आपको पता है क्या है हुरंगा होली, जानिए इसकी खास विशेषता

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Huranga Holi 2022 - Your Voice Story

आप सब ने कपड़ा फाड़ होली का नाम अवश्य सुना होगा ।कपड़ा फाड़ होली उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में और बिहार और एमपी में काफी प्रसिद्ध है। लेकिन इस कपड़े फाड़ होली को वृंदावन और मथुरा में हुरंगा होली कहा जाता है। क्योंकि यह होली श्री कृष्ण के भ्राता श्री बलराम को समर्पित है। लेकिन ध्यान देने योग्य वाली बात यह है की हुरंगा होली कपड़ा फाड़ होली से अलग है। लेकिन कपड़े दोनों में फटते हैं। लेकिन हुरंगा होली में कपड़ा फाड़ने का एक  सलीका है। लेकिन कपड़े फाड़ होली में भांग के नशे में या पुरानी दुश्मनी निकालने के लिए एक दूसरे को कपड़े को फाड़ते हैं। कपड़े फाड़ में कोई महिला नहीं शामिल होती है सिर्फ कपड़े फाड़ने में एक पुरुष दूसरे पुरुष का कपड़ा को फाड़ता है। लेकिन इसमें भी आनंद है ।आज का समय काफी भौतिकता से संलिप्त हो गया है। इसी के मद्देनजर हुरंगा होली का अपना एक अलग महत्व है। यह अपनी विशेषताओं के कारण पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है। इस होली में पुरुष महिला समान रूप से भागीदारी करते हैं और मर्यादा में रहते हुए हुरंगा होली खेलते हैं। जिससे किसी को शारीरिक चोट न पहुंचे और ना ही किसी को मानसिक आघात लगे।

हुरंगा होली क्या है? (Huranga Holi Kya Hai)

इस हुरंगा होली को सेवायत पांडे समाज के पुरुष और स्त्री इस होली को खेलते हैं। इस होली में स्त्री पुरुष के कपड़े को फाड़कर उसका कोड़ा बनाती है। उसके बाद इस कोड़े को टेसू  के फूल के रंग में भिगोकर उस कोड़े से पुरुष को मारती है ,मारते समय यह ध्यान नहीं रखती है कि वह स्त्री का पति है या बेटा है या ससुर है। इसमें कोई भेद नहीं किया जाता है। पुरुष को इससे आनंद भी मिलता है। क्योंकि स्त्रियां इसमें पुरुष को दौड़ा-दौड़ा कर मारती हैं। और पुरुष भागता रहता है पुरुष स्त्री के इस व्यवहार के लिए कोई प्रतिरोध नहीं जताता है ।बल्कि उसका सम्मान करता है ।हुरंगा होली की परंपरा बहुत पुरानी है यह द्वापर युग से ही चली आ रही है। हुरंगा होली श्री कृष्ण भगवान के बड़े भाई श्री बलराम को समर्पित है। ऐसा कहा जाता है कि हुरंगा होली में श्री कृष्ण भगवान और राधा और बलराम भी भाग लेते हैं। ऐसी श्रद्धा है सेवायत पांडे समाज की स्त्री और पुरुषों में। बरसाने की लठमार होली में भी सेवायत समुदाय के लोग बढ़ – चढ़कर भाग लेते हैं।

हुरंगा होली की विशेषता क्या है? (Huranga Holi ki Visheshta Kya Hai)

(1) हुरंगा होली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस होली को देखने के लिए देश के कोने कोने से और विदेश के लोग भी आते हैं।

(2) इस होली की एक विशेषता यह है कि इसमें स्त्रियां नए कपड़े पहन कर और आभूषण को धारण करके होली गीत गाती हुई मंदिर में प्रवेश करती हैं।

(3) इस होली की विशेषता यह है कि इसमें किसी से भेदभाव नहीं किया जाता है। इसमें सभी को समान रुप से कोड़े मारे जाते हैं अर्थात चाहे मार खाने वाला व्यक्ति चाहे उसका ससुर हो या बेटा हो या ज्येष्ठ हो ।

(4) इस होली की एक और विशेषता यह है कि इसमें बलराम और श्री कृष्ण अपने सखा सहित हवा में गुलाल उड़ाते हैं।

(5) इस होली की विशेषता यह है कि इसमें रंगों को आधुनिक मशीन की सहायता से हवा में उड़ाया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे कि मानो रंगों की वर्षा हो रहा हो। इस दृश्य को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो पुजारी फूलों की होली की तरह टेसू के फूल हवा में उछाल रहे हो।

निष्कर्ष :

हुरंगा होली में महिलाएं पुरुष के कपड़े को फाड़कर और उसका कोड़ा बनाती हैं। कोड़ा बनाने के बाद उस कोड़े को टेसू के फूल के रंग में अच्छी तरह से भिगोती हैं। भिगोने के बाद उसी कोड़े से पुरुष को मारती है। इस होली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पुरुष स्त्री के इस व्यवहार के लिए प्रतिरोध नहीं जताता है बल्कि वह आनंद उठाता है। और इस होली में महिलाएं यह भेद नहीं करती है कि कोड़ा मार खाने वाला मेरा पति है या ससुर है या मेरा लड़का है। वह बिना भेदभाव के सब व्यक्तियों पर समान रूप से कोड़े बरसाती हैं।

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