गणेश चतुर्थी मूर्ति स्थापना से लेकर के जाने मूर्ति विसर्जन की विधि और उसके लाभ के बारे में

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Ganesh Chaturthi Murti Sthapana

Ganesh Chaturthi Murti Sthapana:- गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र त्यौहार है। गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र में मनाने की शुरुआत भारत के गरम दल के नेता और पूर्ण स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक को इसका श्रेय दिया जाता है। जिन्होंने स्वदेशी आंदोलन के दौरान लोगों को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए गणेश चतुर्थी मनाने के लिए प्रोत्साहित किया। गणेश चतुर्थी से आशय यह है कि इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। शिव पुराण के अनुसार भागपद्र महीने के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इन्हीं के जन्म दिवस को हम गणेश चतुर्थी के रूप में मनाते हैं। गणेश चतुर्थी भारत के कोने-कोने में मनाया जाता है कश्मीर से कन्याकुमारी तक। लेकिन यह पर्व बड़े स्तर पर कर्नाटक और महाराष्ट्र में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी मनाने के लिए हिंदू धर्म के अनुयाई भगवान गणेश की बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं स्थापित करते हैं और 9 दिन लगातार भगवान गणेश को प्रसाद भी वितरण करते हैं। इसके अलावा हिंदू धर्म के अनुयाई जो गांव में रहते हैं या छोटे कस्बो या शहरों में रहते हैं वहां पर भी भगवान गणेश की छोटी प्रतिमा को अपने घर में स्थापित करते हैं उनकी पूजा अर्चना करते हैं और अंत में नदी या तालाब में विसर्जन कर देते हैं।

गणेश चतुर्थी के इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना:

गणेश चतुर्थी की तिथि का प्रारंभ 18 सितंबर 2023 को 12 बजकर 39 मिनट से प्रारंभ होगा और 19 सितंबर 2023 को 1बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगा। इसी बीच श्रद्धालु गणेश की प्रतिमा को अपने घर या पांडाल में स्थापित करते हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रतिमा को स्थापित करने के बाद उसकी पूजन की जो शुभ तिथि है वह तिथि 11 बजकर के 1 मिनट से प्रारंभ होगी और 1 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने का विधि विधान क्या है?:

(1) गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की प्रतिमा को लाते समय ढोल नगाड़ो के साथ नाचते झूमते भगवान गणेश की प्रतिमा को पंडाल तक या घर तक लाये।

(2) पंडाल पर लाने के बाद मूर्ति को स्थापित करने से पहले ब्रह्ममुहूर्त के समय स्नान कर लीजिए उसके बाद एक चौकी पर पीला वस्त्र डालिए और फिर उसके बाद भगवान गणेश के इस मंत्र का गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणमं। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम।। उच्चारण करते हुए उनकी प्रतिमा को स्थापित करिए।

(3) ध्यान देने वाली बात यह है कि मूर्ति स्थापित करते वक्त भगवान गणेश की मुख दिशा उत्तर की दिशा में होनी चाहिए।

(4) उसके बाद भगवान गणेश का श्रृंगार जैसे सुंदर वस्त्र, कलावा, आभूषण, पुष्प माला और मुकुट से करे।

(5) भगवान गणेश का श्रृंगार करने के बाद तमिलनाडु के शेषम के जंगलों में पाए जाने वाला लाल चंदन से भगवान गणेश का तिलक करना है।

(6) भगवान गणेश का तिलक करने के बाद मोदक और पंचमेवा, पंचामृत और पांच फल चढ़ाएं।

(7) उसके बाद भगवान गणेश की आरती करें।

Ganesh Chaturthi Murti Sthapana

भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन करने का विधि विधान क्या है?:

भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन की तिथि 28 सितंबर 2023 है। इस बार यह भी प्रश्न उठता है कि जितने हर्षोल्लास के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित किए हैं उतनी ही हर्षोल्लास के साथ उनकी प्रतिमा का विसर्जन करना है तो विसर्जन करते समय कोई चूक ना हो इसके लिए विधि विधान जान लीजिए।

(1) विसर्जन वाली तिथि को भगवान गणेश की पूजा करें।

(2) शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश को मोदक बहुत ही पसंद है उनको मोदक का भोग लगाए।

(3) विसर्जन शुभ मुहूर्त की तिथि में ही करें और भगवान गणेश को अर्पित अक्षत फूल और माला को एकत्र करके बांध लीजिए और ध्यान देने वाली बात यह है कि गणेश भगवान की प्रतिमा को विसर्जित करते समय उस एकत्र किए गए फूल और माला को भी विसर्जित कर दीजिए।

(4) भगवान गणेश की प्रतिमा को नदी या तालाब में धीरे-धीरे विसर्जित करें और विसर्जित करते वक्त भगवान गणेश के मंत्र का उच्चारण करें।

गणेश चतुर्थी का व्रत रखने का विधि विधान क्या है?:

(1) सबसे पहले भगवान गणेश को बूंदी के लड्डू या मोदक का भोग लगाए और इन लड्डू या मोदक को गरीब व्यक्तियों में वितरित कर दे।

(2) व्रत के दौरान आपको सिर्फ शाम को ही भोजन करना है लेकिन भोजन से पहले गणेश चालीसा और गणेश व्रत कथा का पाठ करें।

(3) शाम को सोने से पहले भगवान गणेश के मन्त्रो का जाप अवश्य करें।

(4) मंत्र जाप के उच्चारण के समय आपके मन में कोई अहम की भावना नहीं होनी चाहिए बल्कि सभी प्राणियों के लिए मन में कल्याण की भावना होनी चाहिए।

Ganesh Chaturthi Murti Sthapana गणेश चतुर्थी के व्रत से संबंधित पौराणिक कथा क्या है?

