पितृसत्तात्मक समाज पर चोट करती बॉलीवुड की 8 मूवी महिलाएं जरूर देखें

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पितृसत्तात्मक समाज पर चोट करती बॉलीवुड की 8 मूवी महिलाएं जरूर देखें

मूवी हमारे समाज का आईना है। समाज में महिलाओं के प्रति जो मानसिक हिंसा और यौन हिंसा होती है। उन हिंसाओं से रूबरू कराने के लिए बॉलीवुड में ऐसी कई मूवी बनी है जो यह संदेश देती है कि हमारे पुरुष समाज में महिलाएं सिर्फ एक वस्तु बन के रह गई है। यह हमारा पुरुष समाज महिलाओं का कोई भी सम्मान नहीं करता है सिर्फ महिलाओं को कंज्यूमर प्रोडक्ट समझता है।

लेकिन बॉलीवुड की कुछ मूवी है जो पुरुष समाज का महिलाओं के प्रति लेकर के नजरिया है उसको दिखाया है कि महिलाएं यह देखकर सीख सके कि हमारे प्रति जो पुरुष समाज करता आया है वह अमानवीय भी है और साथ ही साथ अधिकारों से वंचित करता भी आया है।

कई महिलाएं अपने अधिकार को जानती ही नहीं है कि उनका अधिकार क्या है?एक मानव का अधिकार क्या है उन्हें अधिकारों से रूबरू कराती है बॉलीवुड ये 8 मूवी जो महिला को दिशा बताती है और साथ ही साथ दशा को सुधारने में अपने सुझाव भी देती है और परिणाम भी बताती है।

 फेमस डायरेक्टर इम्तियाज अली द्वारा डायरेक्ट की गई ‘फिल्म हाईवे’-

हमारे पड़ोस में बहुत सारे व्यक्ति ऐसे रहते हैं जो लड़कियों के इनोसेंट का फायदा उठाने लगते हैं और इसी के बेस पर हरासमेंट भी करते हैं। लेकिन लड़कियों को यह पता ही नहीं रहता है कि उनके साथ हरासमेंट हो रहा है क्योंकि हमारे समाज का स्ट्रक्चर ही ऐसा बना हुआ है इसी से पर्दा उठाते हुए इम्तियाज अली ने फिल्म हाईवे बनाई है। इस मूवी ने महिलाओं के प्रति हो रहे काले- चिट्ठे को खोल करके रख दिया है। इस मूवी में मुख्य रोल में एक्टर रणदीप हुड्डा और एक्ट्रेस आलिया भट्ट है।

लैंगिक हिंसा पर चोट करती फिल्म ‘पार्च्ड’

पार्च्ड मूवी के एक सीन में नायिका कहती है कि ‘मर्द बनना छोड़ पहले इंसान बनना सीख ले’ मूवी का यह संवाद स्पष्ट रूप से जग जाहिर कर रहा है कि हमारा पुरुष समाज महिलाओं को किचन और बेडरूम का शोपीस समझता है और सिर्फ शारीरिक भूख को शांत करने के लिए वह महिलाओं के पास जाता है। यदि महिलाएं पुरुष से अनिच्छा जाहिर करती है तो पुरुष उसको मारने पीटने लगता है।

अच्छा यह बताइए क्या महिलाएं सेक्स की चीज है क्या इसके सिवा महिलाओं के पास अपनी व्यक्तिगत जिंदगी और इच्छाएं नहीं है क्या महिलाएं ही बांझ हो सकती हैं पुरुष बांझ नहीं हो सकते हैं क्या? इन्हीं सब प्रश्नों को इस फिल्म की डायरेक्टर लीना यादव ने बड़े पर्दे पर उकेरा है। यह कहानी राजस्थान की चार महिलाओं की है जिन्होंने अपने जीवन में संघर्ष के सिवा कुछ भी नहीं देखा है वह कैसे पुरुष समाज से लड़ती हैं और उसका परिणाम क्या निकलता है इस मूवी में यही दिखाया गया है इस मूवी में सुरवीन चावला और राधिका आप्टे जैसी अभिनेत्री लीड रोल में है।

घरेलू हिंसा को जग जाहिर करता फिल्म ‘थप्पड़’

महिलाओं को सिर्फ महिला होने के लिए जो शारीरिक हिंसा और मानसिक हिंसा से गुजरना पड़ता है इसका अंदाजा हम शब्दों से नहीं लगा सकते हैं क्योंकि शब्द अपर्याप्त हो जाएंगे। दिन प्रतिदिन महिलाओं को ससुराल से ताना मिलता रहता है कि तुम्हारे बाप ने तुम्हें सिखा करके क्या भेजा है और हर एक ऐसे छोटे-छोटे काम पर उसका मानसिक उत्पीड़न किया जाता रहता है और जरूरत पड़ने पर शारीरिक हिंसा से भी गुरेज नहीं करते हैं। एक ऐसी ही फिल्म है तापसी पन्नू द्वारा अभिनय किया गया थप्पड़।

