धनुष्कोड़ी गांव बबीता स्थल होने के साथ एक भयावह स्थल भी है

0
2118
dhanushkodi history in hindi

Dhanushkodi History in Hindi: धनुष्कोड़ी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक पवित्र स्थल है। पवित्र स्थल इसलिए है क्योंकि यहीं से भगवान श्रीराम ने श्रीलंका जाने के लिए सेतु का निर्माण प्रारंभ किया था। लेकिन कालांतर में यह पवित्र स्थल अब भूत पिशाच का डेरा बन चुका है। यहां पर साठ के दशक में एक हादसा हो गया था। जिसमें लगभग 115 लोगों की मृत्यु हो गई थी। जिसके परिणाम स्वरूप अब यहां के जो स्थानीय लोग थे। वह किसी अन्य स्थान पर जाकर बस गए हैं क्योंकि धनुष्कोड़ी स्थान अब रहने लायक स्थान बचा ही नहीं है। क्योंकि यहां पर से अजीबोगरीब आवाजे आती है। जिसके परिणाम स्वरूप कोई भी व्यक्ति जाने से बचता है। लेकिन प्रभु श्री राम की इस पवित्र भूमि से जो नाता है यदि कोई भी व्यक्ति धनुस्कोड़ी स्थान पर डर रहा है वह मन में प्रभु श्रीराम नाम का  जाप कर लेता है जिसके परिणाम स्वरूप उसके मन से सारे भय निकल जाते हैं। आज हम इसी धनुष्कोड़ी स्थान के विषय पर चर्चा करने वाले हैं कि यह स्थान क्यों प्रसिद्ध है साथ ही साथ इस स्थान पर कैसे जाया जाए आदि जानकारी इस लेख में दी जाएगी।

धनुष्कोड़ी का नाम धनुष्कोड़ी कैसे पड़ा?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम ने राम सेतु का निर्माण करने से पहले धनुष्कोड़ी के स्थान को अपने धनुष से इस स्थान को चिन्हित किया था। राम की सेना जब आसानी से सौ योजन के समुद्र को पार करके लंका पहुंच जाती है। तब भविशन के कहने पर राम भगवान ने अपने धनुष के सिरे से इस सेतु को ध्वस्त कर देते हैं जिसके परिणाम स्वरूप इस स्थान को धनुष्कोड़ी का नाम दिया गया।

धनुष्कोड़ी का भौगोलिक अवस्थिति क्या है?

धनुष्कोड़ी गांव तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम दीप के 15 किलोमीटर दूर स्थित पंबन द्वीप के पास धनुष्कोड़ी नामक स्थान पर स्थित है। यह साथ  दक्षिण पूर्वी क्षेत्रों में पड़ता है। यह भारत का अंतिम स्थान है यहां से श्रीलंका महज 31 किलोमीटर है। आपको स्पष्ट रूप से धनुषकोडी से श्रीलंका दिखाई देगा।

धनुष्कोड़ी गांव कैसे एक वीरान स्थल में बदल गया?

Dhanushkodi History in Hindi: धनुष्कोड़ी गांव में पहले चर्च, मंदिर, स्टेशन हुआ करता था। लेकिन 1964 में एक भयानक चक्रवात आया जिसके परिणाम स्वरूप मंदिर और बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन और हॉस्पिटल सब ध्वस्त हो गए हैं। यदि साक्ष्य के तौर पर कुछ बचे हुए हैं उनके कुछ जले हुए पत्थरों के अवशेष ही बचे हुए हैं और लगभग इस चक्रवात की चपेट में 115 लोगों की मृत्यु भी हो गई थी। क्योंकि धनुस्कोड़ी स्टेशन पर जो ट्रेन जा रही थी और चक्रवात आने के परिणाम स्वरुप वह ट्रेन भी उस चक्रवात की चपेट में आ गई। जिसके परिणाम स्वरूप यह गांव अब वीरान गांव हो गया है। लेकिन भारत सरकार फिर से इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रयासरत है। इसका कारण है यह स्थल पौराणिक है। ध्यान देने वाली बात यह है की यहां पर दिन के समय जाया जा सकता हैं। लेकिन जैसे पूरी रात हो जाता है। तब आपको वहां जाने से मना किया जाता है। रात्रि के समय  तरह-तरह की अजीब आवाजें आती है।

धनुष्कोड़ी गांव एक पवित्र स्थल क्यों है?

