जानिए गंगासागर के इतिहास के बारे में

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gangasagar ka itihas

सब तीरथ चार बार, गंगासागर एक बार।

अर्थात आप अपने जीवन में सब तीरथ जैसे कुंभ, अर्धकुंभ, महाकुंभ और बद्रीनाथ जैसे मोक्षदायिनी तीरथ पर कई बार जा सकते हैं लेकिन जीवन में बड़े भाग्यशाली व्यक्तियों को ही Gangasagar जाने का मौका मिलता है। इसका कारण यह है कि यहां पर जो व्यक्ति स्नान करता है वह स्वर्ग में अपना स्थान सुनिश्चित कर लेता है। अब यह प्रश्न उठता है कि गंगासागर तीर्थ कोई व्यक्ति एक बार ही क्यों जा सकता है तो आपको बताना चाहता हूं कि इसका कारण है गंगासागर की विषम परिस्थितियां। विषम परिस्थितियों से आशय यह है कि वहां पर सागर की उमड़ती लहरें और मूसलाधार बारिश और हवाओं का झोंका जैसी विपदा आती रहती है। इन विपदाओं का सामना करते हुए ही जाना है। इसलिए कोई भी व्यक्ति यदि हिम्मत जुटा पाता है तो वह जीवन में एक बार अवश्य ही गंगासागर जाता है। एक दूसरा कारण यह भी है कि दूरी और पैसे की लागत यह भी प्रभावित करता है लोगों को दोबारा जाने के लिए क्योंकि भारत में जो अधिकतर लोग जीवन यापन करते हैं औसतन उनकी मासिक आय उनकी जीवन के अनुरूप नहीं है। गंगासागर में हर वर्ष चार से छह लाख श्रद्धालु देश विदेश के कोने-कोने से गंगा सागर तीरथ करने के लिए आते हैं।

गंगासागर का भौगोलिक अवस्थिति क्या है?

गंगासागर पश्चिम बंगाल के सुंदरवन डेल्टा के दक्षिण 24 परगना में स्थित है। यह हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थल है। हर वर्ष जिन श्रद्धालुओं की श्रद्धा है हिंदू धर्म के प्रति वह गंगासागर आते हैं। ऐसा नहीं है कि भारत के लोग ही आते हैं , गंगा सागर तीरथ। विश्व के अन्य देशों जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस जैसे देशों से भी श्रद्धालु आते हैं क्योंकि गंगासागर के प्रति उनकी आस्था अटल है। इसका कारण है गंगासागर पर आकर के जो अध्यात्म का अनुभव होता है वह अनुभव आपको किसी अन्य स्थान पर नहीं होता है ना कोई शोर शराबा ना कुछ पाने की चाहत ना मन में अनुराग- विराग। सिर्फ मन में ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना रहती है। कुंभ मेले के बाद सबसे ज्यादा भीड़ गंगासागर की मेले में ही होती है।

Gangasagar का नाम क्यों गंगासागर पड़ा?

गंगासागर का नाम गंगासागर इसलिए पड़ा क्योंकि यहीं पर गंगा बंगाल की खाड़ी में अर्थात सागर में मिलती है इसलिए इस मिलन को गंगासागर का नाम दिया जाता है। गंगासागर में ही कपिल मुनि का आश्रम भी स्थित है कपिल मुनि भगवान विष्णु के अवतार भी माने जाते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप गंगासागर की आध्यात्मिकता की आभा और जगमगा उठती है।