यह संदेश देता है कि महिलाएं भी समानता के अधिकार की पात्र है उन्हें सिर्फ किचन के कामों तक सीमित न किया जाए और कुछ गलतियों पर बेवजह पीटा ना जाए। यह मूवी पुरुषवादी सोच पर कुठाराघात करती है की पुरुष अपने अहम के कारण एक स्त्री से उसके स्त्रीत्व को छीनने के लिए प्रयासरत है।

 नो मीन्स नो से रूबरू कराती फिल्म ‘पिंक’

हमारे समाज में प्राचीन काल से एक कथन प्रचलित है कि यदि महिलाएं कहती हैं नो तो इसका मतलब यस होता है लेकिन रियालिटी में ऐसा नहीं होता है। यदि मान भी ले तो पहले होता रहा होगा क्योंकि महिलाएं पहले सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से इतना सशक्त नहीं थी

पहले की घूंघट प्रथा में नो का मतलब यस होता रहा होगा लेकिन आज की महिलाएं पुरुषों से कदम से कदम मिलाकर चलने वाली महिलाएं हैं उनके नो का मतलब नो ही होता है यदि कोई महिला बोल रही है कि ना तो इसका मतलब समझ जाइए की वह आप में इंटरेस्टेड नहीं है उसके साथ जोर जबरदस्ती ना करें नो अपने आप में केवल एक शब्द नहीं पूरा एक वाक्य है।

 महिलाओं के साहस को दिखाता फिल्म ‘ क्वीन’

डायरेक्टर विकास बहल द्वारा डायरेक्ट की गई मूवी क्वीन जिसमें मुख्य रोल में अभिनेता राजकुमार राव और अभिनेत्री कंगना राणावत है। यह मूवी महिलाओं के साहस को दिखाने का प्रयास करता है। इस मूवी में जहां एक तरफ नायिका अकेली सड़क पार करने में हिचकती है वह कैसे अकेले पेरिस तक का सफर अकेले करती है और हनीमून को लेकर के जो उसके ड्रीम थे वह उन्हें कैसे पूरा करती है इन सब का जिक्र विकास बहल ने अपनी मूवी क्वीन में किया है।

औरत की सीक्रेट पावर से रूबरू कराता फिल्म ‘नीरजा’

डायरेक्टर राम माधवानी द्वारा डायरेक्ट की गई मूवी नीरज जो एक सच्ची घटना पर आधारित मूवी है। यह मूवी चंडीगढ़ की फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट पर बनी है। नीरजा फिल्म में नीरजा भनोट का किरदार सोनम कपूर ने निभाया है। यह मूवी हमें संदेश देती है कि कैसे एक महिला आपातकालीन परिस्थितियों में अपने उस सीक्रेट पावर से रूबरू होती है जो उसे पता ही नहीं होता है कि मैं भी वह कार्य कर सकती हूं जो एक पुरुष कर सकता है इस मूवी में कैसे नीरजा भनोट आतंकवादियों के कैद से यात्रियों को बचाती है। नीरजा भनोट को उनके इस वीरता के लिए उन्हें अशोक चक्र से नवाजा गया था।

 कैसे एक महिला भाषायी अड़चन को दूर करती है इसका जिक्र करती मूवी ‘इंग्लिश विंग्लिश’

90 की दशक की फेमस एक्ट्रेस श्रीदेवी द्वारा अभिनीत मूवी इंग्लिश विंग्लिश महिलाओं को यह संदेश देती है कि बैकवर्ड महिला भी अपने मॉडर्न बच्चों के साथ कैसे कदम से कदम मिलाकर चल सकती है। इसका जिक्र इस मूवी में है। कैसे एक महिला इंग्लिश भाषा सीखती है और उस भाषा को सीखने में उसे किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इस मूवी में इन सब की जानकारी है।

 बेटियों को मोटिवेट करती फिल्म ‘निल बटे सन्नाटा’

अश्विनी अय्यर तिवारी द्वारा डायरेक्ट की गई मूवी ‘निल बटे सन्नाटा’ की जितनी भी प्रशंसा की जाए उतना ही कम है। इस मूवी के लीड रोल में एक्ट्रेस स्वरा भास्कर है। इस मूवी में सिंगल मदर और बेटी के बीच के रिलेशन को दिखाया गया है कि कैसे एक मां अपनी बेटी को जो उसे मैथ्स से भय लगता है उसे दूर करने के लिए प्रयास करती है बल्कि वह स्वयं अपनी बेटी को मोटिवेट करने के लिए स्कूल में एडमिशन लेती है और अपनी बेटी की क्लास में ही बैठकर के मैथ सीखती हैं और अपनी बेटी को मैथ्स सिखाने में मदद भी करती है यह मूवी पुरुषों के अहम पर चोट करती नजर आती है।

निष्कर्ष:

बॉलीवुड अब ऐसी ऐसी मूवी बना रहा है जिससे समाज में जो कुरीतियां व्याप्त है उन कुरीतियों को दूर किया जाए। मूवी एक ऐसी चीज है जिसे आसानी तौर पर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जा सकती है। क्योंकि इसका नेटवर्क बहुत ही लंबा है और स्ट्रांग है और इससे आसानी से सोशल मैसेज दिया जा सकता है।

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