मजदूर के बेटे ने यूपीएससी में 484 रैंक हासिल की

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IAS Vishal Ki Kahani

IAS Vishal Ki Kahani:- यदि कोई व्यक्ति शिद्दत से किसी लक्ष्य के प्रति समर्पित है तो उसे लक्ष्य एक ना एक दिन अवश्य मिलेगा। बस व्यक्ति को अपने प्रतिभा को समाज से रूबरू कराना है। आज एक ऐसे भाव विभोर करने वाली स्टोरी बताता हूं। जिसके परिवार में खाने के लिए दो वक्त की रोटी नहीं थी सर पर पिता का साया नहीं था। बस माता ने एक वक्त की रोटी खा कर के अपने बेटे विशाल को 2022 में आईएएस अधिकारी बना दिया। ऐसी माता जो अपने बेटे के साथ कदम से कदम मिलाकर चलती रही जब तक बेटा लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लिया। सुख में तो सब साथ देते हैं यदि कोई व्यक्ति दुख में साथ दें तब आप समझ ले आप ऐसे व्यक्ति के साथ हैं जो आपके नैया को पार लगा सकता है।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का रहने वाला है विशाल कुशवाहा

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर ब्लॉक के मकसूदपुर गांव से संबंध रखने वाले विशाल कुशवाहा ने ना अपने हौसले से बल्कि अपनी प्रतिभा से यह असाधारण कार्य करके दिखाया जो आने वाले समय में जो व्यक्ति गरीबी का रोना रोते हैं और कहते है मेरे पास पैसा नहीं है मैं पढ़ नहीं सकता ऐसे व्यक्तियों के लिए विशाल किसी प्रेरणास्रोत से कम नहीं है। यूपीएससी 2022 में विशाल ने 484 रैंक हासिल करके अपने जिले और गांव का नाम रोशन किया।

बकरी पाल करके बेटे को बनाया आईएस:

विशाल के पिता बिकाऊ प्रसाद की मृत्यु 2008 में ब्रेन हेमरेज की वजह से हो जाती है। उनके पिता की मृत्यु के बाद परिवार तितर-बितर होने लगता है। अब परिवार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं था जो उनके परिवार की आजीविका चला सके। संकट तो बहुत गंभीर था लेकिन इन संकटों को नजरअंदाज करते हुए उनकी मां रीना देवी जो हाउसवाइफ थी उन्होंने बकरी पाल करके विशाल को पढ़ाना प्रारंभ किया।

पिता ने यह पहले ही जान लिया की विशाल एक ना एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनेगा:

विशाल के स्वर्गीय पिता बिकाउ प्रसाद ने अपने बेटे के असाधारण प्रतिभा को देख करके वह अचरज में पड़ जाते थे और उन्होंने भविष्यवाणी कर दी की विशाल एक ना एक दिन बड़ा आदमी बनेगा। जिसके बाद पूरा बिहार विशाल को जानेगा और ऐसा 2021 में हुआ भी जब विशाल ने अपनी गरीबी को अपनी कमजोरी ना समझ करके अपने हौसले को जो उड़ान दी है वह काबिले तारीफ है। उनके पिता के द्वारा कही गई बात 2011 में सत्य होना प्रारंभ हो गयी है। विशाल ने 2011 के मैट्रिक परीक्षा में टॉप किया। जिसके बाद पूरा बिहार विशाल को जान गया। इतना ही नहीं 2013 में उनका सिलेक्शन आईआईटी में हो गया उन्होंने आईआईटी कानपुर से केमिकल से बीटेक किया और बीटेक करने के बाद रिलायंस कंपनी में जॉब किया लेकिन जॉब में उनका मन नहीं लग रहा था उनको तो और कुछ करना था इसके लिए वह जॉब छोड़ करके तुरंत दिल्ली आ गए और देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक सेवा की नौकरी में जुट गए।

दीवार के सहारे सिर टिका करके रात गुजारते विशाल:

विशाल की बहन बताती है कि विशाल रात में पढ़ाई के दौरान सोते नहीं थे वह अपने सिर को दीवार के सहारे करके पढ़ते-पढ़ते जब उनकी आंख लग जाती थी तो वैसे ही सो जाते थे जब 3 से 4 घंटे के बाद उनकी नींद खुलती थी वह फिर पढ़ना प्रारंभ कर देते थे।

आईएएस अधिकारी विशाल ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता और गुरु को दिया:

सफल होना बड़ी बात नहीं है। सफलता को पचा लेना सबसे बड़ी बात है ऐसा विशाल ने करके दिखाया भी। विशाल ने जब 2022 के यूपीएससी परीक्षा को क्रैक करके 484 रैंक हासिल किया तो मीडिया के सामने उन्होंने भाव विभोर हो करके यह बताया मैं आज जो भी हूं अपने माता का कठोर परिश्रम का परिणाम हूँ। गुरु गौरी शंकर सर का बहुत बड़ा आभारी हूं मेरे गुरु गौरी शंकर ने मेरी आर्थिक स्थिति जब ठीक नहीं थी तब उन्होंने मेरी आर्थिक मदद भी की और साथ ही साथ आगे बढ़ने के लिए हमेशा मोटिवेट भी करते रहे।

आंख में आंसू ला देने वाले छड़:

विशाल की माता रीना देवी कहती है कि जब मेरे पति की 2008 में मृत्यु हो जाती है तो मैं बहुत घबरा जाती हूं की बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी और साथ ही साथ उनकी शादी कैसे होगी, कौन करेगा क्योंकि घर में कोई कमाने वाला नहीं है मैं इन सब बातों को सोच करके चिंतित होती जा रही थी तब मैंने स्वयं से निर्णय लिया कि मैं अपने बच्चों को आगे पढ़ाऊंगी चाहे मुझे इसके लिए अपने खून के एक-एक कतरे को भी बेचना पड़ जाए। इसके बाद विशाल की माँ रीना देवी ने रात दिन एक करके एक वक्त का खाना खाकर के बच्चों को वह सब सुख सुविधाएं दी जिसकी आवश्यकता उस समय सबसे ज्यादा थी ऐसी मां को सलाम। यदि ऐसी मां समाज में रहेंगी तो हमारा समाज दिन प्रतिदिन ऐसा कोई न कोई आए दिन कारनामा करके दिखाता रहेगा जिसको देख करके कुछ लोग आश्चर्यचकित भी होंगे और कुछ लोग मोटिवेट हो करके अपने भविष्य को संवारने में जुट जाएंगे।

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