होलिका दहन की सम्पूर्ण पूजा विधि और शुभ मुहूर्त, इस तरह से करे पूजा दूर होगी हर समस्या

0
3352
holika dahan ki puja vidhi

Holika Dahan Ki Puja Vidhi: होलिका दहन में अपने किये गए गलत कर्मों को होलिका के साथ जलाकर अपने अंदर से पाप को विनष्ट करके पुण्य को प्राप्त कर सकते हैं। क्योंकि होलिका दहन से हमारे जीवन में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जिसके परिणाम स्वरूप हमारे मुख पर प्रसन्नता का भाव बना रहता है ।यदि आपके मुख पर प्रसन्नता का भाव बना रहे इसके लिए आपको होलिका दहन की सही से पूजा (Holika Dahan Ki Puja) करनी होगी। जिसके परिणाम स्वरूप आपकी मनोकामना पूर्ण हो सकेगी। क्योंकि इस जीवन में हम जो भी कार्य कर रहे हैं वह कार्य हम प्रारब्ध के अनुसार कर रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरूप हम नियति के मार्ग को नहीं बदल सकते हैं, बस प्रयास कर सकते हैं। इसीलिए आप इस वर्ष की होलिका की पूजा अवश्य ही करे।

होलिका दहन की प्रथा की शुरुआत कब से हुई है (Holika Dahan Ki Pratha Kabse Shuru Hui)

नारद पुराण और वामन पुराण के अनुसार होलीका हिरण्यकश्यप की बहन थी। हिरण्यकश्यप एक राक्षस था जिसे ब्रह्मा द्वारा यह वरदान दिया गया था कि उसे कोई जी मनुष्य और पशु ,पक्षी नहीं मार सकता है और ना ही इसकी मृत्यु दिन में होगी और ना ही रात में होगी। जिसके परिणाम स्वरूप वह अपने आप को अमर समझ रहा था। और वहां लोगों के ऊपर अत्याचार करके यह कह रहा था कि लोग मेरी पूजा करें ।मैं ही भगवान हूं। लेकिन हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद जो एक विष्णु भक्त था। वह विष्णु भगवान पूजा किया करता था। वह अपने पिता को भी समझाता था कि पिताजी अभी भी समय है आप भगवान विष्णु के शरण में चले जाइए  उसके पिता भगवान विष्णु का नाम सुनकर चिढ़ जाते थे।

जिसके परिणाम स्वरूप हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को अपना शत्रु समझा और प्रह्लाद को मारने के लिए कई प्रयास किए जैसे कि प्रह्लाद को पहाड़ियों से फेंकने का आदेश दे दिया गया। लेकिन प्रह्लाद बच गए ।उनकी मदद भगवान विष्णु ने किया। और फिर हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने प्रह्लाद को अपनी गोद में बिठाकर आग  लगा। जिसके परिणाम स्वरूप प्रह्लाद तो बच गए। लेकिन होलिका उस आग में झुलस कर मर गई। इसी समय से होलिका दहन  की प्रथा शुरुआत हुई है। क्योंकि होलिका एक नकारात्मक ऊर्जा है जो हम सबके अंदर वास करती है। हम प्रह्लाद की पूजा करके और साथ ही साथ भगवान नरसिंह की पूजा करके अपने अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते है।

होलिका दहन की पूजा में प्रयुक्त होने वाला पूजा सामग्री क्या है? (Holika Dahan Ki Puja Samagri Kya Hai)

(1) तांबे के लोटे में जल 

(2) माला

(3) रोली

(4) चावल

(5) गन्ध

(6) पुष्प

(7) हल्दी

(8) मूंग

(9) बताशा

(10) गुलाल

(11) चने की बालियां

(12) गेंहू की बालियां

होलिका दहन का पूजा करने की विधि क्या है? (Holika Dahan Ki Puja Karne Ki Vidhi)

(1) ब्रह्म मुहूर्त मैं स्नान करके उत्तर दिशा की तरफ अपना मुंह करके खोल क्या की पूजा करनी चाहिए और ध्यान रहे कि पूजा करने से पहले अपने आसपास पानी की कुछ बूंदे चारों तरफ डाल ले।

(2) उसके बाद गाय के गोबर से होलिका  का निर्माण करें। निर्माण करने के परिणाम स्वरूप होलिका की पूजा करने के लिए माला ,रोली और गंध, पुष्प, गुड़ और  साबुत हल्दी और मूंग, बताशा, गुलाल और पांच प्रकार के अनाज में गेहूं की बालियां और साथ में एक लोटा अवश्य रखें।

(3) “ॐ नृसिंहाय नम:” बोलकर होलिका पर रोली ,अक्षत और फूल ,बताशे अर्पित करे

(4) उसके बाद” ॐ प्रहलादाय नम:” बोलकर पुष्प अर्पित करे।

(5) और फिर “ॐ होलिकायै नम:” बोलकर होलिका के चारो ओर मौली को लपेटे।

(6) मौली को लपेटने के बाद भगवान नरसिंह का नाम लेते हुए पांच बार अनाज की आहुति दे।

(7) फिर होलिका दहन करे ।होलिका दहन के समय होलिका की परिक्रमा अवश्य करे ।परिक्रमा करने के बाद होलिका में गुलाल डालना न भूले।

निष्कर्ष :

आज मैंने इस आर्टिकल में

(1) होलिका दहन की प्रथा की शुरुआत कब से हुई है| (Holika Dahan Ki Pratha Kabse Shuru Hui)

(2) होलिका दहन की पूजा में प्रयुक्त होने वाला पूजा सामग्री क्या है? (Holika Dahan Ki Puja Samagri Kya Hai)

(3) होलिका दहन का पूजा करने की विधि क्या है? (Holika Dahan Ki Puja Vidhi)

आदि जानकारी को मैंने इस आर्टिकल में सविस्तार से  बताया है। यदि यह आर्टीकल आपको अच्छा लगा है तो इस आर्टीकल को अपने फ्रेंड या रिलेटिव को सोशल मीडिया जैसे फेसबुक ,व्हाट्सएप, लिंकडइन आदि पर अवश्य शेयर करें। जिससे वह भी इस आर्टिकल का लाभ उठा सके।

यह भी पढ़े: Holi 2021: होली के रंग को घर मे बनाने की विधि

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here