को कंट्रोल भी करता है। इतना ही नहीं प्राचीन काल में मधुमेह रोग उपचार के लिए कटहल के पत्ते का उपयोग होता था। कटहल के पत्ते को पानी में उबालकर के उसका सूप पिया जाता था इसके परिणाम स्वरूप इंसुलिन मेवअकल्पित सुधार होता था।

कटहल के सेवन के पश्चात इससे होने वाले नुकसान कौन-कौन से हैं?

(1) महिलाओं को कटहल का सेवन कितने प्रतिदिन की रूटीन में नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे बांझपन का भी खतरा हो सकता है।

(2) कटहल में फाइबर की अधिकता के कारण पेट दर्द की समस्या हो सकती है।

(3) एलर्जी की प्रॉब्लम हो सकती है

(4) मधुमेह के रोगियों में ग्लूकोज का लेबल बदल सकता है।

कटहल का सेवन कैसे करें?

(1) कटहल का सेवन सब्जी के रूप में किया जा सकता है कटहल की सब्जी उत्तर भारत में बहुतायत मात्रा में खाया जाता है।

(2) कटहल के फल का भी सेवन किया जाता है कटहल का फल जब पक  जाता है तो इसका फल अंदर से पीला हो जाता है जो खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगता है।

(3) केरल में कटहल का चिप्स भी बनता है यदि आप कुछ कुरकुरा पसंद करते हैं तब आप चिप्स के रूप में भी इसका यूज कर सकते हैं।

(4) कटहल का हलवा भी बनता है। यदि आपकी इच्छा है। कटहल के हलवा खाने की तो आप ही हलवा बनाकर भी खा सकते हैं।

(5) कटहल का कोफ्ता भी बनाकर खाया जाता है।

निष्कर्ष:

Kathal ke Fayde: कटहल भारतीय परंपरा का एक हिस्सा बन चुका है। भारत में इसके पके फल से लेकर इसके सब्जियों और इसके चिप्स को बूढ़े से लेकर के बच्चों तक बड़े चटखारे मार -मार के खाते हैं।

FAQ:

(1) कटहल की तासीर कैसी होती है?

कटहल की तासीर ठंडी होती है।

(2) कटहल का वैज्ञानिक नाम क्या है?

कटहल का वैज्ञानिक नाम आर्टोकार्पस हेटेरो फिल्लस है।

(3) कटहल में कौन कौन सा गुण पाया जाता है?

कटहल में पोटेशियम, मैग्नीशियम और आयरन, प्रोटीन विटामिन सी और विटामिन बी विटामिन पाया जाता है।

(4) कटहल के साथ क्या नहीं खाना चाहिए?

कटहल के साथ भूल से भी पपीता का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे लूज मोशन की प्रॉब्लम हो सकती है।

(5) दुनिया का सबसे बड़ा फल कौन सा है?

दुनिया का सबसे बड़ा फल कटहल है।

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