काशी विश्वनाथ मंदिर

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Kashi Vishwanath Mandir

Kashi Vishwanath Mandir: काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है 12 ज्योतिर्लिंग इस प्रकार से हैं -सोमनाथ, नागेश्वर, भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर, ग्रिशनेश्वर, बैद्यनाथ, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, रामेश्वरम और मल्लिकार्जुन। अलग-अलग ज्योतिर्लिंगों के अलग-अलग इतिहास और अलग-अलग विशेषताएं हैं। आपको बता दें कि सभी ज्योतिर्लिंगों में से एक विशेषता जो इसे विशेष बनाती है वह विशेषता यह है कि यह ज्योतिर्लिंग अनादि शिव को समर्पित है जो देवों के देव महादेव हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर प्राचीन काल से मोक्ष प्राप्त करने का स्थान माना जाता रहा है। यह मंदिर अपने आप में भव्य और पर्यटक के आकर्षण का केंद्र रहा है। जो भी भक्त श्रद्धा के साथ भगवान शिव को अपने आप को समर्पित कर देते हैं उनकी इच्छा भगवान शिव अवश्य पूर्ति करते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर को भगवान शिव की नगरी भी कहा जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव का दर्शन करने के लिए आते हैं। भगवान शिव को विश्वेश्वर भी कहा जाता है अर्थात ब्रह्मांड का ईश्वर। काशी विश्वनाथ का दर्शन करने के लिए आदिगुरु शंकराचार्य, कवि तुलसीदास भी आये और वारकारी संप्रदाय के श्रीएकनाथजी ने भगवान शिव की नगरी में रह करके ना केवल भगवान शिव का दर्शन किया अपितु भागवतगीता पर टीका भी वहीं पर रहकर लिखा। जो भी भक्त श्रद्धा के साथ भगवान शिव के इस नगरी वाराणसी में गंगा स्नान कर लेता है,उसके सारे पाप धुल जाते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप स्वर्ग के दरवाजे उसके लिए खुल जाते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर देश विदेश से करोड़ों लोग काशी विश्वनाथ मंदिर आते हैं, भगवान शिव के दर्शन करने के लिए। वर्तमान सरकार ने भी भगवान शिव के इस नगरी में किसी शिव के भक्त को कोई समस्या ना हो इसके लिए उन्होंने कई प्रकार के केंद्रीय योजनाओं को क्रियान्वित किया है। जिसके परिणाम स्वरूप विदेशियों को रूम से लेकर के यातायात की सुविधा में कोई असुविधा ना हो।

काशी विश्वनाथ मंदिर का जो वर्तमान स्वरूप अभी दिख रहा है उसका निर्माण किसने किया?

काशी विश्वनाथ मंदिर का जो अभी वर्तमान स्वरूप दिख रहा है उसका निर्माण 1780 ईस्वी में अहिल्याबाई होल्कर द्वारा करवाया गया। बाद में पंजाब के सिख शासक महाराजा रणजीत सिंह ने 1853 में काशी विश्वनाथ मंदिर पर 1000 किलोग्राम सोने का परत चढ़वाया जिसके परिणाम स्वरूप इस मंदिर की भव्यता और बढ़ गई।

Kashi Vishwanath Mandir

भगवान शिव की नगरी वाराणसी में स्थित Kashi Vishwanath Mandir का इतिहास क्या है?

शिव पुराण के अनुसार एक बार माता पार्वती को जब अपने मायके में अच्छा नहीं लग रहा था। जिसके परिणाम स्वरूप माता पार्वती ने भगवान शिव को सन्देशा भिजवा करके कहा कि मुझे यहां से ले चले अर्थात अब मैं आपके साथ कैलाश में ही रहूंगी। जिसके परिणाम स्वरूप भगवान शिव पार्वती को लेकर के इस प्राचीन नगरी वाराणसी में आये और अपने आप को ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित कर लेते हैं इसी ज्योतिर्लिंग को कालांतर में काशी विश्वनाथ कहा गया। विश्वनाथ मंदिर का विध्वंस 1194 ईस्वी में मोहम्मद गोरी द्वारा किया गया था हालांकि इसका जीर्णोद्धार राजा हरिश्चंद्र द्वारा किया गया था और अकबर के शासन काल में राजस्व कर के अधिकारी टोडरमल ने भी विश्वनाथ मंदिर की रक्षा सुरक्षा में अपना प्रमुख योगदान दिया था कालांतर में शाहजहां ने इस मंदिर को विध्वंस करने का आदेश दिया लेकिन हिन्दुओ के आंतरिक विद्रोह के कारण शाहजहां अपने मंसूबे में सफल नहीं हुआ। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि औरंगजेब ने इस मंदिर को विध्वंस कराकर उसके कुछ भाग पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण करवाया जो अभी वर्तमान में विरोध का कारण भी बना हुआ है।

काशी विश्वनाथ मंदिर की विशेषता क्या है?