कपिल मुनि का आश्रम

हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के अनुसार गंगासागर की पौराणिक मान्यता क्या है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जहां पर वर्तमान में गंगासागर स्थित है। उसी स्थान के पास कपिल मुनि का आश्रम भी स्थित है। अब प्रश्न उठता है कि कपिल मुनि और गंगासागर के बीच संबंध क्या है तो आपको यह बता दे कि कपिल मुनि एक सिद्धि पुरुष थे। जिन्हें भूत भविष्य, वर्तमान तीनों का ज्ञान था। इसलिए उन्होंने Gangasagar के पास अपना आश्रम बनाया और वहीं पर ध्यान मग्न हो गए। बात उन दिनों की है जब राजा सगर अपनी प्रजा के कल्याण के लिए यज्ञ करना चाहते थे। जिससे उनके राज्य में लक्ष्मी का वास हो और अन्न की कमी कभी ना हो और भुखमरी ना हो। इन सबके लिए राजा सगर यज्ञ करना चाहते थे। राजा सगर भगवान राम के पूर्वज है। लेकिन इस यज्ञ से स्वर्ग के राजा इंद्र को भय लगने लगा था। उनके मन में यह प्रश्न उठने लगा था कि यदि राजा सगर अपना यज्ञ पूरा कर लेंगे शायद मेरा इंद्रासन न छिन जाए। इसी भय से उन्होंने राजसूय यज्ञ का घोड़ा पकड़कर के कपिल मुनि की आश्रम में किसी स्थान पर चुरा दिया। जब यह बात राजा सगर को पता चला तो उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनकी घोड़े को कोई चुरा भी सकता है। इसके लिए उन्होंने अपने साठ हजार पुत्रों को भेजा। उन साठ हजार पुत्रों ने जब पृथ्वी की सब  स्थान पर घोड़े को ढूंढा तो नहीं मिला तो उन्होंने पृथ्वी को खोदना शुरू किया और पाताल लोक में कपिल मुनि के आश्रम में वह घोड़ा मिलता है। उन राजकुमारों को लगता है कि या घोड़ा कपिल मुनि ने चुराया है। जिसके परिणाम स्वरूप उन राजकुमारों ने कपिल मुनि को बड़ी खरी- खोटी सुनाया। जिसके परिणाम स्वरूप कपिल मुनि ने उन्हें  श्राप देकर भस्म कर दिया। लेकिन जब उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है तो देर हो चुकी थी। क्योंकि श्राप दे करके दोबारा वापस नहीं लिया जा सकता था। इसके लिए उन्होंने राजा सगर से कहा कि यदि आप आकाश से गंगा को वापस लाएं पाताल लोक तक। तब आप के पुत्रों को मोक्ष की प्राप्ति होगी। जिसके परिणाम स्वरूप राजा सगर की वंश में जन्मे भगीरथ ने भगवान शिव और ब्रह्मा की घोर तपस्या करके गंगा को पाताल लोक तक लाने में समर्थ होते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप सगर के साठ हजार पुत्रों को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इसलिए यह धारणा बन गई है कि गंगासागर में जो व्यक्ति स्नान कर लेता है वह अपना सुनिश्चित स्थान कर लेता है स्वर्ग में, क्योंकि यह मोक्षदायिनी स्थान है।

गंगासागर हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए आस्था की स्थली क्यों है?

(1) गंगासागर हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए आस्था की स्थली इसलिए है क्योंकि यहां पर हर वर्ष तूफान और लहरे आती है। लेकिन श्रद्धालुओं को कुछ भी नहीं होता है। जिसके परिणाम स्वरूप श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ जाती है की उनकी रक्षा भगवान विष्णु कर रहे हैं।

(2) दूसरा कारण यह है कि गंगासागर मेला गंगासागर मे हुगली नदी के तट पर ठीक उसी स्थान पर किया जाता है जिस स्थान पर मां गंगा सागर से मिलती है। यह स्थान यह बतलाता है कि कोई भी व्यक्ति जब उसकी मृत्यु हो जाती है वह परमात्मा में लीन हो जाता है ठीक उसी प्रकार जैसे गंगा सागर में विलीन हो। वह अपना अस्तित्व खो देती है। इसीलिए मनुष्य को निष्काम कर्म करना चाहिए क्योंकि निष्काम कर्म करने से कर्म का दुष्चक्र टूटता है।

(3) गंगासागर पितरों का पिंडदान करने के लिए भी एक प्रमुख तीर्थ है क्योंकि इस तीर्थ पर पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म के शास्त्रों में पिंडदान की विशेष विधियों का वर्णन है। आप उन विधियों का पालन करके गंगासागर में पितरों का पिंडदान कर सकते हैं। लेकिन ऐसा भी नहीं है यदि आपको उन विधियों का ज्ञान नहीं है तो गंगासागर की तट के पास आपको हजारों की संख्या में पंडा मिल जाएंगे जो आपके पितरों की पिंडदान की विधियों को पूर्ण कराने में योगदान देंगे।

(4) गंगासागर इसलिए भी हिंदू धर्म की आस्था की स्थली है क्योंकि यहीं पर कपिल मुनि का मंदिर भी है जिसके परिणाम स्वरूप हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों की आस्था में और बढ़ोतरी हो जाती है। कपिल मुनि मंदिर में जो श्रद्धालु सच्चे मन से कुछ भी मांगता है उसकी मन्नत पूरी हो जाती है।

Gangasagar ka Itihas

गंगासागर कैसे जाया जाए?

