भगवान विष्णु की प्रथम पुरी नगरी अयोध्या

0
1668
Bhagwan Vishnu ki Pratham Puri Ayodhya

Bhagwan Vishnu ki Pratham Puri Ayodhya: अयोध्या त्रेता युग की एक न्याय और आधारभूत शासन की प्रणाली है। प्राचीन काल से ही अयोध्या में अनेकों महापुरुष जन्म लेते रहे हैं जैसे विष्णु के आठवें अवतार पुरुषोत्तम श्रीराम और जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का जन्म भी अयोध्या में हुआ था। अयोध्या महापुरुषों की जन्म भूमि के साथ-साथ कर्मभूमि भी है। श्री रामचंद्र ने अयोध्या में जन्म लेने के परिणाम स्वरूप यहां पर ही अपने अर्जित कर्म के परिणाम स्वरूप एक सुशासन का न्यू रखा जो अभी वर्तमान में गुड गवर्नेंस के नाम से जाना जाता है।

अब आइए जानते हैं कि प्रथम पुरी अयोध्या का इतिहास क्या है?

स्कंद पुराण के अनुसार अयोध्या नगरी को मनु ने ब्रह्मा के आशीर्वाद से और शिल्पकार विश्वकर्मा के सहयोग से अयोध्या नगरी को बसाया। अयोध्या नगरी में रघुवंशी और सूर्यवंशी और अंकिवर्मन नामक शासकों ने राज किया है। लेकिन अयोध्या विशेष तब हो जाता है जब अयोध्या में पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म होता है। जिससे अयोध्या की ख्याति और राज्यों में बढ़ जाती है। मनु ने अयोध्या को साकेत धाम भी कहा है क्योंकि जब ब्रह्मा से मनु ने एक नगर की इच्छा जाहिर की बसाने की तब उन्होंने सरयू नदी के तट पर स्थित स्थान लीलावती स्थान को ही चुना जो कालांतर में अयोध्या कहलाया।

अयोध्या को भगवान विष्णु का प्रथम पुरी क्यों कहा जाता है?

भारत में सप्तपुरियों में अयोध्या ,मथुरा ,हरिद्वार, काशी, कांची, उज्जैनी, द्वारका में सबसे पहले प्रथम पुरी की संज्ञा अयोध्या को इसलिए दिया जाता है क्योंकि अयोध्या में श्री हरि विष्णु ने जन्म लिया था। जिसके परिणाम स्वरूप इसे प्रथम पुरी की संज्ञा दी गई। अयोध्या नामक नगरी अपने आध्यात्मिक स्थल होने के कारण यह पूरे जगत में विख्यात है। जिसके परिणाम स्वरूप यहां विदेशों से और देश के कोने कोने से हर धर्म को मानने वाले श्री राम के दर्शन करने के लिए और उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रतिबध्द होने के लिए अयोध्या में अवश्य ही आते हैं। जिससे श्री राम का आशीर्वाद मिल सके और अपने जीवन को सही दिशा में चला सके।

Bhagwan Vishnu ki Pratham Puri Ayodhya

Bhagwan Vishnu ki Pratham Puri Ayodhya की विशेषता क्या है?

(1) अयोध्या प्रथम पुरी के लिए इसलिए विश्व विख्यात है। क्योंकि हिंदू धर्म को मानने वाले अनुयाई श्रीराम के दर्शनों के लिए जो दर्शनाभिलाषी हैं वह अयोध्या में पदयात्रा या मोटर वाहन के माध्यम से अवश्य ही दर्शन करने जाते हैं।

(2) मनु ने जब ब्रह्मा से यह इच्छा जाहिर की वह एक नगर बसाना चाहते हैं। तब उन्होंने विष्णु जी की सहायता से अवध नामक स्थान को चुना जिसे कालांतर में अयोध्या नाम दिया गया इस नगर को मनु ने बसाया था अपनी इच्छा से।

(3) स्कंद पुराण के अनुसार अयोध्या नगरी भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र पर बसी हुई है।