भगवान शिव और माता पार्वती एक बार चौपड़ खेल रही थी। चौपड़ खेलने के दौरान दोनों में यह विवाद हो गया कि हम दोनों की हार और जीत का फैसला करने वाला कोई है ही नहीं। इसके बाद माता पार्वती ने घास के तिनके से एक बालक में जान डाल दी और उसके अंदर प्राण प्रतिष्ठा भी डाल दी। चौपड़ का खेल प्रारंभ हो गया और फिर माता पार्वती ने पूछा कौन-कौन कितनी बार जीता है तो उस बालक ने कहा कि माता सबसे अधिक बार देवों के देव महादेव ने जीता है। बालक के इस जवाब को सुनकर के माता पार्वती दुखी हो गई और उस बालक को कीचड़ में रहने के लिए श्राप दे दिया। लेकिन उस बालक के करुणा भाव को देखकर के माता पार्वती ने कहा कि तुम्हारे श्राप का निवारण 1 वर्ष बाद होगा। 1 वर्ष बाद नागकन्या तुम्हें इसके निवारण के विषय में बताएंगी। उसके बाद माता पार्वती के कथनानुसार नागकन्या ने भगवान गणेश की व्रत रखने की विधि विधान बताएं और उसके बाद उस बालक ने उस विधि विधान का पालन करके भगवान गणेश को प्रसन्न कर लिया और उस कीचड़ से मुक्त हो गया और वह कैलाश में वास करने लगा यह लड़का कोई और नहीं अपितु भगवान गणेश के बड़े भ्राता कार्तिकेय हैं।

Ganesh Chaturthi Murti Sthapana

गणेश चतुर्थी का व्रत रखने के फायदे कौन-कौन से होते हैं?

(1) गणेश चतुर्थी का व्रत रखने से घर में आर्थिक संपन्नता आती है।

(2) गणेश चतुर्थी का व्रत रखने से गृह क्लेश दूर हो जाता है।

(3) भगवान गणेश बुद्धि के देवता जो भी श्रद्धालु श्रद्धा भाव से भगवान गणेश का गणेश चतुर्थी के दौरान व्रत रखता है तो उसे श्रद्धालु की बुद्धि भी तीक्ष्ण हो जाएगी।

(4) आपका कोई काम में यदि अड़चन आती है गणेश चतुर्थी का व्रत रखने से वह अड़चन दूर हो जाएगा।

निष्कर्ष:

Ganesh Chaturthi Murti Sthapana:- गणेश चतुर्थी का पर्व हिंदू अनुयायी के लिए बहुत ही विशेष पर्व है। इस पर्व में जो भी उपासक भगवान गणेश की उपासना करता है उसे मनोवांछित फल अवश्य प्राप्त होता है और साथ ही साथ भगवान गणेश की सदा कृपा बनी रहती है।

Faq:

(1) गणेश चतुर्थी के दौरान क्या होता है

जो भी श्रद्धालु गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा को अपने घर या पांडाल में स्थापित करते है पूरे विधि विधान के साथ तो उसे श्रद्धालु के जीवन में कभी भी कोई कष्ट नहीं आएगा वह जीवन भर एक सुखी जीवन व्यतीत कर पाएगा।

(2) हम सब गणेश चतुर्थी क्यों मनाते हैं

हम सब गणेश चतुर्थी इसलिए मानते हैं क्योंकि इसी दिन भगवान गणेश ने भारत का सबसे बड़ा महाकाव्य महाभारत को लिखना प्रारंभ किया था।

(3) गणेश चतुर्थी को कैसे मनाया जाता है

गणेश चतुर्थी मनाने के दौरान हम सब अपने घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करते हैं फिर उस प्रतिमा की पूजा अर्चना करते हैं और फिर नदी, तालाब या समुद्र में उसे प्रतिमा को विसर्जित कर देते हैं।

(4) गणेश चतुर्थी कब है

गणेश चतुर्थी 18 सितंबर 2023 को है।

(5) गणेश चतुर्थी वाले दिन क्या नहीं करना चाहिए

गणेश चतुर्थी वाले दिन चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए चंद्र दर्शन अपशकुन माना जाता है गणेश चतुर्थी के दौरान।

(6) गणेश चतुर्थी पर क्या ना करें?

गणेश चतुर्थी के समय भगवान गणेश को गलती से भी तुलसी ना चढ़ाएं और साथ ही साथ तामसिक भोजन जैसे लहसुन प्याज का सेवन नहीं करना है और मद्यपान का निषेध करना है।

(7) मैं भगवान गणेश को कैसे खुश कर सकता हूं?

भगवान गणेश की श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना करें और साथ ही साथ उनका प्रिय मोदक का भोग अवश्य लगाए।

(8) 10 दिनों तक क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी

10 दिनों तक गणेश चतुर्थी इसलिए मनाई जाती है क्योंकि भगवान गणेश ने हिंदू धर्म का सबसे बड़ा महाकाव्य महाभारत को गणेश चतुर्थी के दिन से लिखना प्रारंभ किया था और 10 दिन लगातार लिखा तब जाकर के महाभारत पूरा हुआ। इसीलिए 10 दिनों तक गणेश चतुर्थी मनाई जाती है।

(9) गणेश चतुर्थी के दिन क्या खरीदना चाहिए

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा को खरीदना चाहिए वह प्रतिमा ऐसी होनी चाहिए जिसमें भगवान गणेश बैठे हो ना कि खड़े हो।

(10) गणेश चतुर्थी का दूसरा नाम क्या है?

गणेश चतुर्थी का दूसरा नाम विनायक चतुर्थी या संकष्टी चतुर्थी है।

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