(1) वायुमार्ग के द्वारा 

यदि आप वायु मार्ग से गंगासागर जाना चाहते हैं तो इसके लिए निकटतम हवाई अड्डा जो है कोलकाता में स्थित है। इस हवाई अड्डा का नाम है सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा। इस हवाई अड्डे से गंगासागर की निकटतम दूरी 142 किलोमीटर है।

(2) रेल मार्ग के द्वारा

गंगासागर की निकटतम रेलवे स्टेशन का नाम सियालदाह है। सियालदह से गंगासागर की दूरी लगभग 140 किलोमीटर है। सियालदाह पर उतरने के बाद बस या निजी टैक्सी करके आप गंगासागर जा सकते हैं।

(3) सड़क मार्ग के द्वारा

यदि आप गंगासागर सड़क मार्ग की द्वारा जाना चाहते हैं तो आपको बताना चाहते हैं कि कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजधानी देश के विभिन्न राज्यों के राज्य मार्गों से जुड़ा हुआ है। आप बस के माध्यम से आसानी से कोलकाता पहुंच सकते हैं। और वहां से टैक्सी या बस के माध्यम से  जा सकते हैं। काकद्वीप से आप फेरी लेकर के आसानी से Gangasagar पहुंच सकते हैं।

नोट- चाहे आप सड़क मार्ग का चुनाव करें या हवाई मार्ग का चुनाव करें या रेल मार्ग का चुनाव करें। आपको काकद्वीप आना पड़ेगा और वहां से आपको फेरी लेना पड़ेगा। फेरी एक अत्याधुनिक उपकरणों से लैस बोट है। जिसके माध्यम से आप गंगासागर पहुंच सकते हैं क्योंकि Gangasagar चारों ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। आपको कोई भी टैक्सी चालक काकदीप में स्थित हुगली नदी के पूर्वी तट तक ही पहुँचा देगा।

निष्कर्ष:

काकद्वीप पर स्थित गंगासागर हिंदू के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख आस्था का केंद्र है। जहां पर हर वर्ष लाखों की संख्या में हिंदू श्रद्धालु देश के कोने- कोने से गंगासागर तीर्थ आते हैं। उनकी मान्यता है कि इस तीरथ को करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

FAQ:

(1) गंगासागर में क्या खासियत है?

कुंभ मेले के बाद हिंदू धर्म का पवित्र स्थल Gangasagar ही है। क्योंकि यही पर कपिल मुनि का आश्रम और गंगा और सागर का मिलन बिंदु है। इसीलिए पर्यटन स्थल होने के साथ-साथ हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए मोक्ष का केंद्र भी है।

(2) गंगासागर की यात्रा कब करनी चाहिए?

गंगासागर की यात्रा करने के लिए सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर महीने से लेकर के फरवरी महीने तक का है। आप इन्हीं महीनों में Gangasagar की यात्रा कर सकते हैं क्योंकि यह मौसम तीर्थ यात्रियों के स्वास्थ्य की अनुकूल है।

(3) गंगासागर तीर्थ कौन से राज्य में है?

गंगासागर तीर्थ भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में है।

(4) सभी तीरथ चार बार, गंगासागर एक बार का मतलब क्या है?

सभी तीरथ चार बार, गंगा सागर एक बार का मतलब यह है कि आप सभी तीर्थों पर जाकर के जो पुण्य अर्जित करते हैं वह पुण्य आप सिर्फ एक बार Gangasagarमें जाकर ही अर्जित कर सकते हैं आपको बार-बार किसी अन्य तीरथ पर जाने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी।

(5) गंगासागर क्यों प्रसिद्ध है?

गंगासागर इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को इसी स्थान पर मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इसीलिए हिंदू धर्म को मानने वाले जो श्रद्धालु हैं उनकी ऐसी आस्था है कि गंगासागर में जो एक बार स्नान कर लेता है उसको भी मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

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