धनुष्कोड़ी गांव पवित्र स्थल इसलिए है क्योंकि यहां पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के चरण पड़े हुए हैं। जिसके परिणामस्वरूप यहां का पानी मीठा लगता है। आपने ध्यान दिया होगा कि समुद्र का पानी खारा लगता है। लेकिन इसके आसपास के क्षेत्र का पानी मीठा लगता है। इसका कारण है राम नाम की महिमा। इसके अलावा अधर्म पर धर्म की विजय के लिए यही सिंह नीव डाली गई थी अर्थात राम सेतु का निर्माण किया गया था। जिसके परिणाम स्वरूप अत्याचारी क्रूर और अहंकारी रावण का दमन करके श्री राम प्रभु ने माता सीता को रावण के कैद से आजाद कराया था। धनुष्कोड़ी गांव इसलिए पवित्र स्थल हो जाता है क्योंकि धनुषकोडी से 15 किलोमीटर दूर रामेश्वरम मंदिर है। रामेश्वरम मंदिर के निर्माण का श्रेय भगवान श्रीराम को दिया जाता है। क्योंकि भगवान श्रीराम ने ही रामसेतु के निर्माण के समय बालू की रेत से शिवलिंग का निर्माण किया था। जिसके परिणामस्वरूप राम की निष्काम भक्ति भावना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इस रेत से निर्मित शिवलिंग को एक कठोर शीला के रूप में बदल दिए।

धनुष्कोड़ी गांव घूमने के लिए कैसे जाएं?

1964 से पहले धनुष्कोड़ी गांव घूमना सरल था। लेकिन 1964 में आए चक्रवात के कारण वहां की रेल पटरी क्षतिग्रस्त हो गई है। जिसके परिणाम स्वरूप अब वहां पर रेल आवागमन की सुविधा नहीं है। यदि किसी यात्री को धनुष्कोड़ी गांव घूमने जाना है तो उस यात्री को रामेश्वरम से बस पकड़ना होगा या तो रामेश्वरम से अपना निजी वाहन बुक करना होगा। एक सर्वे के मुताबिक यहां पर लगभग प्रतिदिन पर्यटकों की संख्या 500 से लेकर की 600 के बीच में है लेकिन यहां त्यौहार और अमावस्या पर यह संख्या हजारों में होती है। ध्यातव्य है की सन 2003 में फिर से रेल पटरी का निर्माण के लिए एक प्रोजेक्ट पास किया गया था लेकिन नई सरकार बनने की परिणामस्वरूप इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

Dhanushkodi

निष्कर्ष:

Dhanushkodi History in Hindi: धनुष्कोड़ी गांव पवित्र स्थल इस संदर्भ में है क्योंकि इस स्थल पर प्रभु श्रीराम के चरण पड़े हुए हैं। जिसके परिणाम स्वरूप यहां पर श्री राम नाम से गुंजायमान हो रहा है। यदि आपको इस स्थल पर घूमने जाना है तो आप जाइए प्रभु श्री राम का नाम लेकर कोई भी समस्या नहीं होगी। बस आप पर्यटक के लिए जो नियम बनाए हैं उसका पालन करिए उस स्थान के लिए।

FAQ:

(1) धनुष्कोड़ी के नाम क्या है?

धनुष्कोड़ी के अन्य नाम धनुषकोडि और दनुषकोटी है।

(2) धनुष्कोड़ी गांव से श्रीलंका कितना दूर है?

धनुष्कोड़ी गांव से श्रीलंका 31 किलोमीटर दूर है।

(3) भारत के अंतिम सड़क कौन सा है?

भारत के अंतिम सड़क का नाम धनुष्कोड़ी सड़क है।

(4) धनुष्कोड़ी गांव में हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का पानी मिलने के बाद इसे वहां के स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता है?

धनुष्कोड़ी गांव में हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का पानी मिलने के बाद इसे तमिल भाषा में अरिचल मुनई कहते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here