भारत में गोल्डन शावर ट्री के नाम से प्रसिद्ध जानिए अमलतास के फूल के फायदे के बारे में

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Amaltas ke Phool ke Fayde

Amaltas ke Phool ke Fayde: अमलतास एक ऐसा फूल है जिसके खिलने से भारत में बारिश होती है। यह कोई अफलातूनी बात नहीं है अपितु यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चुका है की इस फूल के खिलने के बाद लगभग 45 दिनों के बाद भारत में बारिश होने लगती है। इसीलिए इसे गोल्डन शावर ट्री और इंडियन रेन इंडिकेटर के नाम से भी जाना जाता है। इस वृक्ष की पुष्प से लेकर फल और छाल तक सभी स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से लाभप्रद होते हैं जो शरीर में होने वाले अनेकों विकारों से शरीर की रक्षा करते हैं। यह वृक्ष है अपने आप में बहुत ही विशिष्ट है इसके लाभ ऐसे हैं जो और वृक्ष की अपेक्षा इसे अनूठा बनाते हैं।

गोल्डन शॉवर ट्री के नाम से फेमस  अमलतास क्या है?

अमलतास का वृक्ष मैग्नोलिफ़ायता के विभाग से संबंधित वृक्ष है। अमलतास के वृक्ष लगभग लगभग भारत के हर राज्य में मिलता है इस वृक्ष की विशेषताएं होती है कि यह वृक्ष बसंत ऋतु में अपने पत्ते गिरा देते हैं और नए पत्ते के साथ पीले -पीले रंगों के फूल के साथ फिर से अप्रैल और मई के महीने में हरे भरे हो जाते हैं। यदि आप इस वृक्ष को दूर से देखेंगे तो आश्चर्यचकित हो जाएंगे क्योंकि दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है जैसे पृथ्वी की सुंदरता का केंद्र यही स्थान हो। कई प्रदेशों में इस फूल के खिलने के साथ ही यह अनुमान लगाया जाता है कि इतने दिनों के बाद बारिश होगी अर्थात 45 दिनों के बाद बारिश होगी।

अमलतास के फुल में कौन- कौन सा गुड़ पाया जाता है ?

(1) एंटी इन्फ्लेमेटरी

(2) एंटी हेयर फॉल

(3) एंटीमाइक्रोबॉयल

(4) एंटीबैक्टीरियल

(5) एंटी डायबिटीज

अमलतास वृक्ष को अन्य भाषा में किस – किस नाम से जाना जाता है?

भाषानाम
हिंदीअमलतास
संस्कृतव्याधिघात
 नृप्रद्रुम
आरग्वध
गुजरातीगरमाष्ठो
मराठीबहावा
कर्णिकार
बंगालीसोनालू

Amaltas ke Phool ke Fayde क्या -क्या होते हैं?

(1) कब्ज से राहत

भारत में 22% व्यक्ति कब्ज के रोग से पीड़ित हैं अर्थात हर 100 व्यक्ति में से 22 व्यक्ति कब्ज की समस्या से परेशान है। कब्ज ऐसी बीमारी होती है जो पेट से संबंधित होती है। मल का त्याग करने में व्यवधान उत्पन्न करता है। यदि आपको इस समस्या से छुटकारा चाहिए तब आप अमलतास के फूल को एक कटोरी में भिगो दीजिए और सुबह मिक्सर का उपयोग करके इसका पेस्ट बना लीजिए और इस पेस्ट का उपयोग करिए इससे आपको हंड्रेड परसेंट कब्ज से राहत मिलेगी।

Amaltas ke Phool ke Fayde

(2) दाद और खुजली जैसे रोगों में भी लाभप्रद है

वर्षा ऋतु के आगमन के परिणाम स्वरूप बहुत सारे व्यक्तियों को दाद और खुजली जलन और रेशेज की प्रॉब्लम को फेस करना पड़ता है। यदि आप इस प्रॉब्लम को फेश करने से बचना चाहते हैं। तब आप अमलतास के फूल को पीसकर के पेस्ट बना लें। पेस्ट बनाने के बाद उसमें दो-तीन चुटकी हल्दी का पाउडर मिलाएं और उस पेस्ट को दाद और खुजली के स्थान पर लगाएं। इससे आपको 4 या 5 दिन के अंदर सुधार दिखने लगेगा।

