अचलगढ़ का किला पर्यटक स्थल होने के साथ-साथ एक तीर्थ स्थल भी है

0
1964
Achalgarh Kile Ka Itihas

Achalgarh Kile Ka Itihas: यदि आप भारतीय सभ्यता और विरासत को देखना चाहते हैं। तब आप राजस्थान जाइए। राजस्थान में आपको राजपूतों द्वारा निर्मित दुर्ग और किले देखने को मिल जाएंगे। जो यह दर्शाते हैं कि राजपूत अपनी सुरक्षा के प्रति कितना सजग रहते थे और उनके किले पर निर्मित देवी देवताओं की प्रतिमाएं यह प्रमाणित करते हैं कि राजपूतों की आस्था हिंदू धर्म के प्रति थी जो युद्ध से पहले उनका आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करते थे। आज हम एक ऐसे किले के विषय में चर्चा करने वाले हैं जिसका नाम अचलगढ़ का किला । अचलगढ़ का किला गुजरात के मुस्लिम शासक महमूद शाह बेगड़ा जैसे आताताई के आक्रमण को भी झेला है और कुतुबशाह ओली जिसने हैदराबाद के किले का निर्माण करवाया था उसने भी अचलगढ़ के किले में स्थित मंदिर को नष्ट किया था। लेकिन समय-समय पर राजपूत शासकों ने नष्ट हुए भाग को पुनः पुनर्निर्माण किया। लेकिन आप यह नहीं जानते कि हमारी सभ्यता कि यदि आपको अमित मिसाल देखनी है तो एक बार आप अचलगढ़ का किला अवश्य देखिए यह परमार शासकों की सौगात है।

Achalgarh Kile Ka Itihas क्या है?

अचलगढ़ के दुर्ग का इतिहास बहुत पुराना है अर्थात परमार शासकों ने अपने आराध्य अचलेश्वर शिव की विशेष अनुकंपा पाने के लिए 900 ईसवी में इसका निर्माण करवाया था। यह दुर्ग भगवान शिव अचलेश्वर को समर्पित है। इसीलिए इस दुर्ग का नाम पर  अचलगढ़ रखा गया। अचलगढ़ के किले से एक शिलालेख मिला है उस शिलालेख में परमार शासकों के इतिहास के विषय में हमें जानकारी मिलती है कि प्रमाण शासकों ने कैसे जनता के प्रति स्नेही और वात्सल्य के भाव से अभिभूत किया और कैसे वीरता पूर्वक मुस्लिम शासकों से बिना किसी भय से युद्ध किया। इन सबकी गाथा आपको अचलगढ़ के शिलालेख में देखने को मिल जाएगी। इतना ही नहीं अचलगढ़ के किले में आपको काशीनाथ का मंदिर का भी दर्शन हो जाएगा अर्थात जो वाराणसी के मंदिर से प्रभावित है। युद्ध के परिणाम स्वरूप ध्वंश हुए भाग को 1452 ईस्वी में महाराणा कुंभा ने इसका जीर्णोद्धार किया। जीर्णोद्धार करने के परिणाम स्वरूप इसके प्राचीर पर हनुमान जी और गणेश जी की प्रतिमाओं को स्थापित करवाया गया। इस किले का निर्माण का उद्देश्य यह था कि समकालीन गुजराती शासकों से अचलगढ़ की जनता की सुरक्षा करना।

अचलगढ़ किले की विशेषता क्या -क्या है?

(1) अचलगढ़ किले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके प्राचीर पर हनुमानपोल और गणेशपोल की प्रतिमाएं स्थापित है।

(2) अचलगढ़ किले के पास ही कपूर सागर जलाशय हैं जिसका उपयोग खेतों की सिंचाई करने और जल को संग्रहण करने और पीने योग्य जल की पूर्ति करना था।

(3) किले के अन्य प्रवेश द्वार पर आपको चंपापोल और भैरवपोल की प्रतिमाएं देखने को मिल जाएगी।

(4) अचल गढ़ के किले के अंदर प्रवेश करने के बाद आपको महाराणा कुंभा के राजप्रसाद का दृश्य देखने को मिलेगा।

(5) महाराणा कुंभा की अर्धांगिनी ओखा रानी का महल भी अचलगढ़ किले के अंदर स्थित है।

(6) अचलगढ़ किले की एक विशेष बात यह है कि वहां पर आपको अनाज के कोठे भी दिख जाएंगे अर्थात अचलगढ़ में जो अनाज उत्पादन होता था उसको कैसे सुरक्षित रखा जाता था इन सब की जानकारी आपको अनाज के कोठे देखने के बाद मिल जाएगी।

(7) अचलगढ़ की किले की सुरक्षा करने के लिए जो सैनिक चौकशी करते थे उन सैनिकों का आवास गृह भी  अचलगढ़ किले के अंदर ही स्थित है।

(8) अचलगढ़ के किले में पानी को प्रिजर्व करने के लिए आपको बड़ी बड़ी टंकी भी देखने को मिल जाएंगे जिससे आपको उस समय इतिहास के विषय में यह जानकारी मिल जाएगी की अचलगढ़ के लोग अपने प्रतिदिन की दिनचर्या में कपड़े धोने और पीने के लिए पानी कहां से लाते थे।

(9) परमार शासकों को खतरों से अवगत कराने वाला बुर्ज का अवशेष भी देखने को मिल जाएगा।

Achalgarh Kile Ka Itihas

अचलगढ़ किले की स्थापत्य कला क्या है?