(4) अथर्ववेद में अयोध्या का सबसे पहले वर्णन मिलता है अथर्ववेद में अयोध्या के विषय में लिखा गया है कि  अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या।

(5) हिंदू धर्म के अलावा अयोध्या जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी बहुत ही प्रसिद्ध है क्योंकि यहां पर ही प्रथम तीर्थंकर ऋषभ नाथ का जन्म हुआ था और साथ ही साथ अजीतनाथ, अभिनंदननाथ और सुमित नाथ का भी जन्म हुआ था। श्रीमद् भागवत के स्कंद पुराण के अनुसार भारत जिसके नाम से भारत पड़ा उनकी राजधानी अयोध्या ही थी भारत के ही कुल में शांतनु और पितामह भीष्म और अर्जुन जैसे श्रेष्ठ धनुर्धर और कर्ण जैसे दानवीर पैदा हुए थे।

(6) अयोध्या के पास ही 20 बुद्ध विहार होने का वर्णन भी मिलता है। अयोध्या में बुध की प्रथम उपासना विशाखा रहती थी। ऐसा भी उल्लेख मिलता है कि इस बीस बौद्ध मठों में ही गौतम बुद्ध के दांत का अस्थि पंजर रखा हुआ है।

(7) अयोध्या नामक नगरी सिख धर्म के लिए भी किसी पवित्र स्थल से कम नहीं है। प्रथम गुरु नानक देव का तपस्थली भी अयोध्या है। गुरु नानक देव ने अयोध्या में स्थित ब्रह्म कुंड के पास रहकर के कठोर तप किया था जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

(8) अयोध्या में जब राम राज्य था। तब अयोध्या विश्व स्तर पर व्यापारिक केंद्र था। व्यापारिक केंद्र से आशय यह है कि यंहा पर अच्छे-अच्छे नस्ल के घोड़े और हाथियों का खरीद-फरोख्त होता था। ऐसा भी वर्णन मिलता है कि विंध्याचल और हिमालय के गजराज हाथियों की भी खरीद-फरोख्त होती थी अयोध्या में।

Bhagwan Vishnu ki Pratham Puri Ayodhya

(9) अयोध्या प्रथम पुरी के रूप में इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि यहां पर पर्यावरण को ध्यान में रखकर के राज्य की नीतियां बनाई जाती थी। ऐसा भी रामायण में वर्णन मिलता है कि अयोध्या के नगर के पास सुंदर-सुंदर उपवन बने हुए थे। जिसमें आम के वृक्ष लगे हुए थे। यह आम का वृक्ष अयोध्या की नगरी में चार चांद लगा देते थे। और इसके अलावा यह भी वर्णन मिलता है कि प्रतिदिन सड़कों पर जल छिड़काव होता था। जिससे धूल मिट्टी ना उड़े और नागरिकों को आवागमन में कोई असुविधा भी ना हो। इतना ही नहीं महाराज दशरथ ने अयोध्या की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए किले का भी निर्माण कराया था। रामराज्य में सब सुखी पूर्वक रहते थे उनके पास धन की कमी नहीं थी इंद्र की कृपा बनी रहती थी ऐसा प्रतीत होता था कि यही स्वर्ग है।

निष्कर्ष:

भगवान विष्णु की प्रथम पूरी अयोध्या अपने भव्य और आकर्षण से सैलानियों का मन मोह लेता है इतना ही नहीं यह एक धार्मिक और आध्यात्मिक राजनीतिक और व्यापारिक का केंद्र भी रहा है।

FAQ:

(1) अयोध्या का पुराना नाम क्या है?

अयोध्या का पुराना नाम साकेत है।

(2) अयोध्या में कितने भगवान का जन्म हुआ था?

अयोध्या में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री राम का जन्म हुआ था। इसके अलावा जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ का भी जन्म हुआ था और इतना ही नहीं अजीतनाथ ,सुमति नाथ और 14 तीर्थंकर अनंतनाथ का भी जन्म हुआ था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here