भगवान दत्तात्रेय के जीवन के रहस्य

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2008
Bhagwan Dattatreya ke Jivan ke Rahasya

यह तन विष की बेलरी गुरु अमृत की धार।

सीस दिए जो गुरु मिले तो भी सस्ता ज्ञान।।

Bhagwan Dattatreya ke Jivan ke Rahasya: कबीर दास की उपर्युक्त पंक्तियों के अनुसार गुरु ज्ञान का सागर है। यदि हम गुरु के चरणों में अपने शीश को अर्पण करके विद्या का अर्जन करते हैं। तब भी हम गुरु का मूल्य नहीं चुका सकते हैं  ऐसे ही गुरु हैं भगवान दत्तात्रेय जिन्होंने अपने जीवन में हर व्यक्ति से कुछ ना कुछ सीखा चाहे वह जीव जंतु ही क्यों ना हो। पुराणों के अनुसार भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु थे। जिनमें से अजगर, हवा, अग्नि और वृद्ध महिला प्रमुख गुरु थे। इन्होंने इन सब से कुछ न कुछ सीखा। जिससे जीवन में संतुलन को स्थापित किया जा सके। गुरु दत्तात्रेय ने समाज में जो अपना योगदान दिया है। वह योगदान अतुलनीय है। उसका वर्णन शब्दों में करना असंभव है क्योंकि इसका कारण यह है उनका योगदान बहुत दूरदर्शी है। जिसके अनुसार कोई भी व्यक्ति इनके बताए रास्ते पर चलकर के दुख से सुख की ओर अग्रसर हो सकता है अनासक्त से आसक्त की यात्रा कर सकता है और इसके अलावा अपने संचित कर्मों को संचयीमान कर्मों में बदल सकता है। यह सब शिक्षा गुरु दत्तात्रेय के जीवन चरित्र से सीखने को मिलता है। आज हम चर्चा करने वाले हैं गुरु दत्तात्रेय के जीवन से जुड़े कुछ रहस्य के विषयों में।

आईये हम जानते हैं कि भगवान दत्तात्रेय की जीवन के विषय में

भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा विष्णु और महेश के अवतार हैं अर्थात भगवान दत्तात्रेय के अंदर ब्रह्मा का अभियान से विष्णु कभी हमसे और महेश कभी हमसे भगवान दत्तात्रेय की माता का नाम सती अनसूया है और पिता का नाम ऋषि अत्री है ऋषि अत्री ब्रह्मा के मानस पुत्र में से एक हैं और इनका नाम सप्त ऋषि यों में भी आता है भगवान दत्तात्रेय के दो भाई और है जिनका नाम है ऋषि दुर्वासा और चंद्रमा भगवान दत्तात्रेय की 24 गुरु है जिनमें   है क्रमशः पृथ्वी ,जल,वायु, अग्नि,आकाश, सूर्य, चंद्रमा,समुद्र, अजगर, कपोत, पतंगा,मछली, हिरन,हाथी,मधुमक्खी,शहद निकालने वाला ,कुरर पक्षी,कुमारी कन्या, सर्प ,बालक,पिंगला वैश्या,बाण बनाने वाला,मकड़ी, भृंगी कीट भगवान दत्तात्रेय का कहना था कि शुद्ध ज्ञान वही है जिसमें व्यक्ति को आत्मज्ञान की प्राप्ति हो वही शुद्धि ज्ञान है। भगवान दत्तात्रेय की श्रीपाद महाराज और श्री समर्थ महाराज जैसे गुरु उनके अवतार कहे जाते हैं।

Bhagwan Dattatreya ke Jivan ke Rahasya

Bhagwan Dattatreya ke Jivan ke Rahasya कौन-कौन से हैं?

(1) भगवान दत्तात्रेय को विश्व का पहला सार्थक योगी गुरु माना जाता है।

(2) भगवान दत्तात्रेय ने चिकित्सा शास्त्र में पारद से व्योमयान में रिसर्च करके क्रांति ला दी।

(3) ब्रह्मा के मानस पुत्र ऋषि अत्रि भगवान दत्तात्रेय की पिता और कर्दम ऋषि की पुत्री सती अनुसुइया भगवान दत्तात्रेय की माता थी।

(4) श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार भगवान दत्तात्रेय के अंदर ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों प्रमुख देवताओं का अंश है।

(5) भगवान दत्तात्रेय के तीन मुख और 6 भुजाएं थी।

(6) उनके जन्म का उद्देश्य यह था कि जो वैष्णव संप्रदाय और शाक्त संप्रदाय और शैव संप्रदाय में जो विभेदता थी उस विभेदता को दूर करके समन्वय को स्थापित करना था।

(7) परशुराम और कार्तिकेय और कार्तिकेय वीर अर्जुन भगवान दत्तात्रेय के प्रमुख शिष्यों में से एक थे।

(8) भगवान दत्तात्रेय के विचार प्रकृति के ज्यादा नजदीक थे क्योंकि उन्होंने यह विचार प्रकट किया कि हर मनुष्य को प्रकृति में व्याप्त हर वस्तु या प्राणी जीव ,जंतु से कुछ ना कुछ जीवो के जो गुण हैं उसे ग्रहण करना चाहिए।

निष्कर्ष:

Bhagwan Dattatreya ke Jivan ke Rahasya भगवान दत्तात्रेय प्रकृति के बहुत ही नजदीक है। इनके विचार मानव और संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए कल्याणकारी है। अतः इनकी विचार को हर देश काल परिस्थिति में समावेशित किया जा सकता है।

FAQ:

(1) भगवान दत्तात्रेय की पत्नी का नाम क्या है

भगवान दत्तात्रेय की पत्नी का नाम श्रीमती लक्ष्मी है

(2) भगवान दत्तात्रेय किसके अवतार माने जाते हैं

भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा विष्णु और महेश के अवतार माने जाते हैं।

(3) भगवान दत्तात्रेय के कितने गुरु थे

भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु थे।

(4) भगवान दत्तात्रेय के पिता का नाम क्या है?

भगवान दत्तात्रेय की पिता का नाम ऋषि अत्रि है।

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