अचलगढ़ किले की स्थापत्य कला के विषय में बात करें तो इसके स्थापत्य कला में आपको नागर शैली देखने को मिल जाएगा अर्थात इसके प्राचीर पर जो हनुमानपोल की प्रतिमाएं बनी है। वह प्रतिमाएं ग्रेनाइट की बनी हुई है और इसके अलावा आप इसके दूसरे पोल चंपापुर की ओर जब चढ़ाई करेंगे तो वह भी ग्रेनाइट और बेसाल्ट चट्टानों का निर्मित स्वरूप है अर्थात एक किले की जो विशेषता होनी चाहिए वह उन विशेषताओं से युक्त है सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी और अनाजों का बफर स्टॉक पानी का जलाशय आदि सुविधाएं अचलगढ़ किले की स्थापत्य कला को बहुमूल्य बनाते हैं।

अचलगढ़ के किले की भौगोलिक अवस्थिति क्या है?

परमार शासकों द्वारा निर्मित अचलगढ़ का किला भारत के राजस्थान राज्य के सिरोही जिले के आबू नामक स्थान पर स्थित है,अचलगढ़ का किला। इसका निर्माण परमार शासकों ने करवाया था लेकिन इसका जीर्णोद्धार महाराणा कुंभा ने करवाया था।

जो भी टूरिस्ट अचलगढ़ के किले को देखने के लिए जाना चाहते हैं वह जाने से पहले अचलगढ़ के किले कि बंद होने और खुलने का समय जान ले उसके बाद ही जाएं

अचलगढ़ का किला सुबह 10:00  बजे से सैलानियों के लिए खुलता है और शाम को 5:00 बजे सूर्यास्त होने के बाद बंद हो जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सन 2020 से जब से पूरे विश्व में कोरोनावायरस आया है तब से आपको यदि अचलगढ़ का किला जाना है देखने तब इसके लिए आप सैनिटाइजर और सर्जिकल मास्क लगाकर ही जाइए चेहरे पर अन्यथा आप को अंदर नहीं जाने दिया जाएगा।

अचलगढ़ के किले में जाने के बाद आपको क्या- क्या देखने को मिलेगा?

(1) यदि आप भगवान शिव के भक्त हैं तब आपके लिए बहुत अच्छी बात है क्योंकि भगवान शिव की हजार वर्ष पुरानी मंदिर अचलेश्वर मंदिर देखने को आपको मिल जाएगा। इस मंदिर को देखने के बाद मन में यही प्रश्न उठता है कि इस मंदिर में इतना आकर्षण क्यों है जो मन को लुभा ले रहा है।

(2) भगवान शिव की सवारी या अनन्य भक्त नंदी का भी दृश्य देखने को मिल जाएगा नंदी की जो प्रतिमा है वह प्रतिमा पांच धातुओं को मिलाकर बनाई गई है। यह पंच धातुओं से निर्मित प्रतिमा आभा सैलानियों को दूर से ही आकर्षित करती है।

(3) अचलगढ़ के किले में जैन मंदिर भी है वह भी 500 साल से पुराना मंदिर है। इस मंदिर की भव्यता को जो एक बार देख लेता है उसकी प्रशंसा किए बिना रह नहीं पाता है।

(4) अचलगढ़ के किले में ही काली माता का विशाल मंदिर है यदि आप काली माता के भक्त हैं तब आपके लिए अचलगढ़ के किले में जाना पैसा वसूल है।

(5) अचलगढ़ के किले में मंदाकिनी झील भी है जो उस समय जल आपूर्ति का साधन होने के साथ-साथ सिंचाई का भी केंद्र हुआ करता था।

अचलगढ़ के किले को देखने के लिए कौन सा मौसम सबसे उत्तम है?

यदि आप एक टूरिस्टर हैं और अचलगढ़ के किले को देखने के लिए योजना बना रहे हैं तब आपको अक्टूबर महीने से लेकर के मार्च के महीने के बीच में आने वाले महीने जैसे नवंबर -दिसंबर जनवरी-फरवरी में ही जाना चाहिए क्योंकि अचल गढ़ के किले का औसत तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रहता है अर्थात गर्मी बहुत पड़ती है ध्यान देने वाली बात यह है कि आपको भूल कर के भी वर्षा ऋतु में नहीं जाना है क्योंकि वर्षा ऋतु में वर्षा बहुत होती है।

निष्कर्ष:

अचल गढ़ का किला हिंदू धर्म के अनुयायियों के साथ साथ जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल होने के साथ-साथ एक तीर्थ स्थल भी है।

FAQ:

(1) अचलगढ़ का दुर्ग कौन से जिले में स्थित है?

अचलगढ़ दुर्ग राजस्थान राज्य के सिरोही नामक जिले में स्थित है।

(2) अचलगढ़ का किला किसने बनवाया था?

अचलगढ़ का किला 900 ईस्वी में परमार के शासकों द्वारा निर्मित करवाया गया था।

(3) अचलगढ़ के किला का पुनर्निर्माण किस शासक ने करवाया था?

अचलगढ़ के किले का पुनर्निर्माण महाराणा कुंभा ने 1452 ईस्वी में करवाया था।

(4) अचलगढ़ दुर्ग की लंबाई कितनी है?

अचलगढ़ की दुर्ग की चोटी की लंबाई 1431 मीटर है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here