(3) वायरल फीवर को भी ठीक करने में लाभप्रद है

मौसम परिवर्तन के साथ वायरल फीवर भी हर घर में आ धमकता है। जिससे बहुत सारे व्यक्ति इसकी चपेट में आ जाते हैं। चपेट में आने के परिणाम स्वरूप उनको बुखार, सर्दी, जुकाम और तरह -तरह की समस्याएं होने लगती है। इस समस्या से बचने के एक उपाय यह है कि आप रात को सोते समय दूध में अमलतास के फूल को मिला दीजिए और उसमें आधा चम्मच शहद मिलाइए और उस दूध का सेवन करें। इससे आपकी immune सिस्टम स्ट्रांग होगा और आपको वायरल भी फिर नहीं होगा।

(4) बाल को झड़ने से रोकने में भी सहायक है

अमलतास के फूल में एंटी हेयर फॉल का गुण पाया जाता है। भारत में लगभग 100 व्यक्ति में से 75 व्यक्ति हेयर फॉल की प्रॉब्लम से परेशान है। इस परेशानी का कारण यह है कि हमारा व्यस्त दिनचर्या और लाइफस्टाइल। जिससे असमय ही हमारे बाल झड़ने लगते हैं। यदि इस समस्या से बचना है तब आप अमलतास के फूलों को उबालकर के उसके रस को बालों में लगाएं। इससे कुछ हद तक बाल गिरने की समस्या से निजात पाया जा सकता है।

Amaltas ke Phool ke Fayde

अमलतास के फूल के नुकसान क्या-क्या है?

अमलतास के फूलों का कोई नुकसान नहीं है। इसका कारण यह है कि यह एक आयुर्वेदिक दवा है और आयुर्वेदिक दवा का कोई भी नुकसान नहीं होता है। हालांकि इसका उपयोग यदि आप किसी रोग विशेष के लिए कर रहे हैं तब आप किसी प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य से इस विषय में परामर्श कर ले। तब इसके बाद ही उपयोग करें।

अमलतास के फूल को उपयोग करने से पहले सावधानियां क्या बरतनी है?

(1) गर्भवती महिला को अमलतास के फूल को उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर या एलोपैथिक डॉक्टर से अवश्य परामर्श करने तब उसके बाद ही उपयोग करें।

(2) जिस व्यक्ति की स्किन ज्यादा सेंसिटिव है उसको अमलतास के फूल का उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर से विचार-विमर्श कर लेना चाहिए तब उसके बाद ही उपयोग करना चाहिए।

निष्कर्ष:

भारत में अमलतास का वृक्ष गोल्डन शावर ट्री के नाम से प्रसिद्ध है। इस गोल्डन शावर ट्री के फूल भी हमारे शरीर में होने वाली बीमारियों से हमें रक्षा प्रदान करते है।

FAQ:

(1) अमलतास के फूल क्यों नहीं तोड़े जाते?

अमलतास के फूल इसलिए नहीं तोड़े जाते हैं क्योंकि इसमें कांटे पाए जाते हैं।

(2) अमलतास के फूल किस महीने में आते हैं?

अमलतास के फूल अप्रैल महीने से लेकर के मई महीने तक आते हैं।

(3) अमलतास ट्री को गोल्डन शावर ट्री या इंडियन रेन इंडिकेटर ट्री के नाम से क्यों जाना जाता है?

अमलतास ट्री को गोल्डन शावर ट्री या इंडियन रेन इंडिकेटर ट्री के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसके फूल के खिलने के 45 दिन के बाद भारत में बारिश होती है।

(4) अमलतास ट्री का वैज्ञानिक नाम क्या है?

अमलतास ट्री का वैज्ञानिक नाम कैसिया फिस्टरूला है।

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