एशिया का क्लीन विलेज

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Asia Cleanest Village

एशिया महाद्वीप का सबसे स्वच्छ गांव का दर्जा हासिल कर चुका मायलिनोंग गांव, जाने अद्भुत बातें

Asia Cleanest Village: क्या आप जानते हैं भारत का सबसे स्वच्छ गांव और पूरे एशिया महाद्वीप का भी स्वच्छ गांव का दर्जा हासिल कर चुका मायलिनोंग गांव के बारे में। यह गांव सनसनीखेज में आए दिन रहता है। इसका कारण है, यहां के लोगों के अंदर पर्यावरण के प्रति जागरूक रहना। इस गांव की विशेषता यह है कि यहां के लोग कचरे को बांस से बने डस्टबिन में डाल देते हैं। इसीलिए सन 2003 में ट्रेबल पत्रिका डिस्कवर इंडिया ने इसे एशिया का सबसे स्वच्छ गांव का दर्जा दिया। ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में हर वर्ष 5800000 टन कचरे का उत्पादन होता है। लेकिन कचरे का निस्तारण नहीं हो पाता है। शेष भारत वासियों को मेघालय में स्थित मायलिनोंग गांव से सीख लेनी चाहिए।

मायलिनोंग गांव के भौगोलिक अवस्थिति के बारे में:

मायलिनोंग गांव भारत के मेघालय राज्य के पूर्व खासी हिल्स जिले में पड़ता है। 2011 की जनगणना के अनुसार इस गांव की कुल जनसंख्या 414 है और इस गांव की साक्षरता दर सौ परसेंट है अर्थात इस गांव के हर सदस्य पढ़ना लिखना जानते हैं।

मायलिनोंग गांव इन सख्त और कड़े नियमों को अपना करके बना एशिया का सबसे स्वच्छ गांव:

(1) इस गांव ने महामारी पर विजय प्राप्त की थी। अब आपके मन में प्रश्न उठ रहा होगा की किस महामारी की बात हो रही है तो आपको बता दूँ कि सन 1988 से इस गांव में हर वर्ष महामारी की वजह से बहुत सारे बच्चे मृत्यु को प्राप्त हो जाते थे। रिशोत खोंगथोरम नाम के एक शिक्षक ने गांव से महामारी का अंत करने के लिए गांव में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जन जागरूकता कार्यक्रम चलाया जिसके परिणाम स्वरूप यह गांव एशिया का सबसे स्वच्छ गांव बना और भारत का भी।

(2) इस गांव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस गांव को स्वच्छ भारत अभियान के तहत ओडीएफ प्लस- प्लस का दर्जा दिया जा चुका है। आज के समय में इस गांव में लगभग हर घर में टॉयलेट है घर के कचरे को एकत्र करके बांस से बने डस्टबिन में डालते हैं।

(3) मायलिनोंग गांव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पालतू पशुओं और किसी अन्य गांव से प्रवास करके आए आवारा पशुओं को बांध कर रखते हैं।

(4) इस गांव में सिंगल यूज़ प्लास्टिक का यूज़ करना प्रतिबंधित है इसके अलावा जिस प्लास्टिक को रिसाइकिल नहीं किया जा सकता है उसका भी यूज़ करना रिस्ट्रिक्शन है।

(5) गांव की हवा को स्वच्छ रखने के लिए स्मोकिंग अर्थात बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, गुटका, पान इत्यादि हानिकारक पदार्थों का सेवन करना वर्जित है। सिगरेट तंबाकू का सेवन करते हुए कोई पुरुष या महिला पकड़ी जाती है तो उस पर गांव की तरफ से जुर्माना लगाया जाता है।

मायलिनोंग गांव की यह विशेषता मजबूर कर देती है पर्यटकों को यहां आने के लिए:

(1) यदि आप भारत में रह करके बांग्लादेश का दीदार करना चाहते हैं तो आप मायलिनोंग गांव जाइए। इस गांव में 75 फीट बांस से बना टावर है। जिस पर आप खड़े होकर के बांग्लादेश को देख सकते हैं। इसके अलावा यहां पर स्काईव्यू है जो मेघालय के खूबसूरत स्थानों में से एक है। यह गांव अपने प्राकृतिक सौंदर्य के कारण आए दिन सुर्खियों में बना रहता है। इस गांव को जंगल का स्वर्ग भी कहा जाता है। यह चारों तरफ से तरह-तरह के पेड़ और फूल और वनस्पतियों से घिरा हुआ है।

(2) यदि आप परंपरागत मसाले से तैयार भोजन करना चाहते हैं तो आप मायलिनोंग गांव जाइए जहां पर आपको शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार का फ़ूड मिल जाएगा। फ़ूड को तैयार करने के लिए कोई बाहर का मसाला यूज़ नहीं किया जाता है। बल्कि यहां का परंपरागत मसाला जैसे बांस की पत्तियां और कई तरह के स्थानीय घास भी यूज़ किया जाता है।

मायलिनोंग गांव कैसे पहुंचे?:

(1) सड़क मार्ग के द्वारा-

यदि आप सड़क मार्ग से इस गांव में पहुंचना चाहते हैं तो उसके लिए आप शिलांग या चेरापूंजी से बस पकड़ करके इस गांव में पहुंच सकते हैं।

(2) हवाई मार्ग के द्वारा-

यदि कोई पर्यटक हवाई मार्ग से आना चाहता है तो उसको बताना चाहता हूं कि मायलिनोंग गांव का सबसे निकटतम एयरपोर्ट शिलांग है जो इस गांव से 78 किलोमीटर दूर है।

(3) रेल मार्ग के द्वारा

रेल मार्ग के द्वारा जो पर्यटक मायलिनोंग गांव पहुंचना चाहते हैं तो उनको बताना चाहता हूं कि इस गांव की सबसे नियर बाय रेलवे स्टेशन गुवाहाटी रेलवे स्टेशन है जो इस गांव से लगभग 172 किलोमीटर दूर है।

निष्कर्ष:

Asia Cleanest Village: मायलिनोंग गांव एक ऐसा गांव है जहां का वातावरण शुद्ध है और स्थानीय खाद्य पदार्थों को संरक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।

Faq:

(1)क्या मावलिननॉन्ग गांव घूमने लायक है?

मावलिननॉन्ग गांव प्रकृति की सौंदर्य को प्रकट करता है। आप इस गांव में जब आएंगे तो आपको एहसास होगा कि प्रकृति का अनूठा सौंदर्य क्या होता है? जिसमें आप पूरी तरह डूब जाएंगे।

(2)सबसे स्वच्छ गांव कौन सा है?

मावलिननॉन्ग गांव भारत का सबसे स्वच्छ गांव ही नहीं केवल अपितु एशिया का सबसे स्वच्छ गांव है।

(3)मावलिननॉन्ग को देवताओं का अपना बगीचा क्यों कहा जाता है?

मावलिननॉन्ग गांव को देवताओं का बगीचा इसलिए कहा जाता है क्योंकि गांव के अद्भुत व्यक्तियों के कारण यहां पर प्रकृति का मनोरम सुंदरता है

(4)मावलिननॉन्ग सबसे साफ गांव क्यों है?

मावलिननॉन्ग गांव सबसे स्वच्छ गांव इसलिए है क्योंकि यहां पर प्लास्टिक का यूज़ नहीं होता है और स्मोकिंग पर रिस्ट्रिक्शन है।

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