(1) भगवान शिव संहार के देवता कहे जाते हैं। जब भगवान शिव ,शिव तांडव के माध्यम से प्रलय लाते हैं। प्रलय के परिणाम स्वरूप सारा ब्रह्मांड कम्पायमान हो जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप पेड़-पौधे जीव जंतु उस प्रलय के शिकार हो जाते हैं। लेकिन भगवान शिव की नगरी अर्थात वाराणसी को प्रलय से कोई भी हानि नहीं होती है। क्योंकि प्रलय के समय भगवान शिव अपने त्रिशूल पर वाराणसी नगरी को धारण कर लेते हैं। इतना ही नहीं पुराणों के अनुसार यहीं से पुनः ब्रह्मांड की रचना की जाती है अर्थात फिर से पेड़-पौधे जीव जंतुओं को उत्पन्न किया जाता है।

(2) सावन के महीने में देश के कोने- कोने से लाखों की संख्या में कांवरियों का सैलाब उमड़ पड़ता है। भगवान शिव का दर्शन करने के लिए जो भी भक्त सावन के महीने के समय काशी विश्वनाथ मंदिर आता है उसकी मनोकामना भगवान शिव अवश्य पूर्ति करते हैं। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि 1932 में जब अकाल पड़ा हुआ था। जिसके परिणाम स्वरूप यादव समाज के किसी व्यक्ति ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया जिसके बाद सूखे फसल लहराने लगे। जीव जंतुओं में प्राण का संचार होने लगा। इतना ही नहीं यह भी मान्यता है। सावन महीने के प्रथम सोमवार को भगवान शिव को सबसे पहले जलाभिषेक यादव समुदाय का कोई व्यक्ति करता है।

(3) काशी विश्वनाथ मंदिर की महिमा अपरंपार है यहां पर जो भी व्यक्ति शरीर त्यागता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है भगवान शिव मरते हुए व्यक्ति के कान में तारक मंत्र का उपदेश करते हैं। जिससे उस व्यक्ति की मृत्यु सहज हो जाती है वह मोह के चंगुल से छूट जाता है।

(4) भगवान शिव अर्थात ब्रह्मांड के ईश्वर के आनंद कानन में पांच मुख्य तीर्थ है जो इस प्रकार से हैं- दशाश्वेमघ,लोलार्ककुण्ड,बिन्दुमाधव,केशव और मणिकर्णिका

निष्कर्ष:

काशी विश्वनाथ मंदिर की इस ज्योतिर्लिंग का जो भी व्यक्ति श्रद्धा भाव से दर्शन कर लेता है। वह कई जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है और उसके अंदर से राग- द्वेष की भावना भी खत्म हो जाती है।

FAQ:

(1) काशी विश्वनाथ मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

काशी विश्वनाथ मंदिर इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहां पर जिस भी व्यक्ति की मृत्यु होती है उसको मोक्ष की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं यदि उस व्यक्ति का दाह संस्कार भी इसके क्षेत्र विशेष में होता है तो वह व्यक्ति भी मोक्ष का हकदार होता है। काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थित ज्योतिर्लिंग को विश्वेश्वर के नाम से भी जाना जाता है।

(2) काशी विश्वनाथ मंदिर कब जाना चाहिए?

काशी विश्वनाथ मंदिर आप साल के किसी भी महीने में जा सकते हैं। लेकिन अनुकूल वातावरण के अनुसार सबसे अच्छा वातावरण अक्टूबर महीने से लेकर के फरवरी महीने तक रहता है। उस समय श्रद्धालु को कोई समस्या नहीं होती है। क्योंकि तापमान न्यूनतम रहता है जिससे उसे कतार में खड़े होकर के दर्शन करने में कोई भी प्रॉब्लम नहीं होती है।

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