बिहार के मर्चा धान को मिला जीआई टैग किसानों की हो गई अब तो बल्ले-बल्ले

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Bihar Marcha Paddy Gets Gi Tag Farmers

Bihar Marcha Paddy Gets Gi Tag Farmers:- बिहार के मगही पान जर्दालू आम और मिथिला के मखाना को जीआई टैग मिलने के बाद अब पश्चिमी चंपारण में अपनी सुगंधता से सबको आकर्षित करने वाले मरचा धान को भी जीआई टैग मिल चुका है। मरचा धान को जीआई टैग सेंट्रल गवर्नमेंट की इंस्टिट्यूटल बॉडी रजिस्ट्रार ऑफ़ चेन्नई जीआइ टैग की तरफ से एक वर्कशॉप में मरचा धान के उत्पादक समिति के सदस्य और अधिकारियों को इस जीआई टैग के सर्टिफिकेट को दिया गया।

मरचा धन को जीआई टैग क्यों मिला इसकी ऐसी क्या विशेषता है?:

(1) मरचा धान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह देखने में मसालो की रानी कहीं जाने वाली काली मिर्च की तरह दिखता है।

(2) मरचा धान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पौधा और धान के गुच्छे से एक विशेष प्रकार की सुगंध आती है जो सुगंध आती है वह सुगंध किसी अन्य धान की पौधे से नहीं आती है।

(3) मरचा धान का चूड़ा अपने अनूठे स्वाद के कारण वर्ल्ड फेमस है।

(4) मरचा धान की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर मिनिमम 20 कुंतल मैक्सिमम 25 क्विंटल है।

(5) मरचा धान की पकने की अवधि 130 दिनों से लेकर के 150 दिनों तक का है।

मरचा धान को लोकल लैंग्वेज में और किस-किस नाम से जाना जाता है?:

(1) काली मिर्च

(2) मिर्चा

(3) मर्चीया

(4) मारीचौ

(5) मचया

(6) मारीचि

Bihar Marcha Paddy Gets Gi Tag Farmers मरचा धान पश्चिमी चंपारण जिले के किस-किस स्थान पर होता है?:

(1) लौरिया

(2) रामनगर

(3) नरकटियागंज

(4) गौनाहा

(5) मैनाटांड़

(6) चनपटिया

जैविक सिस्टम से संभव है मरचा धान की खेती करना:

मरचा धान की खेती आप ऑर्गेनिक तरीके से भी कर सकते हैं आपको इसमें पेस्टिसाइड का यूज करने की आवश्यकता नहीं है। वहां के एक स्थानीय किसान रामलाल ने बताया कि जैविक सिस्टम से मर्चेंट धान की खेती करने पर 5 प्रतिशत से लेकर के 10% तक का प्रोडक्शन कम होता है लेकिन भले ही यह प्रोडक्शन कम है कम से कम या हमारे हेल्थ के लिए तो लाभकारी है।

मरचा धान से किसानों की आय में अच्छा खासा इजाफा हो रहा है:

चटपटिया के रहने वाले किशन कुशवाहा बताते हैं कि मरचा धान को उगाने में पैसा कम लगता है और जब फसल पक जाती है और मार्केट में बिकने के लिए तैयार हो जाती है तो यह धन आम धान की तुलना में तीन गुना महंगा ज्यादा बिकता है इससे हम सब की आय में आम धान की तुलना में 30 प्रतिशत ज्यादा पैसा मिलता है। किशन कुशवाहा की बातों को पुष्टि करने वाले नरकटियागंज, गौनाहा के किसानों ने भी बताया कि इससे हमारी गरीबी दूर हुई है।

मरचा धन को जीआई टैग हासिल होने से पहले किन-किन बिहार के कृषि उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है?:

(1) मगही पान

(2) जर्दालू आम

(3) मिथिला का मखाना

(4) भागलपुर का कतरनी चावल

(5) मुजफ्फरपुर का शाही लीची

Bihar Marcha Paddy Gets Gi Tag Farmers

मरचा धान को जीआइ टैग मिलने से किसानों को क्या लाभ मिलेगा?:

(1) मरचा धन को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी

(2) किसानों को मरचा धान का बेहतर दाम मिलेगा

(3) किसानों की आर्थिक तंगी दूर होगी

(4) मरचा धान को कानूनी रूप से प्रोटेक्शन मिलेगा।

मरचा धान को जीआई टैग प्रदान करने वाला जीआई क्या होता है?

जीआई का फूल फॉर्म ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (geographical indication) होता है। ज्योग्राफिकल इंडिकेशन उन्हें प्रोडक्ट को मिलता है जो अपने क्षेत्र से विशेषता रखते हैं। प्रोडक्ट भले ही एक हो लेकिन स्थान विशेष के परिवर्तन के कारण जो उसके रंग रूप, सुगंध और बनावट में परिवर्तन आता है इस परिवर्तन के कारण वह प्रोडक्ट किसी स्थान के लिए विशेष बन जाता है उसी के संरक्षण के लिए ज्योग्राफिकल इंडिकेशन का टैग दिया जाता है जिससे मार्केट में 10 वर्षों तक इनके प्रोडक्ट पर कोई भी जालसाजी न कर सके यह एक तरह का स्थान विशेष के लिए मोनोपोली होता है। जीआइ टैग हर वर्ष रजिस्ट्रार ऑफ चेन्नई की तरफ से दिया जाता है।

निष्कर्ष:

मरचा धान को जीआइ टैग मिलने से किसान की आय में वृद्धि हो सकती है और किसानों के लिए सबसे बड़ी हिट की बात यह है कि अब उनके प्रोडक्ट की कोई नकल नहीं कर पाएगा और इस तरह से मार्केट में उनका एकाधिकार स्थापित हो जाएगा।

Faq:

(1) जीआइ टैग का मुख्यालय कहां पर है?

जीआइ टैग का मुख्यालय चेन्नई में है।

(2) जीआई टैग की वैधता अवधि क्या है

जीआई टैग की वैधता अवधि 10 वर्ष है

(3) सर्वाधिक जीआई टैग वाला राज्य कौन सा है?

सर्वाधिक जीआई टैग वाला राज्य तमिलनाडु है। तमिलनाडु को 55 जीआइ टैग मिल चुके हैं।

(4) जीआई टैग कैसे दिया जाता है

भौगोलिक स्थिति और वस्तु की गुणवत्ता को देखते हुए जीआई टैग दिया जाता है।

(5) हस्तशिल्प के मामले में सबसे ज्यादा जीआई टैग किस राज्य को मिला है?:

हस्तशिल्प के मामले में सबसे ज्यादा जीआई टैग उत्तर प्रदेश को मिला है जिनकी संख्या 36 है।

(6) जीआई टैग पाने वाला भारत का पहला उत्पाद कौन सा है

जीआई टैग पाने वाला भारत का पहला उत्पाद दार्जिलिंग चाय है जिसे 2004 में जीआई टैग मिला। 

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