ऐसी टीटीई की कहानी जिसने भारत को एशियन गेम 2023 के 19वें संस्करण में स्वर्ण पदक दिलवाया

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Asian Games 2023

Asian Games 2023:- एशियन गेम 2023 के 19वें संस्करण में एक टीटीई ने गोल्ड मेडल दिलवा करके भारत का नाम ऊंचा कर दिया। 3 अक्टूबर 2023 का दिन पारूल चौधरी के लिए बहुत ही शुभ दिन था। उन्होंने 5000 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल लाकर के मेरठ का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया। जंहा बेटो को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है वही पारूल चौधरी ने इस भ्रम को तोड़ते हुए भारत के लिए 14वां गोल्ड मेडल दिलवाया। 5 अक्टूबर 2023 तक भारत ने कुल 86 पदक जीते हैं। जिनमें से 21 स्वर्ण पदक और 32 रजत पदक और 33 कांस्य पदक जीत ली है। 8 अक्टूबर को समाप्त होने एशियन खेल 2023 में भारत एशियन खेल 2018 की 18 वे संस्करण की अपेक्षा अच्छा परफॉर्मेंस किया है भारत ने 2018 में मात्र 70 पदक जीते थे जिनमें से 16 स्वर्ण पदक और 23 रजत पदक और 31 कांस्य पदक शामिल थे।

स्टीपल चेज में मेरठ की बेटी की कहानी

स्टीपल चेज में 15:52:23 समय मे मेरठ की बेटी ने जो अद्भुत प्रदर्शन किया है उसकी जितनी तारीफ की जाए उतनी ही काम है क्योंकि स्टीपल चेज करना बहुत ही कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें 28 प्रकार की बंधाओ को पार करना रहता है जिसमें से पांच प्रकार की बाधाएं सिर्फ वाटर से रिलेटेड रहते हैं लेकिन मेरठ की इस बेटी ने हार ना मानते हुए जो कारनामा किया वह प्रशंसा के काबिल है स्वर्ण पदक जीतने से पहले 3000 मीटर की रेस में रजत पदक भी जीता था इस तरह से वह एक ऐसी एथलीट बन गई है जिन्होंने एक गेम में दो पदक जीत दर्ज करने वाली पहली महिला है। मेरठ की बेटी की कहानी में दिलचस्प मोड़ यह भी है कि उन्होंने दोहा में आयोजित एशियन एथलेटिक चैंपियनशिप में भारत को कांस्य पदक दिलवाया था।

भारत को एशियान गेम 2023 के 19वें संस्करण में रजत पदक और स्वर्ण पदक जिताने वाली पारूल चौधरी के बारे में:

हांगझोऊ में आयोजित एशियन गेम 2023 का 19 वा संस्करण भारत के लिए सबसे सफल संस्करण रहा है। क्योंकि भारत में इसमें 5 अक्टूबर 2023 तक कुल 86 पदक हासिल कर लिया हैं। 86 पदक में से दो पदक पारूल चौधरी ने हासिल की है। पारूल चौधरी का जन्म 15 अगस्त 1995 को भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मेरठ जिले में हुआ था। पारूल चौधरी के पिता कृष्ण पाल सिंह एक किसान है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अपने आप को रख करके अपने बेटो और बेटियों को अच्छे मुकाम तक पहुंचाया। कृष्ण पाल सिंह के दो बेटे और दो बेटियां हैं बड़ा बेटा मेरठ के टायर फैक्ट्री में मैनेजर है और उनका छोटा बेटा उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत है और पारुल चौधरी की बड़ी बहन सीआईएसफ में है और स्वयं पारूल चौधरी भारतीय रेलवे में टीईटी के पद पर कार्यरत हैं। यदि एक शब्दों में कहा जाए तो पिता ने बुनियाद रखी और बेटो ने दीवाल खड़ी की और बेटियों ने उसे अंतिम शक्ल प्रदान की इस तरह से मेरठ की बेटी पारूल चौधरी ने भारत का नाम दो पदक जीत करके गौरांवित किया। अपनी बेटी के इस कारनामे पर इतना खुश हुए कि उन्होंने अपने गांव में मिठाई भी वितरित की।

स्वर्ण पदक विजेता पारूल चौधरी ने कैसे गांव से दौड़ लगा करके हांगझोऊ तक का सफर तय किया:

स्वर्ण पदक विजेता पारूल चौधरी ने सबसे पहले अपनी बड़ी बहन प्रीति चौधरी के साथ 1600 मीटर की रेस और 3000 मीटर की रेस में भाग लिया। लेकिन पारूल चौधरी जब दौड़ती थी ऐसा प्रतीत होता था जैसा कोई चीता 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रहा हो। बड़ी बहन उनसे हर बार कंपटीशन में हार जाती थी। जिसके बाद पारूल चौधरी के माता-पिता ने तय किया कि अब से प्रीति चौधरी 5000 मीटर की रेस में भाग लेंगी। उसके बाद पारूल चौधरी की कोई भी कंपीटीटर नहीं रही। उसके बाद दिन दूनी रात चौगुनी की रफ्तार से पारूल चौधरी दौड़ती रही। उन्होंने सिर्फ 28 वर्ष में जितने भी अंतरराष्ट्रीय खेलों में भाग लिया उनमें उन्होंने पदक दिलाया सिर्फ एथलेटिक्स चैंपियनशिप को छोड़कर के।

Asian Games 2023

Asian Games 2023 स्वर्ण पदक विजेता पारूल चौधरी को जिताने में सबसे बड़ा योगदान स्टेट अथॉरिटी ऑफ इंडिया का है

वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नियम पास की है कि इस नियम के अनुसार उत्तर प्रदेश के जितने भी एथलीट एशियन गेम और ओलंपिक और विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप और वर्ल्ड कप में मेडल लाते हैं उन्हें उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास, माध्यमिक शिक्षा, बुनियादी शिक्षा आदि जैसे डिपार्टमेंट में उनको नौकरी दिया जाएगा। जिससे उनको भविष्य में कम से कम यह भरोसा मिल जाएगा कि यदि मैं पदक जीतती हूं या जीतता हूँ तो मेरा भविष्य संवर जाएगा क्योंकि उनको नौकरी मिल जाएगी आजीविका का चलाने के लिए। लोग सिर्फ पदक तक ध्यान रखते हैं जीतने वाले को उसके बाद भूल जाते हैं। इसीलिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 पद खिलाड़ियों के लिए रिजर्व कर दिया है। लेकिन इसके साथ ही स्पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तर्ज पर बनी स्टेट अथॉरिटी ऑफ इंडिया भी उत्तर प्रदेश के एथलीट के लिए एक बुनियाद बना रही है जिससे खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में प्रॉब्लम न हो सके। स्टेट अथॉरिटी ऑफ इंडिया निम्नलिखित कामों को कर रहा है

(1) विभिन्न खेलों को टाइम टाइम के अनुसार अपग्रेड करना

(2) स्पोर्ट डेवलपमेंट फंड की स्थापना

(3) पांच हाई परफार्मेंस केंद्र की स्थापना

(4) उन्नत किस्म की टेक्नोलॉजी से लैस हॉस्पिटल की व्यवस्था।

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